Business News | 3 नवंबर 2026: भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव का असर अब हवाई यात्रा और विमानन कारोबार पर भी पड़ रहा है। पाकिस्तान ने भारतीय विमानों के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर रखा है। इसके कारण एयर इंडिया की यूरोप और उत्तरी अमेरिका जाने वाली कई उड़ानों को लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ रहा है। इससे ईंधन की खपत, उड़ान का समय और संचालन लागत बढ़ गई है।
एयर इंडिया के पूर्व CEO कैम्पबेल विल्सन ने अनुमान जताया था कि यदि पाकिस्तान का एयरस्पेस लंबे समय तक बंद रहता है, तो कंपनी को सालाना करीब 5,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है। बाद में उन्होंने अक्टूबर 2025 में बताया था कि उस समय तक इस पाबंदी से एयरलाइन पर लगभग 4,000 करोड़ रुपये का वित्तीय असर पड़ चुका था।
अब एयर इंडिया के मौजूदा CEO टेवोल्डे ने भी कहा है कि इन पाबंदियों का असर कंपनी पर पड़ रहा है और विदेशी प्रतिस्पर्धियों की तुलना में उसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पाकिस्तान ने भारतीय विमानों के लिए एयरस्पेस क्यों बंद किया?
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद हुई। इस हमले में 26 लोगों की जान गई थी। इसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया।
24 अप्रैल 2025 को पाकिस्तान ने भारतीय विमानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद करने का फैसला किया। जवाब में भारत ने भी पाकिस्तानी विमानों के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर दिया। पाकिस्तान ने भारतीय विमानों पर लगी पाबंदी को कई बार आगे बढ़ाया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसे 24 नवंबर 2026 तक बढ़ाया गया है।
इसका सीधा मतलब है कि भारतीय विमान पाकिस्तान के ऊपर से गुजरकर यूरोप और उत्तरी अमेरिका के कई शहरों तक नहीं पहुंच सकते। उन्हें दूसरे देशों के हवाई क्षेत्र से होकर लंबा रास्ता तय करना पड़ता है।
लंबा रास्ता अपनाने से कैसे बढ़ता है खर्च?
इसे एक सामान्य उदाहरण से समझिए। अगर दिल्ली से लंदन जाने वाला कोई व्यक्ति सीधे रास्ते के बजाय लंबा चक्कर लगाकर पहुंचे, तो उसका समय और ईंधन दोनों अधिक खर्च होंगे। विमानन क्षेत्र में भी यही होता है।
पाकिस्तान का एयरस्पेस बंद होने के कारण एयर इंडिया की कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। इससे कंपनी पर कई तरह के खर्च बढ़ते हैं।
1. ईंधन की खपत बढ़ना
विमान जितनी अधिक दूरी तय करता है, सामान्य तौर पर उसे उतने अधिक ईंधन की जरूरत पड़ती है। लंबा रूट अपनाने से हर उड़ान का फ्यूल बिल बढ़ सकता है।
2. उड़ान का समय बढ़ना
अतिरिक्त दूरी के कारण विमान को अधिक समय तक हवा में रहना पड़ता है। इससे पायलट और केबिन क्रू की ड्यूटी, संचालन और अन्य खर्च प्रभावित होते हैं।
3. बीच में ईंधन भरने की जरूरत
कुछ लंबी उड़ानों में वैकल्पिक रूट के कारण बीच में तकनीकी ठहराव या ईंधन भरने की जरूरत पड़ सकती है। इससे एयरपोर्ट और ग्राउंड हैंडलिंग से जुड़े अतिरिक्त खर्च बढ़ते हैं।
4. विमान के इस्तेमाल पर असर
यदि कोई विमान एक उड़ान में ज्यादा समय लगाता है, तो वह उसी दिन दूसरी उड़ान के लिए कम समय उपलब्ध रहता है। इससे एयरलाइन के पूरे शेड्यूल और विमान उपयोग की योजना प्रभावित हो सकती है।
दिल्ली-शिकागो उड़ान में 2,500 किलोमीटर तक बढ़ी दूरी
सितंबर 2026 में प्रकाशित बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली से शिकागो जाने वाली एयर इंडिया की एक उड़ान पहले पाकिस्तान के ऊपर से करीब 12,500 किलोमीटर की दूरी तय करती थी। वैकल्पिक रास्ता अपनाने के बाद यह दूरी लगभग 15,000 किलोमीटर हो गई।
यानी उड़ान को करीब 2,500 किलोमीटर अतिरिक्त सफर करना पड़ रहा है। इतनी अधिक दूरी का असर ईंधन, समय और विमान के संचालन खर्च पर पड़ना स्वाभाविक है।
5,000 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान कैसे आया?
