नई दिल्ली: भारतीय बैंकिंग इतिहास में अब तक के सबसे बड़े विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) को मंजूरी मिल गई है. वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले वित्तीय सेवा विभाग (DFS) ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दूसरे सबसे बड़े बैंक, ‘एमिरेट्स एनबीडी’ (Emirates NBD) को निजी क्षेत्र के ऋणदाता आरबीएल बैंक (RBL Bank) में 74 प्रतिशत तक बहुलांश हिस्सेदारी खरीदने की औपचारिक स्वीकृति दे दी है. इस ऐतिहासिक फैसले के बाद देश के बैंकिंग क्षेत्र में लगभग 26,850 करोड़ रुपये (3 अरब अमेरिकी डॉलर) के नए पूंजी निवेश का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है.
आरबीएल बैंक द्वारा शेयर बाजार को दी गई आधिकारिक सूचना के मुताबिक, वित्त मंत्रालय ने 14 मई 2026 को पत्र जारी कर 49 प्रतिशत से अधिक और 74 प्रतिशत तक के निवेश प्रस्ताव को मंजूरी दी. यह रणनीतिक मंजूरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूएई की आधिकारिक यात्रा से ठीक एक दिन पहले आई है, जो दोनों देशों के बीच मजबूत होते आर्थिक और राजनयिक संबंधों को रेखांकित करती है. इस बड़े सौदे की घोषणा पहली बार 18 अक्टूबर 2025 को की गई थी.
सौदा संरचना और शेयर आवंटन
इस सौदे के तहत, एमिरेट्स एनबीडी तरजीही निर्गम के माध्यम से आरबीएल बैंक के कुल 95,90,45,636 पूर्ण चुकता इक्विटी शेयर खरीदेगा. इन शेयरों की कीमत 280 रुपये प्रति शेयर तय की गई है. यह आवंटन आरबीएल बैंक की पोस्ट-इश्यू चुकता शेयर पूंजी का लगभग 60 प्रतिशत होगा. अनिवार्य ओपन ऑफर की प्रक्रिया पूरी होने और लागू विदेशी स्वामित्व सीमाओं के अनुपालन के बाद, एमिरेट्स एनबीडी की अंतिम हिस्सेदारी 51 प्रतिशत से 74 प्रतिशत के दायरे में होगी.
विदेशी बैंक सहायक कंपनी में बदलाव
लेनदेन की प्रक्रिया पूरी होते ही भारतीय बैंकिंग परिदृश्य में एक बड़ा ढांचागत बदलाव आएगा. एमिरेट्स एनबीडी को आरबीएल बैंक के आधिकारिक ‘प्रमोटर’ (प्रवर्तक) के रूप में मान्यता दी जाएगी. इसके साथ ही, आरबीएल बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के अधीन एक ‘विदेशी बैंक की सहायक कंपनी’ के रूप में काम करना शुरू कर देगा. इस सौदे की शर्तों के तहत, एमिरेट्स एनबीडी की भारत में वर्तमान में संचालित सभी शाखाओं (मुंबई, चेन्नई और गुरुग्राम) का विलय भी आरबीएल बैंक के घरेलू नेटवर्क में कर दिया जाएगा.
नियामक स्वीकृतियां
वित्त मंत्रालय की इस अंतिम मंजूरी से पहले इस सौदे को सभी प्रमुख विनियामक विभागों से हरी झंडी मिल चुकी है. निष्पक्ष व्यापार नियामक भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने इस साल जनवरी में इस हिस्सेदारी अधिग्रहण को मंजूरी दी थी, जिसके बाद पिछले महीने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी इसके प्रस्ताव को अपनी अंतिम स्वीकृति दे दी थी.
प्रबंधन का दृष्टिकोण
आरबीएल बैंक के चेयरमैन चंदन सिन्हा ने इस मील के पत्थर पर कहा, “वित्त मंत्रालय की यह मंजूरी हमारी फ्रैंचाइज़ी में निवेशकों के मजबूत भरोसे को दर्शाती है. इससे हमें क्रॉस-बॉर्डर व्यापार गलियारों का विस्तार करने, कॉरपोरेट प्रशासन के उच्चतम मानकों को बनाए रखने और अपने प्रमुख बिजनेस सेगमेंट को तेजी से स्केल करने में मदद मिलेगी.”
बैंक के प्रबंध निदेशक (MD) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) आर सुब्रमण्यकुमार ने इसे बैंक के विकास सफर का एक ऐतिहासिक मोड़ बताया. उन्होंने कहा, “यह निवेश आरबीएल बैंक को भविष्य के लिए तैयार, फुर्तीला और मजबूत संस्थान बनाने में मदद करेगा. हम इस पूंजी का उपयोग तकनीक, जोखिम प्रबंधन और ग्राहकों के अनुभव को वैश्विक स्तर का बनाने के लिए करेंगे.”


