हजारीबाग: नवाबगंज स्थित आर्ष कन्या गुरुकुल की छात्रा सौम्या कुमारी आर्या ने पाणिनीय व्याकरण में गोल्ड मेडल हासिल कर संस्थान का नाम रोशन किया है। उन्हें यह उपाधि झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार के हाथों प्रदान की गई। पाणिनीय व्याकरण संस्कृत व्याकरण की एक प्राचीन और विशिष्ट परंपरा है, जिसकी शिक्षा लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या वर्तमान समय में काफी कम है।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से हासिल की उपाधि
सौम्या कुमारी आर्या ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची से साहित्य-पाणिनीय व्याकरण में एमए सत्र 2024-26 के दौरान गोल्ड मेडल प्राप्त किया। उन्होंने महर्षि पाणिनि की अष्टाध्यायी के सूत्रपाठ, धातुपाठ और धातुओं की व्याख्या का अध्ययन करते हुए व्याकरणाचार्य की उपाधि हासिल की है।
पाणिनीय व्याकरण संस्कृत भाषा की व्याकरणिक परंपरा का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। महर्षि पाणिनि की अष्टाध्यायी में भाषा के नियमों को सूत्रों के माध्यम से व्यवस्थित किया गया है।
गुरुकुल में 300 से अधिक छात्र-छात्राएं ले रहे शिक्षा
आर्ष कन्या गुरुकुल में आज भी पारंपरिक गुरुकुल शिक्षा पद्धति को आगे बढ़ाया जा रहा है। आचार्य कौटिल्य के निर्देशन में संचालित इस संस्थान में 300 से अधिक छात्र-छात्राएं शास्त्र और शस्त्र विद्या की शिक्षा ले रहे हैं।
विद्यार्थियों को वेद, उपनिषद, विभिन्न शास्त्र और संस्कृत के साथ आधुनिक शिक्षा भी दी जाती है। मैट्रिक तक की पढ़ाई गुरुकुल परिसर में होती है, जबकि इसके बाद विद्यार्थी उच्चतर शिक्षा के लिए विभिन्न कॉलेज और विश्वविद्यालयों में जाते हैं। संस्थान के अनुसार, यहां पढ़ने वाले कई विद्यार्थी आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं।
ग्रामीण पृष्ठभूमि से आती हैं सौम्या
सौम्या कुमारी आर्या हजारीबाग के केरेडारी प्रखंड के बेल्टू गांव की रहने वाली हैं। उनके पिता कैटरिंग का काम करते हैं। सौम्या ने वर्ष 2012 में गुरुकुल में दाखिला लिया था। इसके बाद उन्होंने झारखंड बोर्ड से मध्यमा और विनोबा भावे विश्वविद्यालय से उप-शास्त्री की शिक्षा पूरी की।
इसके बाद उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची में पाणिनीय व्याकरण की उच्च शिक्षा हासिल की और गोल्ड मेडल प्राप्त किया।
संचालक ने उपलब्धि पर जताई खुशी
गुरुकुल के संचालक आचार्य कौटिल्य ने सौम्या की उपलब्धि पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि पाणिनीय व्याकरण की शिक्षा लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या बेहद कम है और गुरुकुल में इस परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
वर्तमान समय में संस्कृत और पाणिनीय व्याकरण की शिक्षा से विद्यार्थियों की दूरी बढ़ने के बीच सौम्या की उपलब्धि इस क्षेत्र में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण उदाहरण के तौर पर सामने आई है। सौम्या अब इस विषय में आगे की उच्च शिक्षा की तैयारी में जुटी हैं।