एयर इंडिया के तत्कालीन CEO कैम्पबेल विल्सन ने बताया था कि सरकार ने एयरलाइन कंपनियों से पाकिस्तान का एयरस्पेस बंद होने के कारण होने वाले संभावित नुकसान का आकलन मांगा था।
एयर इंडिया ने अतिरिक्त दूरी, ईंधन की खपत और दूसरे संचालन खर्चों को ध्यान में रखते हुए करीब 5,000 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान दिया था।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि 5,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा संभावित नुकसान का अनुमान था। अक्टूबर 2025 में कैम्पबेल विल्सन ने उस समय तक करीब 4,000 करोड़ रुपये के वित्तीय असर की जानकारी दी थी। दोनों आंकड़ों को एक ही अवधि का वास्तविक नुकसान नहीं समझना चाहिए।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी प्रभावित हुई थीं उड़ानें
भारत-पाकिस्तान तनाव का असर केवल लंबे अंतरराष्ट्रीय रूट तक सीमित नहीं रहा। ऑपरेशन सिंदूर के बाद कुछ भारतीय हवाई अड्डों पर भी उड़ानों का संचालन प्रभावित हुआ था।
एयर इंडिया के तत्कालीन CEO कैम्पबेल विल्सन के अनुसार, जम्मू, श्रीनगर, लेह, जोधपुर, अमृतसर, भुज, जामनगर और चंडीगढ़ सहित कई हवाई अड्डों पर परिचालन प्रभावित हुआ था। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, उस दौरान करीब 1,000 उड़ानें रद्द हुई थीं और लगभग 70 से 75 हजार यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा था।
विदेशी एयरलाइंस को एयर इंडिया जितनी परेशानी क्यों नहीं?
इसका बड़ा कारण पाकिस्तान की पाबंदी का दायरा है। पाकिस्तान ने भारतीय विमानों के लिए अपना एयरस्पेस बंद किया है, सभी विदेशी विमानों के लिए नहीं।
इसलिए ब्रिटिश एयरवेज, लुफ्थांसा, कतर एयरवेज और एमिरेट्स जैसी विदेशी एयरलाइंस को संबंधित नियमों के तहत पाकिस्तान के ऊपर से उड़ान भरने की अनुमति मिल सकती है। इसके विपरीत एयर इंडिया को कई रूट पर वैकल्पिक रास्ते अपनाने पड़ते हैं।
उदाहरण के तौर पर, लंदन से दिल्ली आने वाला कोई ब्रिटिश एयरवेज विमान पाकिस्तान के ऊपर से गुजर सकता है, जबकि एयर इंडिया की संबंधित उड़ान को दूसरा रास्ता लेना पड़ सकता है। इससे कुछ रूट पर विदेशी प्रतिस्पर्धियों को दूरी और समय के मामले में फायदा मिल सकता है।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय हवाई मार्गों पर दूसरे देशों की पाबंदियां और सुरक्षा संबंधी परिस्थितियां भी लागू होती हैं। इसलिए सभी विदेशी एयरलाइंस को हर परिस्थिति में समान सुविधा मिलना जरूरी नहीं है।
मिडिल ईस्ट का तनाव और महंगा ATF भी बढ़ा रहे चुनौती
एयर इंडिया के सामने केवल पाकिस्तान का एयरस्पेस बंद होने की समस्या नहीं है। मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण भी कई बार हवाई मार्ग प्रभावित होते हैं। भारत से यूरोप जाने वाली उड़ानों के लिए यह क्षेत्र महत्वपूर्ण है। किसी मार्ग पर प्रतिबंध लगने या सुरक्षा कारणों से रास्ता बदलने पर उड़ानों की दूरी और समय बढ़ सकता है।
इसके साथ ही विमान में इस्तेमाल होने वाले ईंधन एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमत भी एयरलाइन की लागत को प्रभावित करती है।
इस तरह कंपनी को दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ता है। एक ओर लंबा रास्ता तय करने से अधिक ईंधन खर्च होता है, वहीं दूसरी ओर ईंधन महंगा होने पर उसी अतिरिक्त खपत की लागत और बढ़ जाती है।
एयर इंडिया कब तक इस परेशानी से जूझेगी?
जब तक पाकिस्तान की ओर से भारतीय विमानों के लिए एयरस्पेस बंद रखने का फैसला लागू रहेगा, तब तक प्रभावित अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ सकता है।
एयरलाइन कंपनियां उड़ानों के समय, रूट और विमान के उपयोग की योजना में बदलाव कर अतिरिक्त खर्च कम करने की कोशिश कर सकती हैं। एयर इंडिया भी सरकार के साथ इस मुद्दे पर चर्चा कर चुकी है।
निष्कर्ष: पाकिस्तान का एयरस्पेस बंद होने का असर केवल उड़ान की दूरी बढ़ने तक सीमित नहीं है। इससे ईंधन खर्च, क्रू ड्यूटी, विमान की उपलब्धता और पूरे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का संचालन प्रभावित होता है। एयर इंडिया के लिए 5,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा संभावित वार्षिक नुकसान का अनुमान है, जबकि पूर्व CEO ने अक्टूबर 2025 में उस समय तक करीब 4,000 करोड़ रुपये के वित्तीय असर की बात कही थी।
Bharat Superfast News | बिजनेस डेस्क
