रांचीः झारखंड में मादक पदार्थों की तस्करी की सूचना देने वाले आम लोगों को अब सरकार इनाम देगी. इस संबंध में अधिसूचना भी जारी की गई है.
सरकार के अधिसूचना के अनुसार स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 के तहत निषिद्ध मादक पदार्थों जैसे- अफीम, मॉर्फीन, हेरोइन, कोकीन, ब्राउन सुगर, गांजा, कोडिन आदि का अवैध उत्पादन, अवैध व्यापार, तस्करी, पेडलिंग जैसे कृत्य से समाज में इन हानिकारक पदार्थों के दुरूपयोग की समस्या विकराल रूप धारण कर रही है. यह न केवल लोगों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि समाज, राज्य व देश के अर्थव्यवस्था, विकास तथा सुरक्षा के लिए भी खतरा है.
आज की युवा पीढ़ी जो देश एवं राज्य के भविष्य हैं, इन पदार्थों के दुरूपयोग की चपेट में आकर ना सिर्फ अपने भविष्य का बल्कि समाज, राज्य एवं देश के भविष्य को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं. यह ऐसी समस्या है जिसको नहीं रोका गया तो भविष्य में प्रत्येक परिवार इससे प्रभावित हो सकता है. इस प्रकार के पदार्थों के समाज में मांग को कम करने के उद्देश्य से दुरूपयोग को रोकने के लिए राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम संचालित किया जाता है.
वहीं आपूर्ति को रोकने हेतु स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 एवं अन्य संगत अधिनियमों/नियमों के प्रावधानानुसार पुलिस कार्रवाई किया जाता है. अब ऐसे निषिद्ध मादक पदार्थों का अवैध उत्पादन, अवैध व्यापार, तस्करी, पेडलिंग जैसे कृत्य के विरूद्ध प्रभावी कार्रवाई करने तथा ऐसे कृत्यों के संदर्भ में सूचना देने के लिए लोगों/मुखबिरों के लिए मौद्रिक पुरस्कार का प्रावधान करने से वे इस कार्य के प्रति प्रोत्साहित होंगे. निषिद्ध मादक पदार्थों का अवैध उत्पादन, अवैध व्यापार, तस्करी, पेडलिंग जैसे कृत्य को रोकने की दिशा में प्रभावी सफलता प्राप्त हो सकती है.
इसी वजह से स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 एवं अन्य संगत अधिनियमों/नियमों के प्रावधानानुसार प्रभावी कार्रवाई के लिए सरकारी सेवकों को प्रोत्साहित करने तथा निषिद्ध मादक पदार्थों का अवैध उत्पादन, अवैध व्यापार, तस्करी, पेडलिंग आदि की सूचना देने वाले सूचनादाता/मुखबिर को प्रोत्साहित करने के लिए मौद्रिक पुरस्कार प्रदान करने हेतु निम्नानुसार नीति गठित किया जाता है.
- संक्षिप्त शीर्षक इस नीति को “स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 के तहत निषिद्ध मादक पदार्थों के अवैध उत्पादन, अवैध व्यापार, तस्करी, पेडलिंग आदि की सूचना देने तथा प्रभावी कार्रवाई के लिए प्रोत्साहित करने हेतु झारखण्ड सरकार की नीति 2026” कहा जाएगा.
- विस्तार, प्रारंभ एवं अनुमान्यता/उपयोगिता यह नीति स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 (NDPS Act 1985) तथा अन्य संगत अधिनियमों / नियमावली के प्रावधानों के तहत की गई जप्ती/प्रभावी कार्रवाई / कार्रवाई के लिए दी गई सटीक जानकारी के लिए सरकारी सेवकों तथा मुखबिर / सूचनादाता को पुरस्कार राशि प्रदान करने हेतु लागू होगी.
- स्वीकृत और वितरित अग्रिम/अंतरिम पुरस्कार, यदि कोई हो, को सरकारी सेवकों / मुखबिरों को दिए जाने वाले अंतिम पुरस्कार में समायोजित कर लिया जाएगा.
- सभी संबंधित एजेंसी / विभाग द्वारा पुरस्कार भुगतान / स्वीकृति से संबंधित मामलों के अनुश्रवण के लिए आवर्ती रूप से समीक्षा करने के लिए विभिन्न स्तर के पदाधिकारियों को निर्देशित किया जायेगा. अनुश्रवण के क्रम में यह देखा जायेगा कि कौन-कौन से मामले पुरस्कार / भुगतान के लिए परिपक्व हो रहें हैं तथा परिपक्व मामलों में पुरस्कार स्वीकृति/भुगतान के लिए कार्रवाई प्रारंभ किया गया है अथवा नहीं.
- प्रत्येक मामले में पुरस्कार की राशि का निर्धारण स्वीकृति प्राधिकार द्वारा विभिन्न परिस्थिति/कार्य में सम्मिलित खतरा, किये गये प्रयास, त्वरीत कार्रवाई आदि को ध्यान में रखते हुए किया जायेगा। यह आवश्यक नहीं है कि प्रत्येक मामले में अधिकतम अनुमान्य पुरस्कार ही स्वीकृत किया जाए.
- प्राधिकार के समक्ष अपनी जानकारी नहीं छुपाने वाले सूचनादाता / मुखबिर सामान्यतः अधिक साहस का परिचय देते हैं तथा उन्हें खतरा भी अपेक्षाकृत अधिक होता है. पुरस्कार राशि के निर्धारण में इस तथ्य को संज्ञान में रखते हुए अपेक्षाकृत अधिक पुरस्कार स्वीकृत किया जा सकता है.
- प्राथमिकी दर्ज कराने वाले सूचनादाता/मुखबिर भी अधिक साहसी होते हैं तथा उन्हें अधिक खतरा भी होता है. अतः इस प्रकार के मुखबिर/सूचनादाता को निर्धारित अनुमान्यता से अधिक पुरस्कार राशि स्वीकृत किये जाने पर विचार करना चाहिए.
इस प्रकार रहेगी पुरस्कार की राशि
प्रत्येक मामले में प्रत्येक सरकारी सेवक के लिए पुरस्कार की राशि इस प्रकार है. जिसमें एक लाख तक से लेकर एक लाख से अधिक भी हो सकती है. इसके साथ ही अन्य सूचनादाता के लिए, प्रत्येक मामले में सूचना देने वालों/मुखबिर के लिए पुरस्कार की राशि दो लाख तक या उससे अधिक की राशि दी जा सकती है.


