पटना: बिहार के राज्य विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति प्रक्रिया में सुधार की दिशा में सरकार ने कदम बढ़ाया है। राज्यपाल और आंदोलन कर रहे शोधार्थियों के बीच हुए समझौते के बाद बिहार लोक भवन ने भर्ती व्यवस्था की समीक्षा के लिए चार सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति को 90 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी।
समिति में ये लोग शामिल
बिहार लोक भवन की अधिसूचना के अनुसार, समिति में रिटायर्ड आईएएस अमरजीत सिन्हा, रिटायर्ड आईएएस संजय कुमार, पद्मश्री प्रो. एच.सी. वर्मा और डॉ. पी.के. रॉय को सदस्य बनाया गया है। राज्यपाल सचिवालय में विश्वविद्यालय मामलों के अतिरिक्त सचिव संजय कुमार समिति के सदस्य-सचिव की जिम्मेदारी संभालेंगे।
विश्वविद्यालयों और विशेषज्ञों से जुटाई जाएगी जानकारी
समिति को मौजूदा नियुक्ति व्यवस्था की समीक्षा के लिए विश्वविद्यालयों, सरकारी विभागों, वैधानिक संस्थाओं और अन्य संबंधित संस्थानों से रिकॉर्ड और जरूरी दस्तावेज लेने का अधिकार दिया गया है।
इसके साथ ही अलग-अलग हितधारकों और विशेषज्ञों से लिखित सुझाव भी लिए जाएंगे। समिति आवश्यकता के अनुसार कुलपतियों, वरिष्ठ शिक्षाविदों, विषय विशेषज्ञों, प्रशासकों और अन्य संबंधित लोगों से बातचीत कर उनकी राय ले सकती है।
90 दिन में सौंपनी होगी रिपोर्ट
गठन के बाद समिति को अपनी जांच और विचार-विमर्श पूरा करके 90 दिनों के भीतर बिहार लोक भवन को रिपोर्ट देनी है। रिपोर्ट में मौजूदा व्यवस्था से जुड़े निष्कर्षों के साथ नियुक्ति प्रक्रिया में सुधार के लिए ऐसे सुझाव भी दिए जाएंगे, जिन पर आगे कार्रवाई की जा सके।
समिति छात्रों की मांगों के अलावा सहायक प्राध्यापक नियुक्ति व्यवस्था से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी अपनी सिफारिश दे सकती है।
21 दिन के आमरण अनशन के बाद बनी कमेटी
ऑल पीएचडी होल्डर्स एंड रिसर्च स्कॉलर्स एसोसिएशन ऑफ बिहार के प्रदेश संयोजक कुमुद पटेल के अनुसार, असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव सहित कई मांगों को लेकर 21 दिनों तक आमरण अनशन किया गया था।
आंदोलन के दौरान अतिथि शिक्षकों की सेवा अवधि बढ़ाकर 65 वर्ष करने की मांग भी उठाई गई थी। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि इससे लंबे समय से विश्वविद्यालयों में काम कर रहे अतिथि शिक्षकों के हितों की रक्षा हो सकेगी।
24 अगस्त के समझौते के बाद हुआ गठन
24 अगस्त 2026 को बिहार लोक भवन में राज्यपाल और ऑल पीएचडी होल्डर्स एंड रिसर्चर्स एसोसिएशन के बैनर तले आंदोलन कर रहे छात्रों के बीच समझौता हुआ था। इसमें असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति प्रक्रिया की समीक्षा और व्यापक सुधार के लिए समिति गठित करने पर सहमति बनी थी।
अब इस समझौते के आधार पर समिति का औपचारिक गठन कर दिया गया है। कुमुद पटेल ने इसे पीएचडी धारकों, शोधार्थियों, अतिथि शिक्षकों और उच्च शिक्षा से जुड़े अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया है।
पारदर्शी नियुक्ति व्यवस्था की मांग
आंदोलन से जुड़े कुमुद पटेल का कहना है कि उनकी मांग केवल व्यक्तिगत नियुक्ति तक सीमित नहीं है। उनका उद्देश्य विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापकों की भर्ती व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और न्यायपूर्ण बनाना है।
अब समिति की रिपोर्ट पर यह स्पष्ट होगा कि बिहार की विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती प्रक्रिया को लेकर किन बदलावों और सुधारों की सिफारिश की जाती है।
