Sunday, July 5, 2026

बिहार- अडानी पावर को मिला ठेका, बनेगा 2400 मेगावाट का अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल प्लांट

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कंपनी के CEO के अनुसार, इस परियोजना से बिहार में उद्योगों को बढ़ावा, ऊर्जा आपूर्ति में स्थिरता, और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.

मुंबई: बिजली क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, अडानी पावर लिमिटेड को बिहार में एक महत्वपूर्ण ऊर्जा परियोजना का संचालन सौंपा गया है. भारत की निजी क्षेत्र की अग्रणी बिजली उत्पादक कंपनी अडानी पावर लिमिटेड को बिहार में बड़ी ऊर्जा परियोजना का ठेका मिला है.

कंपनी को बिहार स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी लिमिटेड (BSPGCL) से लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) मिला है, जिसके तहत वह 2,274 मेगावाट बिजली की आपूर्ति करेगी. यह बिजली भागलपुर के पीरपैंती में बनने वाले 2,400 मेगावाट के थर्मल पावर प्लांट से दी जाएगी.

अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल तकनीक से होगा उत्पादन
यह नया पावर प्लांट 3×800 मेगावाट की अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल तकनीक पर आधारित होगा. इस तकनीक से न केवल बिजली उत्पादन की दक्षता बढ़ती है, बल्कि पारंपरिक पद्धति की तुलना में प्रदूषण भी कम होता है. यह संयंत्र डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ओन एंड ऑपरेट (DBFOO) मॉडल पर बनाया जाएगा, यानी सभी जिम्मेदारी अडानी पावर की होगी.

सबसे कम बोली लगाकर हासिल किया प्रोजेक्ट
इस प्रोजेक्ट के लिए आयोजित बोली प्रक्रिया में अडानी पावर ने सबसे कम दर ₹6.075 प्रति किलोवाट घंटे (KWh) की पेशकश की. प्रतिस्पर्धी माहौल में सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी के रूप में अडानी पावर को यह बड़ा ठेका मिला. अब कंपनी को जल्द ही लेटर ऑफ अवार्ड (LoA) मिलने की उम्मीद है, जिसके बाद वह पावर सप्लाई एग्रीमेंट (PSA) साइन करेगी.

निवेश, रोजगार और औद्योगिक विकास को मिलेगा बढ़ावा
इस परियोजना में लगभग 3 अरब डॉलर (₹53,000 करोड़) का निवेश किया जाएगा. कंपनी के CEO एस. बी. ख्यालिया के अनुसार, इससे बिहार में उद्योगों को बढ़ावा, ऊर्जा आपूर्ति में स्थिरता, और स्थानीय स्तर पर रोज़गार के नए अवसर पैदा होंगे. निर्माण चरण में 10,000 से 12,000 और संचालन में करीब 3,000 लोगों को नौकरी मिलेगी.

निर्धारित समय पर होगी शुरुआत
कंपनी के अनुसार, प्लांट की पहली यूनिट 48 महीनों में और अंतिम यूनिट 60 महीनों में शुरू हो जाएगी. संयंत्र को ईंधन आपूर्ति भारत सरकार की SHAKTI (Scheme for Harnessing and Allocating Koyala Transparently in India) योजना के तहत की जाएगी, जिससे कोयले की उपलब्धता में कोई बाधा नहीं आएगी.

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