रांचीः विभागीय कामकाज की समीक्षा कर रहे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आज सोमवार को अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के कामकाज की जानकारी ली.
झारखंड मंत्रालय में हुई इस समीक्षात्मक बैठक में अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री चमरा लिंडा, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हफीजुल हसन, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह, विभागीय सचिव कृपानंद झा सहित अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित रहे.
इस बैठक में विभाग द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं एवं कार्यक्रमों की अद्यतन प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई. इस दौरान विभागीय अधिकारियों ने योजनाओं के क्रियान्वयन की वर्तमान स्थिति, प्रमुख उपलब्धियों, चुनौतियों तथा भावी कार्ययोजना से मुख्यमंत्री को अवगत कराया.
इस समीक्षा के क्रम में मुख्यमंत्री ने योजनाओं के प्रभावी बनाने के लिए अधिकारियों को कई निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता यह है कि कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर रहे व्यक्ति तक पहुंचे तथा कोई भी पात्र लाभुक इन योजनाओं से वंचित न रहे. इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए उन्होंने विभागीय स्तर पर आपसी समन्वय को और सुदृढ़ करने, योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने तथा जमीनी स्तर पर गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश दिए.
समीक्षा बैठक में इन योजनाओं पर हुई चर्चा
समीक्षा के क्रम में ई-कल्याण पोर्टल के संचालन एवं उसकी प्रभावशीलता, प्री-मैट्रिक एवं पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं के अंतर्गत लाभुकों को दी जा रही सहायता, मरांग गोमके पारदेशीय छात्रवृत्ति योजना के माध्यम से विद्यार्थियों को विदेश में उच्च शिक्षा हेतु प्रदान की जा रही सुविधाओं, साइकिल वितरण योजना की प्रगति, मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना जैसी योजनाओं के संचालन और क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की गई.
इस दौरान सीएम ने मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना के तहत लाभान्वित लाभुकों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सीधा संवाद स्थापित किया. उन्होंने लाभुकों से योजना के अंतर्गत प्राप्त ऋण, संचालित व्यवसाय, उससे हो रही आय, रोजगार सृजन की स्थिति तथा बैंकिंग प्रक्रियाओं से संबंधित अनुभवों की विस्तृत जानकारी ली.
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से यह जानने का प्रयास किया कि लाभुकों को व्यवसाय संचालन में किसी प्रकार की कठिनाई तो नहीं हो रही है तथा बैंकिंग संस्थानों द्वारा उन्हें समुचित सहयोग मिल रहा है या नहीं. संवाद के दौरान लाभुकों ने योजना के प्रति संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना उनके लिए आत्मनिर्भर बनने का एक सशक्त माध्यम साबित हुई है. उन्होंने बताया कि इस योजना के माध्यम से वे अपने-अपने क्षेत्रों में स्वरोजगार स्थापित कर न केवल अपनी आजीविका सुदृढ़ कर रहे हैं, बल्कि अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर सृजित कर रहे हैं.
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि योजना के अंतर्गत प्राप्त लंबित आवेदनों का शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित किया जाए, ताकि पात्र लाभुकों को समय पर योजना का लाभ मिल सके. साथ ही उन्होंने लाभुकों के लिए नियमित प्रशिक्षण की व्यवस्था सुदृढ़ करने पर जोर दिया, जिससे वे अपने व्यवसाय को बेहतर ढंग से संचालित कर सकें.
इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री ने लाभुकों से निरंतर संवाद एवं फीडबैक प्राप्त करने के उद्देश्य से कॉल सेंटर स्थापित करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था के माध्यम से लाभुकों की समस्याओं की नियमित मॉनिटरिंग की जा सकेगी तथा आवश्यकतानुसार उन्हें मार्गदर्शन एवं सहायता भी उपलब्ध कराया जा सकेगा, जिससे योजना का क्रियान्वयन और अधिक प्रभावी एवं परिणामोन्मुख हो सके.
अल्पसंख्यक, एकलव्य आवासीय विद्यालयों एवं आदिवासी हॉस्टल की समीक्षा
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बैठक के दौरान गढ़वा, देवघर एवं साहिबगंज जिलों में निर्मित अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालयों की अद्यतन स्थिति की समीक्षा की. उन्होंने इन विद्यालयों में उपलब्ध शैक्षणिक संसाधनों, आधारभूत संरचना, छात्र-छात्राओं की नामांकन स्थिति तथा संचालन व्यवस्था की विस्तृत जानकारी प्राप्त की. साथ ही निर्देश दिया कि इन संस्थानों का संचालन उच्च गुणवत्ता के साथ सुनिश्चित किया जाए, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध हो सके.
