मुंबई: भारतीय वायदा बाजार और वैश्विक स्तर पर आज सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट का रुख देखा गया. शुक्रवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर शुरुआती कारोबार के दौरान दोनों कीमती धातुओं के दाम लगभग 1 प्रतिशत तक लुढ़क गए. यह गिरावट मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव में मामूली राहत और अमेरिकी डॉलर की मजबूती के कारण आई है.
MCX पर कीमतों का हाल
एमसीएक्स (MCX) पर 5 जून की सोने की वायदा कीमतें 0.39 प्रतिशत यानी 594 रुपये की गिरावट के साथ 1,51,167 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुलीं. सत्र के दौरान सोने ने 1,50,750 रुपये का निचला स्तर छुआ, जो पिछले बंद भाव से 0.66 प्रतिशत कम था. वहीं चांदी की बात करें तो 5 मई की वायदा कीमतें 0.95 प्रतिशत या 2,313 रुपये गिरकर 2,39,200 रुपये प्रति किलोग्राम तक आ गईं. हालांकि, बाद में मामूली रिकवरी के साथ चांदी 2,41,345 रुपये के स्तर पर कारोबार करती देखी गई.
अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति
वैश्विक बाजार (COMEX) में भी बिकवाली का दबाव साफ नजर आया. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 1 प्रतिशत की गिरावट के साथ 4,684 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा था. वहीं, चांदी भी लगभग 1 प्रतिशत गिरकर 74.81 डॉलर प्रति औंस पर आ गई. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग में फिलहाल थोड़ी कमी आई है.
गिरावट के मुख्य कारण
मजबूत अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड: अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर की बढ़ती ताकत और बॉन्ड यील्ड में उछाल ने सोने की चमक कम कर दी है. जब डॉलर मजबूत होता है, तो अन्य मुद्राओं के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे इसकी मांग घटती है.
कच्चे तेल में उबाल: ब्रेंट क्रूड एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है. कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने महंगाई की चिंता बढ़ा दी है. विशेषज्ञों के अनुसार, उच्च मुद्रास्फीति के कारण केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम हो जाती है, जो सोने के लिए नकारात्मक संकेत है.
शेयर बाजार में सुस्ती: भारतीय शेयर बाजार (सेंसेक्स और निफ्टी) में भी आज शुरुआती कारोबार में 1 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों में सतर्कता का माहौल है.
कमोडिटी विश्लेषकों का कहना है कि हालांकि आज कीमतों में गिरावट देखी जा रही है, लेकिन मिडिल ईस्ट की अनिश्चितता और वैश्विक आर्थिक हालात को देखते हुए कीमतों में फिर से उछाल आ सकता है. लंबी अवधि के निवेशकों के लिए इस गिरावट को खरीदारी के अवसर के रूप में देखा जा सकता है.


