Wake-Up Stroke Symptoms: आमतौर पर लोगों को लगता है कि ब्रेन स्ट्रोक आने पर व्यक्ति अचानक गिर जाता है या बेहोश हो जाता है। लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। कई बार व्यक्ति रात में सामान्य स्थिति में सोता है और सुबह उठने पर उसके शरीर में स्ट्रोक के लक्षण दिखाई देते हैं। चिकित्सा जगत में इसे ‘वेक-अप स्ट्रोक’ कहा जाता है। यह एक गंभीर स्थिति है, जिसमें समय पर इलाज मिलना बेहद जरूरी है।
जयपुर के नारायणा अस्पताल के इंटरवेंशनल न्यूरोलॉजी एवं न्यूरोलॉजी विभाग के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. गौरव गोयल के अनुसार, नींद से जागने के बाद हाथ-पैर में कमजोरी, चेहरे का एक तरफ झुकना या बोलने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
क्या होता है वेक-अप स्ट्रोक?
वेक-अप स्ट्रोक ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति सोते समय स्ट्रोक का शिकार हो सकता है और उसे इसके लक्षण जागने के बाद महसूस होते हैं। यह अक्सर इस्केमिक स्ट्रोक का मामला होता है, जिसमें मस्तिष्क तक खून पहुंचाने वाली रक्त वाहिका में रुकावट आ जाती है।
चूंकि व्यक्ति सो रहा होता है, इसलिए स्ट्रोक शुरू होने का सही समय पता लगाना मुश्किल हो सकता है। यही वजह है कि ऐसे मामलों में इलाज का निर्णय लेने के लिए डॉक्टरों को विशेष जांच की जरूरत पड़ सकती है।
ब्रेन स्ट्रोक मुख्य रूप से कितने प्रकार के होते हैं?
ब्रेन स्ट्रोक को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा जाता है:
1. इस्केमिक स्ट्रोक: मस्तिष्क तक रक्त पहुंचाने वाली किसी रक्त वाहिका में रुकावट आने से यह स्थिति पैदा होती है। इससे मस्तिष्क के प्रभावित हिस्से तक पर्याप्त रक्त और ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती।
2. हेमोरेजिक स्ट्रोक: जब मस्तिष्क की कोई रक्त वाहिका फट जाती है और उसके आसपास रक्तस्राव होने लगता है, तो इसे हेमोरेजिक स्ट्रोक कहते हैं।
सुबह उठने पर दिखें ये लक्षण तो रहें सतर्क
नींद से जागने के बाद अचानक कुछ लक्षण दिखाई दें तो उन्हें सामान्य थकान या गलत तरीके से सोने का असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
- चेहरे का एक हिस्सा अचानक झुक जाना।
- एक हाथ या पैर में कमजोरी या सुन्नपन महसूस होना।
- बोलने या दूसरों की बात समझने में परेशानी होना।
- अचानक देखने में बदलाव आना।
- चलते समय संतुलन बिगड़ना या अचानक चक्कर आना।
ये स्ट्रोक के चेतावनी संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
क्या देर से पता चलने पर भी इलाज संभव है?
वेक-अप स्ट्रोक में लक्षण शुरू होने का सही समय पता नहीं होता, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इलाज का विकल्प खत्म हो गया है।
डॉक्टर एडवांस MRI और CT स्कैन जैसी इमेजिंग जांचों की मदद से मस्तिष्क की स्थिति का आकलन कर सकते हैं। जांच के नतीजों के आधार पर कुछ मरीजों के लिए खून के थक्के को घोलने वाली दवा या मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी जैसी उपचार प्रक्रिया पर विचार किया जा सकता है।
हालांकि, कौन-सा इलाज उपयुक्त होगा, यह मरीज की स्थिति और जांच रिपोर्ट पर निर्भर करता है।
स्ट्रोक के लक्षण दिखें तो तुरंत क्या करें?
यदि किसी व्यक्ति को सुबह उठने पर स्ट्रोक के लक्षण दिखाई दें, तो बिना देर किए एम्बुलेंस बुलाएं और उसे नजदीकी ऐसे अस्पताल पहुंचाएं जहां स्ट्रोक का इलाज उपलब्ध हो।
इस दौरान इन बातों का ध्यान रखें:
- डॉक्टर को बताएं कि मरीज आखिरी बार कब सामान्य स्थिति में देखा गया था।
- लक्षण अपने आप ठीक होने का इंतजार न करें।
- डॉक्टर की सलाह के बिना एस्पिरिन या कोई दूसरी दवा न दें।
- मरीज को खाने-पीने के लिए कुछ न दें, जब तक चिकित्सकीय सलाह न मिल जाए।
याद रखें: स्ट्रोक के मामले में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। सुबह जागने पर अचानक कमजोरी, चेहरे में बदलाव या बोलने में परेशानी जैसे लक्षण दिखें तो उन्हें हल्के में न लें। तुरंत अस्पताल पहुंचना मस्तिष्क को होने वाले नुकसान को कम करने में मदद कर सकता है।
BHARATSUPERFASTNEWS
