Sunday, November 1, 2026

बिहार में फसल मुआवजे के लिए 33% नुकसान की शर्त, बक्सर में नहर के पानी से धान की फसल पर संकट

Share

बक्सर | 1 नवंबर 2026 | Bharat Superfast News

बिहार में चक्रवात अर्नब और लगातार बारिश से प्रभावित किसानों को फसल क्षति का मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। हालांकि, राहत पाने के लिए पंचायत के कुल कृषि रकबे के कम से कम 33 प्रतिशत से अधिक हिस्से में फसल नुकसान होना जरूरी बताया गया है। बक्सर जिले में चक्रवात के कारण खेतों में गिरी धान की फसल के बीच नहर का पानी छोड़े जाने से किसानों की चिंता और बढ़ गई है।

किसानों का आरोप है कि पहले ही तेज हवाओं और बारिश से तैयार धान की फसल खेतों में गिर गई थी। इसके बाद खेतों में नहर का पानी पहुंचने से बची हुई फसल के भी खराब होने का खतरा पैदा हो गया है।

तेज हवाओं से खेतों में गिर गई तैयार धान की फसल

चक्रवात अर्नब के प्रभाव से बिहार के कई जिलों में खेती प्रभावित होने की खबरें सामने आई हैं। बक्सर में तेज हवाओं के कारण धान की तैयार फसल खेतों में बिछ गई। किसानों के मुताबिक, फसल पकने के करीब थी और इसी उपज से परिवार का खर्च तथा बच्चों की पढ़ाई चलनी थी।

इसी बीच खेतों में नहर का पानी पहुंचने से किसानों की परेशानी बढ़ गई। उनका कहना है कि पानी में डूबी धान की बालियों के सड़ने और फसल पूरी तरह बर्बाद होने की आशंका है।

किसानों ने पहले ही जताई थी नहर के पानी से नुकसान की आशंका

स्थानीय किसानों के अनुसार, करीब 20 दिन पहले उन्होंने जिला कृषि पदाधिकारी धर्मेंद्र कुमार से मुलाकात कर नहरी क्षेत्र में पानी के प्रवाह को नियंत्रित करने की मांग की थी। किसानों को आशंका थी कि नहर का पानी खेतों में छोड़े जाने से खड़ी फसल को नुकसान हो सकता है।

किसानों का दावा है कि कृषि पदाधिकारी और नहर विभाग के कार्यपालक अभियंता धर्मेंद्र कुमार भारती ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा भी किया था। उस समय धान में बालियां निकल चुकी थीं और खेतों में पानी आने से नुकसान की आशंका जताई गई थी।

इसके बावजूद चक्रवात से फसल गिरने के बाद खेतों में पानी पहुंचने पर किसानों ने नाराजगी जताई है। उनका सवाल है कि पहले से दी गई शिकायतों के बाद पानी रोकने या निकासी की वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई।

किसान ने कहा- अब मजदूरी के लिए पलायन करना पड़ सकता है

प्रभावित किसान लाल बिहारी ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि धान की फसल से परिवार का खर्च और बच्चों की पढ़ाई चलती थी। अब उपज की उम्मीद कमजोर पड़ने के बाद उन्हें दूसरे राज्यों में मजदूरी के लिए जाने की आशंका सता रही है।

उनका कहना है कि जब खेतों को पानी की जरूरत थी, तब पानी नहीं मिला और अब फसल तैयार होने के समय खेतों में पानी पहुंच गया है। इससे बची हुई फसल भी खराब हो सकती है।

पंचायत के कुल कृषि रकबे के 33% से अधिक नुकसान पर मुआवजे का प्रावधान

जिला कृषि पदाधिकारी धर्मेंद्र कुमार के मुताबिक, मुआवजे के लिए पंचायत के कुल कृषि रकबे के 33 प्रतिशत से अधिक हिस्से में फसल क्षति होना जरूरी है। विभागीय जानकारी के अनुसार, मुआवजे की निर्धारित दरें इस प्रकार हैं:

  • सिंचित भूमि: 17,000 रुपये प्रति हेक्टेयर।
  • असिंचित भूमि: 8,500 रुपये प्रति हेक्टेयर।

उन्होंने बताया कि प्रत्येक पंचायत में फसल क्षति का आकलन कराया जा रहा है। अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर सर्वे रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया गया है।

इसका अर्थ है कि मुआवजे की पात्रता केवल किसी एक किसान के खेत में हुए नुकसान पर निर्भर नहीं करेगी, बल्कि पंचायत के कुल कृषि रकबे में हुई क्षति के आकलन की भी भूमिका होगी।

बक्सर में 2.22 लाख पंजीकृत किसान

बक्सर जिले में करीब 2.22 लाख पंजीकृत किसान हैं। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, इनमें से लगभग 50 हजार किसान डिजिटल व्यवस्था से जुड़ चुके हैं।

इस वर्ष जिले में करीब 1.10 लाख हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती की गई है। ऐसे में प्रशासन के सामने प्रभावित क्षेत्रों का सही सर्वेक्षण करने और वास्तविक नुकसान का आकलन करने की जिम्मेदारी है।

किसानों को सर्वे रिपोर्ट और मुआवजे का इंतजार

चक्रवात से फसल गिरने और खेतों में नहर का पानी पहुंचने के बाद बक्सर के किसानों की चिंता बढ़ गई है। अब उनकी नजर कृषि विभाग के सर्वे और मुआवजे की प्रक्रिया पर है।

प्रशासन की ओर से एक सप्ताह के भीतर क्षति आकलन रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया गया है। सर्वेक्षण के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किन पंचायतों में निर्धारित सीमा के अनुसार फसल नुकसान हुआ है और कितने किसान मुआवजे के पात्र बनेंगे।

Bharat Superfast News

Read more

Local News