Thursday, June 18, 2026

पश्चिम एशिया में तनाव और खराब वैश्विक संकेतों के कारण सेंसेक्स 410 अंक टूटकर खुला, जिससे आईटी और रियल्टी शेयरों में भारी गिरावट आई.

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पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक बाजारों में भारी गिरावट के कारण 4 जून 2026 को भारतीय शेयर बाजार भारी कमजोरी के साथ खुले. अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले खराब संकेतों और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने घरेलू बाजार पर गहरा दबाव बनाया है.

सेंसेक्स और निफ्टी में शुरुआती गिरावट
कारोबार की शुरुआत में बंबई स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स 410 अंक (0.55%) टूटकर 73,935.83 के स्तर पर खुला. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 भी 100 से अधिक अंकों (0.5%) की गिरावट के साथ लाल निशान में कारोबार करता नजर आया. बाजार के जानकारों का कहना है कि जब तक वैश्विक अनिश्चितता खत्म नहीं होती, तब तक बड़ी तेजी की उम्मीद कम है.

बाजार खुलते ही चौतरफा बिकवाली का माहौल दिखा. सबसे ज्यादा चोट रियल्टी और आईटी सेक्टर पर पड़ी…

  • निफ्टी रियल्टी: 0.67% की गिरावट दर्ज की गई.
  • निफ्टी आईटी: 0.53% नीचे कारोबार कर रहा था. फार्मा और हेल्थकेयर इंडेक्स भी 0.5% तक टूट गए.
  • मजबूती वाले सेक्टर्स: इसके विपरीत, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, ऑयल एंड गैस, सीमेंट और केमिकल्स इंडेक्स मामूली बढ़त के साथ हरे निशान में टिके रहे.
  • टॉप लूजर्स: बाजार को नीचे खींचने वाले प्रमुख शेयरों में ट्रेंट, आयशर मोटर्स, सिप्ला, इंफोसिस और एचडीएफसी बैंक शामिल रहे, जिनमें 1% तक की गिरावट देखी गई.

वैश्विक बाजारों का बुरा हाल
वॉल स्ट्रीट पर कल रात रही मंदी का असर आज एशियाई बाजारों पर स्पष्ट रूप से दिखा. अमेरिकी बाजारों में एसएंडपी 500 इंडेक्स 0.74 प्रतिशत और नैस्डैक 0.9 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए थे. इसके परिणामस्वरूप, आज सुबह जापान का निक्की, दक्षिण कोरिया का कोस्पी और हांगकांग का हैंगसेंग सूचकांक शुरुआती कारोबार में 3 प्रतिशत तक लुढ़क गए.

भू-राजनीतिक घटनाक्रम और कच्चे तेल का प्रभाव
अमेरिका द्वारा इजराइल और लेबनान के बीच संघर्ष विराम समझौते की घोषणा के बाद बाजार में सुधार की उम्मीद जगी थी. हालांकि, ईरान द्वारा कुवैत के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर किए गए औचक हमले ने स्थिति को पुनः संवेदनशील बना दिया. इस हमले के प्रतिशोध में अमेरिकी सेना ने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के समीप ईरानी संपत्तियों पर सैन्य कार्रवाई की, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को लेकर चिंताएं बढ़ गईं. इस भू-राजनीतिक अस्थिरता के बावजूद, कच्चे तेल की कीमतों में आंशिक गिरावट दर्ज की गई. ब्रेंट क्रूड वायदा 1.33 प्रतिशत घटकर 96.50 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 1.31 प्रतिशत की गिरावट के साथ 94.76 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया.

निवेशकों के लिए सलाह
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की लगातार बिकवाली और वैश्विक चिंताओं के कारण बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी. रिटेल निवेशकों को मौजूदा माहौल में ‘देखो और इंतजार करो’ की रणनीति अपनानी चाहिए। हालांकि, फंडामेंटली मजबूत शेयरों में आ रही इस गिरावट को लंबे समय के लिए धीरे-धीरे खरीदारी करने के मौके के रूप में भी देखा जा सकता है.

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