Tuesday, May 5, 2026

विशेषज्ञ सुबह-शाम की ठंड को हाई बीपी के मरीजों के लिए खतरनाक बता रहे हैं।

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पटना में ठंड बढ़ने से ब्रेन हैमरेज और लकवे के मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। आईजीआईएमएस में मरीजों की भीड़ बढ़ गई है। विशेषज्ञ सुबह-शाम की ठंड को हाई बीपी के मरीजों के लिए खतरनाक बता रहे हैं। ठंड में रक्त वाहिकाएं सिकुड़ने से हार्ट अटैक और ब्रेन हैमरेज का खतरा बढ़ जाता है। बचाव के लिए गर्म कपड़े पहनने और बीपी की नियमित जांच कराने की सलाह दी गई है।

पटना। मौसम में अचानक बदलाव (winter) और लोगों की लापरवाही स्वास्थ्य पर भारी पड़ रही है। विशेष रूप से ब्रेन हैमरेज और स्ट्रोक के मरीजों की संख्या में बीते एक सप्ताह से लगातार वृद्धि देखी जा रही है।

सबसे अधिक मरीज इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) की इमरजेंसी में पहुंच रहे हैं। बीते दो दिनों में 35 मरीज गंभीर स्थिति में भर्ती कराए गए हैं। इसके अतिरिक्त एम्स व पीएमसीएच के साथ-साथ राजधानी के प्रमुख निजी अस्पतालों में भी काफी मरीज भर्ती हैं

विशेषज्ञों के अनुसार, अल सुबह और शाम की ठंडी हवा हाई बीपी के मरीजों के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है। बिना गर्म कपड़ों के सुबह की सैर पर निकल रहे हैं। यह लापरवाही ब्रेन हैमरेज और लकवे (Paralysis) का कारण बन रही है।

IGIMS में सोमवार को भर्ती हुए सात मरीज

इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आइजीआइएमएस) में सबसे अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। डाक्टरों के अनुसार, बीते दो दिनों में 20 गंभीर मरीजों को भर्ती किया गया है। चिकित्सा अधीक्षक डा. मनीष मंडल ने बताया कि सोमवार को ही सात नए मरीज भर्ती किए गए, जबकि इससे पहले से ही 20 से अधिक मरीज आइसीयू में उपचाराधीन हैं।

एम्स पटना, पीएमसीएच और शहर के प्रमुख निजी अस्पतालों में भी स्ट्रोक और ब्रेन हैमरेज के मरीजों की संख्या में तेज बढ़ोतरी देखी जा रही है।

हाई बीपी मरीजों के लिए सबसे बड़ा खतरा

एम्स पटना के न्यूरो सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. (डा.) विकास चंद्र झा ने बताया कि इन दिनों न्यूरोलाजिकल रोगियों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। अधिकांश मरीज पहले से High Blood Pressure के शिकार हैं, लेकिन तापमान में गिरावट के कारण उनका ब्लड प्रेशर अनियंत्रित हो जा रहा है।

उन्होंने चेतावनी दी कि सुबह 8 बजे से पहले और शाम 6.30 बजे के बाद बाहर निकलते समय गर्म कपड़े पहनना अनिवार्य है। बाइक सवारों को विशेष रूप से कान, नाक और मुंह को स्कार्फ से ढंकना चाहिए, ताकि ठंडी हवा नसों पर सीधा असर न डाल सके। ठंड सीधे फेशियल नर्व को प्रभावित कर लकवा जैसी स्थिति पैदा कर सकती है।

ठंड में सिकुड़ती रक्त वाहिकाएं बढ़ा रहीं खतरा

जीएस न्यूरो रिसर्च सेंटर के निदेशक एवं इंटरवेंशनल न्यूरोलाजिस्ट डा. राहुल कुमार के अनुसार, ठंड के मौसम में रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं, इससे हृदय तक रक्त प्रवाह बाधित होता है और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। मस्तिष्क की नसों पर दबाव बढ़ने से ब्रेन हैमरेज की आशंका कई गुना हो जाती है।

तेज अटैक हो सकता है जानलेवा

पीएमसीएच के न्यूरोलाजिस्ट डा. गुंजन ने बताया कि आंशिक ब्रेन हैमरेज के शुरुआती लक्षण कई बार नजर नहीं आते, लेकिन अचानक आए तेज अटैक जानलेवा साबित हो सकते हैं। इसलिए शुरुआती संकेतों को पहचानना बेहद जरूरी है।

स्ट्रोक और ब्रेन हैमरेज के प्रमुख लक्षण

  • चेहरे या शरीर के किसी हिस्से का अचानक सुन्न पड़ जाना
  • बोलने में परेशानी या जुबान लड़खड़ाना
  • दृष्टि धुंधली होना या देखने में कठिनाई
  • चक्कर आना या अचानक संतुलन खो देना

मुख्य कारण

  • अनियंत्रित हाई बीपी
  • नियमित व्यायाम की कमी
  • अधिक वजन
  • धूम्रपान और शराब
  • अत्यधिक तनाव
  • सिर की गंभीर चोट
  • तैलीय व अधिक नमक वाला भोजन
  • गर्भावस्था की जटिलताएं (जैसे एक्लंपसिया)

बचाव के उपाय

  • सुबह-शाम ठंडी हवा से बचें, गर्म कपड़ों का उपयोग करें
  • बीपी नियमित जांचें और दवा डाक्टर की सलाह से लें
  • गुनगुने पानी से स्नान करें, फ्रिज का ठंडा पानी तुरंत न पीएं
  • धूप में कुछ समय बिताएं, रात में स्कार्फ/टोपी का उपयोग करें
  • संतुलित आहार और नियमित व्यायाम अपनाएं

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