नई दिल्ली: भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के लिए एक गंभीर चेतावनी जारी की है. उन्होंने कहा है कि एंथ्रोपिक (Anthropic) कंपनी द्वारा विकसित नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल, जिसे ‘Mythos AI’ कहा जा रहा है, बैंकिंग सुरक्षा के लिए एक ‘अभूतपूर्व’ खतरा पैदा कर सकता है. वित्त मंत्री ने जोर देकर कहा कि बैंकों को अब पहले से कहीं अधिक सतर्क और तैयार रहने की जरूरत है.
क्या है Mythos AI और यह क्यों खतरनाक है?
Mythos AI एंथ्रोपिक कंपनी का एक बेहद शक्तिशाली मॉडल है (जिसे कोडनेम ‘कैप्यबारा’ भी दिया गया है). विशेषज्ञों और खुद कंपनी का मानना है कि यह एआई इतना ताकतवर है कि इसे आम जनता के लिए जारी करना खतरनाक हो सकता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सॉफ्टवेयर और कंप्यूटर सिस्टम में मौजूद उन कमियों को खुद ढूंढ सकता है, जिन्हें इंसान नहीं देख पाते.
वित्त मंत्री ने बताया कि यह एआई उन सुरक्षा खामियों को भी पकड़ सकता है जो 20-30 साल पुरानी हैं. अगर किसी अपराधी ने इसका इस्तेमाल किया, तो वह बैंकों के सुरक्षित सर्वर में आसानी से सेंध लगा सकता है और बड़े पैमाने पर साइबर हमले कर सकता है.
सरकार और बैंकों की तैयारी
शुक्रवार को बात करते हुए निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारतीय बैंकों का आधार अभी मजबूत है, लेकिन एआई के बदलते स्वरूप को देखते हुए पुराने सुरक्षा नियम काफी नहीं होंगे. उन्होंने कुछ मुख्य कदम उठाने के निर्देश दिए हैं:
नियमों में बदलाव: सरकार जल्द ही डिजिटल सुरक्षा से जुड़े कानूनों और नियमों को अपडेट कर सकती है ताकि एआई से होने वाले हमलों को रोका जा सके.
मिलकर काम करना: भारतीय बैंक संघ (IBA) को जिम्मेदारी दी गई है कि वह सभी बैंकों के साथ मिलकर एक सुरक्षा कवच तैयार करे.
रियल-टाइम अलर्ट: बैंकों और सरकारी सुरक्षा एजेंसियों (जैसे CERT-In) के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान तुरंत होना चाहिए ताकि किसी भी हमले को शुरू होने से पहले ही रोका जा सके.
वैश्विक स्तर पर निगरानी
भारत सरकार का आईटी मंत्रालय (MeitY) इस मामले में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बातचीत कर रहा है. दुनिया भर की सरकारें इस बात पर चर्चा कर रही हैं कि एंथ्रोपिक के इस मॉडल के संभावित खतरों से कैसे बचा जाए.
अंत में वित्त मंत्री ने भरोसा दिलाया कि भारत की अर्थव्यवस्था और बैंक पूरी तरह सुरक्षित हैं. हमारे पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार और मजबूत बैंकिंग ढांचा है. लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य की लड़ाई हथियारों से नहीं बल्कि ‘कोड’ और ‘एआई’ से होगी, जिसके लिए सतर्कता ही सबसे बड़ा हथियार है.


