मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक बाजारों में कमजोर रुख का असर मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। कारोबार शुरू होते ही निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में खुल गए।
शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 344 अंक यानी करीब 0.44 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,272.34 पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं एनएसई निफ्टी 100 से अधिक अंक फिसलकर 24,068.00 के स्तर पर पहुंच गया, जो लगभग 0.59 प्रतिशत की कमजोरी दर्शाता है।
किन वजहों से बढ़ा दबाव?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, हालिया गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 3 प्रतिशत बढ़कर 85.65 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। चूंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है, इसलिए तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए चिंता का विषय मानी जा रही हैं।
इसके अलावा, अमेरिकी शेयर बाजारों में आई कमजोरी का असर एशियाई बाजारों पर भी पड़ा। अमेरिका में प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि जापान का निक्केई सूचकांक भी शुरुआती कारोबार में दबाव में रहा। वैश्विक संकेतों ने भारतीय बाजार की धारणा को भी प्रभावित किया।
किन सेक्टरों पर रहा सबसे ज्यादा असर?
कारोबार की शुरुआत में वित्तीय और ऑटोमोबाइल कंपनियों के शेयरों में सबसे अधिक दबाव देखने को मिला। निफ्टी फाइनेंशियल इंडेक्स में करीब 1.12 प्रतिशत और ऑटो इंडेक्स में लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
श्रीराम फाइनेंस, बजाज फाइनेंस, एलएंडटी, एचसीएल टेक, महिंद्रा एंड महिंद्रा और इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो) जैसे प्रमुख शेयर शुरुआती कारोबार में नुकसान के साथ कारोबार करते नजर आए।
हालांकि, कमजोर बाजार के बीच भी धातु (मेटल) और हेल्थकेयर सेक्टर ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मेटल इंडेक्स में लगभग 0.38 प्रतिशत और हेल्थकेयर इंडेक्स में 0.14 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
आगे बाजार की दिशा पर नजर
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार की चाल काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर महत्वपूर्ण समर्थन माना जा रहा है। यदि यह स्तर टूटता है तो सूचकांक 23,800 तक फिसल सकता है। वहीं 24,300 के ऊपर मजबूती मिलने पर बाजार में दोबारा सकारात्मक रुख देखने को मिल सकता है।
फिलहाल निवेशकों की नजर वैश्विक परिस्थितियों, ऊर्जा बाजार और आगे आने वाले आर्थिक संकेतकों पर बनी हुई है।