इसके साथ ही, राज्य में स्वीकृत एवं संचालित एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों की प्रगति की भी समीक्षा की गई. मुख्यमंत्री ने विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता, आवासीय सुविधाएं, भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता एवं सुरक्षा व्यवस्था सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए.
मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन छात्रावासों एवं आदिवासी हॉस्टलों की प्रगति की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि इन सभी संस्थानों में स्वच्छ पेयजल, बिजली, स्वच्छता, स्वास्थ्य सुविधाएं, सुरक्षा व्यवस्था एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए. उन्होंने कहा कि छात्रावासों एवं हॉस्टलों में रहने वाले विद्यार्थियों को सुरक्षित, स्वस्थ एवं अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना सरकार की पहली जिम्मेदारी है.
साथ ही, मुख्यमंत्री ने एनजीओ संचालित आश्रम विद्यालयों एवं अन्य विद्यालयों के विद्यार्थियों को मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालयों में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विद्यालयों के प्राचार्यों से संवाद कर उन्होंने संचालन व्यवस्था एवं प्रबंधन से संबंधित जानकारी भी ली.
विद्यार्थियों को एसआईआर एवं जनगणना के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष कार्यक्रम
मुख्यमंत्री ने शिक्षा के क्षेत्र में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से निर्देश दिया कि विद्यालयों में विशेष कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को एसआईआर (Special Intensive Revision) एवं जनगणना से संबंधित आवश्यक जानकारी प्रदान की जाए. उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को इन विषयों के प्रति जागरूक कर उन्हें समाज में सूचना के वाहक के रूप में विकसित किया जा सकता है, जिससे वे अपने परिवार एवं समुदाय को भी इन महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं के प्रति जागरूक कर सकें. इसके लिए विद्यालय स्तर पर कार्यशालाएं, जागरूकता सत्र एवं विशेष अभियान संचालित किए जाने पर भी जोर दिया गया.
साइकिल वितरण योजना की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वर्तमान आवश्यकताओं एवं बदलते परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखते हुए विद्यार्थियों को पारंपरिक साइकिल के स्थान पर ई-साइकिल उपलब्ध कराने हेतु एक समन्वित एवं व्यावहारिक कार्ययोजना तैयार की जाए. उन्होंने इस दिशा में कल्याण विभाग, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग तथा उद्योग विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विशेष बल दिया.
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के दूरस्थ, ग्रामीण एवं दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले छात्र-छात्राओं के लिए विद्यालय तक पहुंच एक बड़ी चुनौती होती है. ऐसी स्थिति में ई-साइकिल जैसी सुविधा उपलब्ध कराना न केवल उनकी शिक्षा तक पहुंच को आसान बनाएगा, बल्कि उनकी नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने में भी सहायक सिद्ध होगा. उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि योजना का लाभ पात्र विद्यार्थियों को समयबद्ध ढंग से उपलब्ध कराया जाए, ताकि उनकी पढ़ाई किसी भी प्रकार से प्रभावित न हो.
इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कल्याण विभाग द्वारा संचालित अस्पतालों की समीक्षा करते हुए स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता एवं पहुंच को और बेहतर बनाने पर जोर दिया. उन्होंने निर्देश दिया कि रिम्स सहित राज्य के सभी जिला अस्पतालों में अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति वर्ग के मरीजों की सुविधा के लिए विशेष हेल्प डेस्क स्थापित किए जाएं. इन हेल्प डेस्क पर संबंधित वर्ग के प्रशिक्षित कर्मियों की प्रतिनियुक्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि मरीजों को पंजीकरण, परामर्श, जांच एवं उपचार की प्रक्रिया में आवश्यक मार्गदर्शन एवं सहयोग मिल सके. मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल से वंचित एवं जरूरतमंद वर्ग के मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ सहजता से प्राप्त हो सकेगा.
इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री ने अल्पसंख्यक एवं पारंपरिक सामुदायिक संरचनाओं से जुड़ी विभिन्न विकास योजनाओं की समीक्षा करते हुए कब्रिस्तान घेराबंदी कार्यों में तेजी लाने का निर्देश दिया, ताकि संबंधित समुदायों को आवश्यक सुविधाएं समय पर उपलब्ध हो सके. उन्होंने मांझी, परगना, पड़हा, मानकी-मुंडा एवं धुमकुड़िया भवनों के निर्माण कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की तथा अधिकारियों को निर्देशित किया कि इन कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूर्ण कराया जाए. उन्होंने कहा कि ये भवन पारंपरिक सामाजिक-सांस्कृतिक व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.


