रांची: स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने झारखंड की शिक्षा व्यवस्था, छात्रों की समस्याओं और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार का ध्यान खींचा है। संगठन की संयुक्त सचिव ऐशी घोष ने सोमवार को रांची में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि शिक्षा से जुड़े कई मुद्दे अभी भी समाधान का इंतजार कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि SFI की ओर से 1 सितंबर से झारखंड समेत देशभर में ‘स्कूल बचाओ’ अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान संगठन की टीमें अलग-अलग जिलों के स्कूलों का दौरा करेंगी और वहां उपलब्ध सुविधाओं, शिक्षण व्यवस्था तथा विद्यार्थियों की समस्याओं का सर्वे किया जाएगा। सर्वे के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार के सामने रखी जाएगी।
अकादमिक सत्र में देरी पर चिंता
SFI के मुताबिक, छात्रों के बीच बातचीत के दौरान शैक्षणिक सत्र में देरी एक बड़ी समस्या के रूप में सामने आई है। संगठन का दावा है कि जिन स्नातक पाठ्यक्रमों को निर्धारित समय में पूरा होना चाहिए, उनमें देरी के कारण विद्यार्थियों को अतिरिक्त समय लग रहा है। इसका असर नौकरी के लिए आवेदन करने और उच्च शिक्षा में आगे बढ़ने पर भी पड़ रहा है।
संगठन ने छात्रवृत्ति में देरी का मुद्दा भी उठाया। SFI का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए समय पर वित्तीय सहायता नहीं मिलने से उनकी पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।
हॉस्टल और छात्र सुविधाओं की कमी का मुद्दा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में छात्राओं और आदिवासी विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त हॉस्टल उपलब्ध नहीं होने की बात भी कही गई। संगठन के अनुसार, दूर-दराज के इलाकों से उच्च शिक्षा के लिए आने वाले विद्यार्थियों के सामने रहने की सुविधा एक बड़ी चुनौती है। SFI ने छात्रवृत्ति और आवास जैसी मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने की मांग की।
प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्था पर सवाल
SFI ने प्रतियोगी परीक्षाओं के संचालन में निजी या थर्ड-पार्टी एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। ऐशी घोष ने दावा किया कि कुछ ऐसी एजेंसियों को परीक्षा संबंधी जिम्मेदारियां दी जा रही हैं, जिनके खिलाफ पहले अनियमितताओं के आरोप लग चुके हैं।
संगठन ने सरकार से परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और ऐसी एजेंसियों के चयन को लेकर स्पष्ट व्यवस्था बनाने की मांग की।
छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का विरोध
SFI ने छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस कार्रवाई पर भी आपत्ति जताई। संगठन का कहना है कि विद्यार्थियों को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी समस्याएं और मांगें सरकार के सामने रखने का अधिकार है। संगठन ने राज्य सरकार से छात्रों के मुद्दों को लेकर संवाद बढ़ाने और समस्याओं का समाधान बातचीत के माध्यम से करने की अपील की।
‘स्कूल बचाओ’ अभियान में क्या होगा?
- विभिन्न जिलों के स्कूलों का दौरा किया जाएगा।
- स्कूलों में उपलब्ध सुविधाओं का सर्वे किया जाएगा।
- विद्यार्थियों और शिक्षा से जुड़ी समस्याओं की जानकारी जुटाई जाएगी।
- सर्वे के आधार पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
- रिपोर्ट राज्य सरकार के समक्ष रखकर सुधार की मांग की जाएगी।
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