पटना, 6 अक्टूबर 2026: बिहार के विश्वविद्यालयों में पीएचडी दाखिले और शोध प्रक्रिया को लेकर निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की तैयारी है। राज्यपाल सचिवालय की ओर से 14 विश्वविद्यालयों में विशेष सेल गठित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। इसके साथ ही NET उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की पीएचडी पात्रता को लेकर भी नई व्यवस्था स्पष्ट की गई है।
PhD की पूरी प्रक्रिया पर रखी जाएगी नजर
राज्यपाल सचिवालय ने सभी संबंधित विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से प्रस्तावित सेल को लेकर सुझाव मांगे हैं। प्राप्त सुझावों के आधार पर आगे की व्यवस्था और नियम तय किए जाएंगे।
इस सेल का उद्देश्य पीएचडी में प्रवेश से लेकर शोध पूरा होने तक की प्रक्रिया पर निगरानी रखना है। विश्वविद्यालयों को निर्धारित नियमों के अनुसार ही दाखिले की प्रक्रिया संचालित करनी होगी।
किन 14 विश्वविद्यालयों में बनेगा सेल?
प्रस्तावित निगरानी व्यवस्था के दायरे में राज्य के 14 विश्वविद्यालयों को शामिल किया गया है। इनमें प्रमुख रूप से:
- मगध विश्वविद्यालय
- पटना विश्वविद्यालय
- पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय
- मौलाना मजहरूल हक अरबी एवं फारसी विश्वविद्यालय
- वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय
- जय प्रकाश विश्वविद्यालय
- आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय
- बीआर आंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय
- ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय
- कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय
- पूर्णिया विश्वविद्यालय
- मुंगेर विश्वविद्यालय
- बीएन मंडल विश्वविद्यालय
- तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय
NET पास करने वालों के लिए अहम बदलाव
नई व्यवस्था में NET उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थियों के लिए साल को लेकर स्थिति स्पष्ट की गई है। जिस वर्ष अभ्यर्थी NET क्वालिफाई करेगा, उसे उसी वर्ष के पीएचडी एडमिशन के लिए पात्र माना जाएगा, बशर्ते वह पीएचडी की अन्य निर्धारित शर्तों को भी पूरा करता हो।
उदाहरण के तौर पर, 2026 में NET उत्तीर्ण करने वाला अभ्यर्थी 2026 के पीएचडी प्रवेश के लिए पात्रता रख सकता है, यदि वह बाकी जरूरी मानदंड पूरे करता है।
NET स्कोर की भी रहेगी भूमिका
पीएचडी में प्रवेश के दौरान केवल NET क्वालिफाई होना ही एकमात्र आधार नहीं होगा। NET में प्राप्त अंक और लागू प्रवेश नियमों के अनुसार अन्य पात्रताओं को भी ध्यान में रखा जाएगा।
इसलिए अभ्यर्थियों को संबंधित विश्वविद्यालय की ओर से निर्धारित सभी शर्तों की जानकारी लेकर आवेदन करना होगा।
पुराने पीएचडी मामलों को भी निपटाने का निर्देश
राज्यपाल सचिवालय ने पहले से चल रहे या किसी कारण से लंबित पीएचडी संबंधी मामलों को भी लागू नियमों के अनुरूप पूरा करने पर जोर दिया है। इसका उद्देश्य पुराने मामलों के साथ-साथ नई प्रवेश प्रक्रिया में भी एकरूपता लाना है।
सभी विश्वविद्यालयों को करना होगा नियमों का पालन
राज्यपाल सचिवालय की ओर से 2 अक्टूबर 2026 को विश्वविद्यालयों को पीएचडी प्रवेश से जुड़े निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा गया था। इससे पहले जुलाई 2026 में पीएचडी डिग्री से संबंधित समान नियम भी जारी किए गए थे।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद विश्वविद्यालयों में पीएचडी दाखिले की प्रक्रिया को निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित करने और उस पर निगरानी बढ़ाने की दिशा में काम किया जाएगा।
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