माघ पूर्णिमा रविवार को मनाई जाएगी, जिसके साथ कल्पवास समाप्त होगा। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य और भगवान नारायण की पूजा का विशेष महत्व है। माघ मास सूर्यदेव और श्री हरि विष्णु को समर्पित है। पुष्य नक्षत्र, प्रीति और सर्वार्थ सिद्धि योग जैसे शुभ संयोग बन रहे हैं। गंगा स्नान से पाप मिटते हैं और तिल, ऊनी वस्त्र आदि का दान मोक्षदायक होता है। सत्यनारायण पूजा से पुण्य फल मिलते हैं।
पटना। माघ मास की पूर्णिमा रविवार को मनाई जाएगी। पूर्णिमा के साथ ही मास का कल्पवास समाप्त हो जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघ मास में देवता पृथ्वी लोक पर निवास करते हैं। तीर्थराज प्रयाग के संगम में स्नान कर अपने इष्ट का जप-तप करते हैं।
कल्पास में श्रद्धालु गंगा, संगम आदि पवित्र नदियों के तट पर पूरे एक माह निवास कर नित्य आस्था की डुबकी लगा कर दान-पुण्य करते हैं। माघी पूर्णिमा को भगवान नारायण के पूजन, पितृ श्राद्ध, निर्धन को दान करने से सुख सौभाग्य, धन व मोक्ष की प्राप्ति होती है।
माघ मास सूर्यदेव और श्री हरि विष्णु को समर्पित है। माघ शुक्ल पूर्णिमा में पुष्य नक्षत्र , प्रीति योग के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग का उत्तम संयोग बना रहेगा। रविवार की सुबह 10.28 बजे तक प्रीति योग और फिर इसके बाद आयुष्मान योग विद्यामन रहेगा।
माघ पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान करने के साथ दान-पुण्य का लाभ मिलता है। माघ पूर्णिमा के दिन गंगा में स्नान करने से समस्त पाप एवं संताप मिट जाते हैं।
माघ पूर्णिमा को दान में तिल, ऊनी वस्त्र, अन्न, गुड़ आदि का दान करना पुण्यदायक होता है। माघ पूर्णिमा के दिन घरों व मंदिरों में भगवान सत्यनारायण की पूजा करने से पुण्य फलों की प्राप्ति होती है।
माघ पूर्णिमा के स्नान-दान व पूजन मुहूर्त
- पूर्णिमा तिथि: देर रात 03:58 बजे तक
- पुष्य नक्षत्र: मध्यरात्रि 12:28 बजे तक
- चर-लाभ मुहूर्त: सुबह 07:57 बजे से 10:41 बजे तक
- अमृत मुहूर्त: सुबह 10:41 बजे से दोपहर 12:03 बजे तक
- शुभ योग: दोपहर 01:25 बजे से 02:48 बजे तक
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 11:41 बजे से 12:25 बजे तक
- प्रदोष मुहूर्त: शाम 05:32 बजे से रात्रि 08:17 बजे तक


