Monday, September 14, 2026

रामगढ़ औद्योगिक प्रदूषण मामले में हाई कोर्ट सख्त, फैक्ट्रियों की साल में दो बार होगी जांच.

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रांची: रामगढ़ में औद्योगिक प्रदूषण को लेकर दायर जनहित याचिका पर झारखंड हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले का निपटारा करते हुए झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB) को औद्योगिक इकाइयों की निगरानी व्यवस्था मजबूत करने का आदेश दिया है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि फिलहाल संबंधित दो औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ पर्यावरण कानूनों के लगातार उल्लंघन का ठोस प्रमाण नहीं मिला है, लेकिन निगरानी प्रक्रिया में कमियां जरूर सामने आई हैं।

साल में दो बार होगा औद्योगिक इकाइयों का निरीक्षण

हाई कोर्ट ने JSPCB के हजारीबाग क्षेत्रीय पदाधिकारी को बिहार फाउंड्री एंड कास्टिंग लिमिटेड और दयाल स्टील लिमिटेड का साल में कम से कम दो बार निरीक्षण करने का निर्देश दिया है।

इनमें से एक जांच बिना पूर्व सूचना के करनी होगी। निरीक्षण के दौरान फैक्ट्रियों की चिमनियों से निकलने वाले उत्सर्जन, औद्योगिक अपशिष्ट और प्रदूषण नियंत्रण के लिए लगाए गए उपकरणों की कार्यप्रणाली की जांच की जाएगी।

निरीक्षण के बाद तैयार रिपोर्ट को दो सप्ताह के भीतर बोर्ड के सदस्य सचिव के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।

48 घंटे तक प्रदूषण बढ़ा तो सात दिन में नोटिस

अदालत ने दोनों औद्योगिक इकाइयों में लगे सतत उत्सर्जन निगरानी सिस्टम को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सर्वर से लगातार कनेक्ट रखने का भी निर्देश दिया है।

यदि निगरानी प्रणाली में प्रदूषण का स्तर निर्धारित सीमा से अधिक 48 घंटे से ज्यादा समय तक पाया जाता है, तो JSPCB को संबंधित इकाई को सात दिनों के भीतर कारण बताओ नोटिस जारी करना होगा।

इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रदूषण के स्तर में असामान्य बढ़ोतरी की स्थिति में समय रहते कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

पर्यावरणीय नुकसान की कोई भौगोलिक सीमा नहीं: कोर्ट

सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने पर्यावरण प्रदूषण के व्यापक प्रभाव पर भी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि पर्यावरण को होने वाला नुकसान किसी एक जिले की प्रशासनिक सीमा तक सीमित नहीं रहता। प्रदूषण का असर दूर के इलाकों और वहां रहने वाले लोगों पर भी पड़ सकता है।

कोर्ट ने इसी व्यापक प्रभाव को देखते हुए प्रदूषण की नियमित निगरानी और प्रभावी नियंत्रण को जरूरी बताया।

स्कूल के आसपास पानी की फिर होगी जांच

विवा इंटरनेशनल स्कूल के आसपास के पानी में फ्लोराइड, टीडीएस और नाइट्रेट की मात्रा निर्धारित मानक से कुछ अधिक पाए जाने के मामले में भी अदालत ने निर्देश दिया है।

कोर्ट ने कहा है कि तीन महीने के भीतर किसी मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से पानी के नमूनों की दोबारा जांच कराई जाए, ताकि स्थिति की सही तस्वीर सामने आ सके।

दामोदर नदी से भी लिए जाएंगे नमूने

दामोदर नदी में औद्योगिक प्रदूषण की स्थिति की जांच के लिए भी नमूने लेने का निर्देश दिया गया है। औद्योगिक क्षेत्र के ऊपरी और निचले हिस्से से पानी के सैंपल लिए जाएंगे।

यदि जांच में यह साबित होता है कि नदी के प्रदूषण के लिए संबंधित औद्योगिक इकाइयां जिम्मेदार हैं, तो उनके खिलाफ पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की कार्रवाई की जाएगी।

स्वस्थ पर्यावरण को जीवन के अधिकार का हिस्सा माना

खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण में जीवन जीने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 में मिले जीवन के अधिकार से जुड़ा है।

अदालत ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों को पर्यावरण संरक्षण से जुड़े निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा है। साथ ही चार महीने के भीतर अनुपालन रिपोर्ट हाई कोर्ट में दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।

हाई कोर्ट के इस फैसले से रामगढ़ क्षेत्र में औद्योगिक प्रदूषण की निगरानी व्यवस्था को अधिक नियमित और जवाबदेह बनाने की उम्मीद है।

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