BIHAR ; 2025 में एग्जिट पोल में एक बार फिर से एनडीए की सरकार बनती हुई नजर आ रही है. 2020 में नीतीश कुमार की पार्टी जिस तरह से तीसरे नंबर पर पहुंच गई थी, उससे चर्चा शुरू हो गई थी कि इस बार भी जेडीयू की स्थिति सबसे खराब होगी लेकिन एग्जिट पोल के रुझान में उनकी दमदार वापसी होती दिख रही है. यह स्थिति तब है, जब करीब 20 साल से मुख्यमंत्री होने के बावजूद उनकी पार्टी के नेता दावा कर रहे हैं कि नीतीश कुमार के लिए एंटी इनकंबेंसी नहीं, प्रो इनकंबेंसी है. यही वजह है कि वह (नीतीश) आज भी सूबे की सियासत के बेताज बादशाह बने हुए हैं.
नीतीश की होगी दमदार वापसी?: 2020 में जेडीयू को केवल 43 सीटों पर जीत मिली थी. आरजेडी (75) और बीजेपी (74) के बाद वह तीसरे नंबर की पार्टी बन गई थी. हालांकि एनडीए को बहुमत मिल गया और बीजेपी ने नीतीश कुमार को ही मुख्यमंत्री बनाया. 2020 के चुनाव प्रचार में नीतीश कुमार ने कहा था कि वह उनका अंतिम चुनाव है और उसका असर यह हुआ कि जेडीयू की सीट घट गई लेकिन इस बार नीतीश कुमार ने मजबूती से विधानसभा चुनाव लड़ा है और बीजेपी के साथ बराबर (101-101) सीटों पर समझौता किया.
एग्जिट पोल से नीतीश कुमार गदगद: दो चरणों के चुनाव के बाद जो एग्जिट पोल आया है, उसमें नीतीश कुमार की सरकार फिर से बनती दिख रही है. 20 साल के शासन के बाद नीतीश कुमार पर कई तरह के सवाल उठ रहे थे. जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर तो कह रहे थे कि जेडीयू को अगर 25 सीट से अधिक आई तो वह राजनीति से संन्यास ले लेंगे. वहीं, तेजस्वी यादव लगातार नीतीश की सेहत को लेकर सवाल खड़े कर रहे थे लेकिन बिहार के लोगों ने जिस तरह बढ़-चढ़कर मतदान किया और अब एग्जिट पोल में जो रुझान आ रहा है, उसके कारण नीतीश कुमार गदगद हैं.
सबकी पसंद क्यों हैं नीतीश?: 2020 और 2020 के चुनाव के बीच में आखिर क्या बदल गया कि नीतीश कुमार की ताकत दोगुनी हो गई. इस बारे में जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन कहते हैं कि बिहार में हर वर्ग के लोग मुख्यमंत्री को चाहते हैं. उनके नेतृत्व में जिस तरह से विकास के कार्य हुए हैं और राज्य आगे बढ़ा है, उससे बिहार की जनता ने उनको दिल-खोलकर आशीर्वाद दिया है.

“नीतीश कुमार के काम का जादू लोगों के सर पर चढ़कर बोल रहा है. इस बार लोगों ने खुलकर आशीर्वाद दिया है. जो लोग नीतीश कुमार के स्वास्थ्य पर सवाल खड़ा कर रहे थे, उन्हें जवाब मिल गया होगा. यह एंटी इनकंबेंसी का उलट है, प्रो इनकंबेंसी नीतीश कुमार के साथ काम कर रहा है.”- राजीव रंजन, राष्ट्रीय प्रवक्ता, जनता दल यूनाइटेड

क्या कहते हैं जानकार?: वहीं, राजनीतिक विशेषज्ञ सुनील पांडे का कहना है कि नीतीश कुमार ने जो उदाहरण पेश किया है, उसके बाद एंटी इनकंबेंसी बिहार की राजनीति से हटा देना चाहिए. एग्जिट पोल के आकड़ों को अगर सही मान लिया जाए तो यह उनकी वापसी का स्पष्ट संकेत है. इसके पीछे की वजह नीतीश कुमार की सुचिता, राजनीतिक पारदर्शिता, ईमानदारी और आधा आबादी के लिए उठाए गए उनके क्रांतिकारी फैसले हैं.

