रांची: विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर झारखंड की संस्कृति, परंपरा और आतिथ्य की अनूठी झलक देखने को मिली। यात्री सेवा अभियान के तहत एयरपोर्ट पहुंचने वाले यात्रियों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। यात्रियों को तिलक लगाया गया और गुलाब का फूल देकर झारखंड की आत्मीयता से परिचित कराया गया। इस दौरान हरित स्मृति-चिह्न के तौर पर पौधों के बीज भी वितरित किए गए।
लोक संस्कृति और विरासत से रूबरू हुए यात्री
एयरपोर्ट परिसर में आयोजित कार्यक्रम में झारखंड की स्थानीय संस्कृति और विरासत को प्रमुखता दी गई। यात्रियों को राज्य के पारंपरिक खान-पान, कला, हस्तशिल्प और लोक परंपराओं की जानकारी दी गई। इससे यात्रियों को अपनी यात्रा के साथ झारखंड की सांस्कृतिक पहचान को करीब से समझने का अवसर मिला।
छऊ नृत्य की विशेष प्रस्तुति ने खींचा ध्यान
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण छऊ नृत्य की प्रस्तुति रही। पारंपरिक वेशभूषा में कलाकारों ने छऊ की विशिष्ट शैली और ऊर्जा को मंच पर प्रस्तुत किया। तेज गति वाली मुद्राओं और युद्ध-कला से प्रेरित शारीरिक गतिविधियों ने यात्रियों का ध्यान आकर्षित किया।
छऊ नृत्य में पौराणिक कथाओं, लोककथाओं और प्रकृति से जुड़े प्रसंगों को नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है। यह झारखंड सहित पूर्वी भारत की समृद्ध लोक सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
यात्रियों तक पहुंची झारखंड की सांस्कृतिक पहचान
छऊ नृत्य को यूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया गया है। ऐसे में एयरपोर्ट पर इसकी प्रस्तुति के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले यात्रियों को झारखंड की लोक परंपरा से परिचित कराने का अवसर मिला।
स्वागत के साथ संस्कृति का संदेश
यात्री सेवा अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य यात्रियों को केवल यात्रा सुविधा देने तक सीमित न रखते हुए उन्हें झारखंड की संस्कृति और आतिथ्य का अनुभव कराना रहा। पारंपरिक स्वागत, स्थानीय व्यंजन, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए राज्य की विविध पहचान सामने रखी गई।
बिरसा मुंडा एयरपोर्ट झारखंड आने वाले यात्रियों के लिए प्रमुख प्रवेश द्वार है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से यात्रियों को राज्य की सांस्कृतिक विविधता से यात्रा की शुरुआत में ही परिचित कराने का प्रयास किया गया।
