पश्चिम एशिया संकट के शांतिपूर्ण समाधान की बढ़ती उम्मीदों के बीच आज घरेलू और वैश्विक बाजारों में कीमती धातुओं की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखी गई. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर शुक्रवार को सोने और चांदी के वायदा भाव में 2 प्रतिशत तक का उछाल दर्ज किया गया. भू-राजनीतिक तनाव में कमी आने की संभावना से निवेशकों का रुख एक बार फिर कमोडिटी बाजार की तरफ बदला है.
एमसीएक्स पर सोने की रिकॉर्ड चाल
घरेलू बाजार में एमसीएक्स पर अगस्त डिलीवरी वाला सोना 1.11 फीसदी यानी 1,668 रुपये की भारी तेजी के साथ 1,50,600 रुपये प्रति 10 ग्राम के इंट्राडे हाई पर पहुंच गया. हालांकि, शुरुआती बढ़त के बाद बाजार में मामूली सुधार हुआ और यह 1,49,916 रुपये पर कारोबार करता देखा गया. दिन का निचला स्तर 1,49,569 रुपये रहा.
प्रमुख शहरों में आज के खुदरा भाव (प्रति 10 ग्राम)
bullions.co.in से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, आज देश के मुख्य शहरों में 24 कैरेट और 22 कैरेट सोने के दाम इस प्रकार दर्ज किए गए:
चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल
दूसरी ओर, चांदी के जुलाई वायदा में भी जोरदार खरीदारी देखी गई. चांदी की कीमतें 2,490 रुपये की बढ़त के साथ 2,42,143 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गईं. सत्र के दौरान इसने 2,44,817 रुपये का इंट्राडे हाई छुआ, जो पिछले बंद भाव से 2.15 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है.
कूटनीतिक बयानों का बाजार पर असर
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद सर्राफा बाजार में यह अचानक तेजी आई है, जिसमें उन्होंने संकेत दिया था कि अमेरिका और ईरान इस सप्ताहांत तक किसी शांति समझौते पर पहुंच सकते हैं. इस खबर के आते ही कीमती धातुएं अपने छह महीने के निचले स्तर से तेजी से संभल गईं. हालांकि, ईरानी अधिकारियों द्वारा अंतिम समझौते से इनकार करने के बाद बाजार की बढ़त कुछ हद तक सीमित रही.
कच्चे तेल में गिरावट और वैश्विक रुझान
इस कूटनीतिक प्रगति से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं कम हुई हैं, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आई. अंतरराष्ट्रीय बाजार में डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड लगभग 3 फीसदी गिरकर 85 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 1.59 फीसदी टूटकर 88.94 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. वैश्विक मोर्चे पर, कॉमेक्स (COMEX) चांदी 4 प्रतिशत बढ़कर 66.94 डॉलर और सोना 2 प्रतिशत की बढ़त के साथ 4,203.70 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया. विश्लेषकों का मानना है कि इस तेजी के बावजूद अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका और महंगाई का दबाव बाजार पर बना रहेगा.