महिलाओं में नीतीश क्यों लोकप्रिय?: सुनील पांडे कहते हैं कि नीतीश कुमार ने महिलाओं के लिए बड़े फैसले लिए हैं. कई राज्यों में शराबबंदी लागू हुआ है लेकिन कभी सफल नहीं रहा, जबकि बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू है और इससे महिलाएं बहुत खुश हैं. वे कहते हैं कि महिलाओं के लिए विकास के लिए नीतीश कुमार ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं. स्कूली शिक्षा से लेकर ग्रेजुएशन और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए वजीफा देने जैसे फैसले लिए. हाल में महिलाओं को जो 10,000 रुपये दिए गए हैं, उसका भी फायदा एनडीए को मिलता दिख रहा है
“सुरक्षा और विकास को लेकर ही महिलाएं नीतीश कुमार को पसंद करती हैं. 10000 रोजगार के लिए जो राशि दी गई है, उसको लेकर कहा जा रहा है कि महिलाओं ने वोट दिया है लेकिन ये पैसे नहीं भी मिलते, तब भी महिलाएं नीतीश कुमार को ही वोट करती. एग्जिट पोल से साफ दिख रहा है कि नीतीश कुमार बिहार की राजनीति के बेताज बादशाह हैं और आगे भी रहेंगे.”- सुनील कुमार पांडे, राजनीतिक विशेषज्ञ
लालू-राबड़ी शासनकाल से तुलना: पटना कॉलेज के पूर्व प्राचार्य एनके चौधरी का कहना है नीतीश कुमार ने विकास को लेकर कभी कोई समझौता किया नहीं है. बिहार में सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा स्वास्थ्य सभी क्षेत्र में स्थितियां बेहतर हुई है और पिछले कुछ सालों से नौकरी रोजगार पर भी ध्यान दिया जा रहा है. कानून व्यवस्था की स्थिति भी लालू राज से काफी बेहतर है और यह बिहार के लोग तुलना कर रहे हैं.
फ्रीबीज से मिला फायदा?: एनके चौधरी कहते हैं कि चुनाव से ठीक पहले जिस प्रकार से नीतीश कुमार ने महिलाओं को रोजगार के लिए ₹10000 की सहायता दी है. सामाजिक सुरक्षा पेंशन 400 से बढ़ाकर 1100 किया है, 125 यूनिट फ्री बिजली दे दी है. फ्री में अनाज दिया जा रहा है. एक करोड़ नौकरी-रोजगार देने का वादा किया है तो इसका फायदा मिलना ही था.
“एग्जिट पोल अब एग्जैक्ट पोल होता है कि नहीं यह तो 14 नवंबर को पता चलेगा. यदि एग्जिट पोल की तरह या उससे बेहतर रिजल्ट आता है तो निश्चित रूप से बिहार के लोगों का विश्वास नीतीश कुमार और एनडीए के प्रति है और इससे कोई इनकार नहीं कर सकता है.”- एनके चौधरी, पूर्व प्राचार्य, पटना कॉलेज
चिराग-उपेंद्र कुशवाहा के आने से मिली मजबूती: 2020 में नीतीश कुमार के खिलाफ चिराग पासवान ने सभी सीटों पर उम्मीदवार उतार दिया था. इनमें से कई सीटों पर बीजेपी के बागी नेता चुनाव लड़े थे. इस वजह से कन्फ्यूजन की स्थिति पैदा हुई और उसका खामियाजा नीतीश कुमार और जेडीयू को उठाना पड़ा. बाद में जेडीयू की तरफ से कई तरह के आरोप भी लगाए गए लेकिन इस बार स्थितियां बदल गई. चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा भी एनडीए के साथ हैं. 2020 में कुशवाहा ने भी नुकसान पहुंचाया था.
वोटिंग में पुरुषों से महिलाएं आगे: इस बार बिहार विधानसभा चुनाव में कुल 66.91 फीसदी हुई थी. जिसमें पुरुषों की भागीदारी 62.8% रही, जबकि 71.6% महिलाओं ने वोट डाले. पहले फेज में 1,76,77,219 महिलाओं ने वोटिंग (69.04%) की, जबकि 1,98,35,325 पुरुषों ने मतदान (61.56) किया. वहीं दूसरे चरण में 1,74,68,572 महिलाओं ने वोट (74.03%) डाले और 1,95,44,041 पुरुषों ने अपने मताधिकार (64.1%) का प्रयोग किया.

14 नवंबर को आएंगे नतीजे: 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा के पहले फेज के लिए 6 नवंबर को 18 जिलों की 121 सीटों पर मतदान हुआ था, जबकि दूसरे चरण के लिए 20 जिलों की 122 सीटों पर वोट डाले गए थे. वहीं 14 नवंबर को मतगणना होगी.


