रांची: किसानों, छोटे उद्यमियों और स्वरोजगार की योजना बनाने वाले लोगों तक बैंक ऋण आसानी से पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन ने बैंकों को सक्रिय करने की पहल तेज कर दी है। मंगलवार को रांची समाहरणालय में आयोजित डीसीसी, डीएलआरसी और ऋण-जमा अनुपात निगरानी समिति की बैठक में उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री ने बैंकिंग योजनाओं की समीक्षा की।
बैठक के दौरान उपायुक्त ने कम क्रेडिट-डिपॉजिट (सीडी) रेशियो वाले बैंकों को ऋण वितरण बढ़ाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि बैंकों की जिम्मेदारी केवल लोगों से जमा राशि लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में जरूरतमंद लोगों को समय पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
कृषि और एमएसएमई क्षेत्र पर विशेष ध्यान
प्रशासन ने कृषि, छोटे कारोबार और एमएसएमई क्षेत्र में ऋण उपलब्धता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। बैठक में जिले में ऋण की मांग और बैंकों की ओर से किए जा रहे वितरण की स्थिति की समीक्षा की गई।
इसके साथ ही लोन मेला आयोजित करने की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को जल्द आयोजन की तैयारी पूरी करने का निर्देश दिया, ताकि पात्र लोगों को विभिन्न बैंकिंग योजनाओं की जानकारी और ऋण सुविधा एक ही जगह मिल सके।
KCC और स्वयं सहायता समूहों की भी समीक्षा
बैठक में किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), स्वयं सहायता समूहों के क्रेडिट लिंकेज, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP), प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना (PMFME) और पीएम स्वनिधि सहित अन्य योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।
अधिकारियों को सभी पात्र किसानों को KCC से जोड़ने और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने के निर्देश दिए गए। महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को पर्याप्त बैंक क्रेडिट उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।
बैठक में अनुपस्थित बैंक अधिकारियों पर नाराजगी
समीक्षा बैठक में कुछ बैंकों के प्रतिनिधियों की गैरमौजूदगी पर उपायुक्त ने नाराजगी जताई। उन्होंने अग्रणी जिला प्रबंधक (LDM) को संबंधित बैंक प्रतिनिधियों से स्पष्टीकरण मांगने के निर्देश दिए।
प्रशासन ने स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाली योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और आने वाली तिमाही में बैंकिंग प्रदर्शन सुधारने पर भी जोर दिया। अधिकारियों का उद्देश्य है कि सरकारी योजनाओं के पात्र लाभार्थियों तक बैंक ऋण की सुविधा समय पर पहुंचाई जा सके।
