बिहार कैबिनेट ने अपनी सेमीकंडक्टर पॉलिसी को मंजूरी दे दी है, जिससे राज्य में बड़े निवेश और रोजगार के अवसर पैदा होंगे। यह नीति अन्य राज्यों की तुलना में 10% अधिक सब्सिडी प्रदान करती है। सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए आवश्यक पानी की प्रचुरता बिहार का एक बड़ा फायदा है, खासकर कोसी नदी के जल का उपयोग किया जा सकता है। हालांकि, बिहार को इस क्षेत्र में अन्य राज्यों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है
पटना। सेमीकंडक्टर सेक्टर की तेजी इस वर्ष बड़े स्तर पर दिखेगी। बिहार ने गुरुवार को राज्य कैबिनेट से अपनी सेमीकंडक्टर पाॅलिसी को मंजूरी दी।
इस सेक्टर में बड़े स्तर पर निवेश होना है और रोजगार की दृष्टि से भी यह महत्वपूर्ण है। बिहार को इस सेक्टर में कदम बढ़ाने में थोड़ी देरी हुई है।
इस वजह से इसका काफी कड़ा मुकाबला देश के अन्य राज्यों में सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में हो रहे काम से है। इस क्षेत्र में काम कर रही कंपनियों को बिहार अपनी पालिसी के माध्यम से अन्य राज्यों की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक सब्सिडी दे रहा।
पानी की प्रचुरता का मिलेगा फायदा
बिहार को फायदा इस बात का है कि इस सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण पानी की यहां प्रचुरता है। इसके लिए कोसी के जल के इस्तेमाल पर बात हो रही।
इस संबंध में जब उद्योग मंत्री डॉ.दिलीप जायसवाल से बात हुई तो उन्होंने बताया कि इस सेक्टर में काम कर रही बड़ी कंपनियों से बात शुरू हाे चुकी है।
सेमीकंडक्टर सेक्टर में टाटा ग्रुप भी अब एक बड़ा नाम है। बिहार के लिए यह नाम करीब का है। पर इस सेक्टर में बिहार की देरी से टाटा ग्रुप का मामला भी अब संभव नहीं दिख रहा।
टाटा ग्रुप को असम सरकार ने अपने यहां जगह दे दी है। इस वर्ष के अंत तक असम में टाटा के चिप एसेंबली यूनि्ट का व्यवसायिक उत्पादन संभव है। टाटा ग्रुप गुजरात के धोलेरा में भी सेमीकंडक्टर यूनिट लगा रहा।
एक वर्ष पहले बिहार की उद्योग विभाग की टीम ने फाॅक्सकान से बात की थी। एचसीएल इस कंपनी के उत्तर प्रदेश में सेमीकंडक्टर की एसेंबलिंग पर आगे आया है।
वेदांता ने भी भारत में सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट लगाने की योजना बनायी है। अनिल अग्रवाल की यह कंपनी गुजरात पर अपने को केंद्रित कर रही।
केन्स टेक्नोलाजी भी सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में इस वर्ष उत्पादन में आ सकती है। यह कंपनी हैदराबाद में अपनी यूनिट लगा रही। गुजरात में ही सीजी पावर की सेमीकंडक्टर यूनिट लग रही।
चिप का केमिकल धोने में पानी जरूरी
सेमीकंडक्टर यूनिट के लिए पानी की भूमिका सबसे अधिक है। एक प्लांट को प्रति दिन लगभग एक लाख लीटर पानी की जरूरत होती है।
चिप के ऊपर लगे केमिकल को धोने में इसका उपयोग होता है। इस सैकड़ों बार धोया जाता है। रसायनों को पतला करने में भी पानी का इस्तेमाल होता है।
उद्योग मंत्री कहते हैं कि बिहार को इस मामले में अन्य राज्यों की तुलना में फायदा है। कोसी के बाढ़ के पानी को एक चैनल बनाकर इसका हम इस्तेमाल कर सकते हैं।


