Friday, May 15, 2026

पलामू रेंज में मवेशी तस्करों के नेटवर्क को पुलिस ने रडार पर लिया है.

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पलामू: मवेशी तस्करों के लिए पलामू रेंज सॉफ्ट टारगेट पर है. मवेशी तस्करों का इंटरस्टेट रैकेट पलामू, गढ़वा एवं लातेहार के रूट का इस्तेमाल करता है. तस्करी के कई नेटवर्क बिहार, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ तक फैले हुए हैं. दरअसल तस्कर मवेशी को एक जगह इकट्ठा करते हैं और पलामू, गढ़वा एवं लातेहार के रास्ते पश्चिम बंगाल तक भेजने की कोशिश करते हैं.

पुलिस की रडार पर मवेशी तस्कर

पुलिस ने मवेशी तस्करों के इस नेटवर्क को रडार पर लिया है. पुलिस तस्करों के रूट एवं उनसे जुड़े हुए लोगों के डाटा को खंगाल रही है. पुलिस ने एक कार्य योजना तैयार की है और मवेशी तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की योजना बनाई है.

मवेशी तस्करों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश

एक बार पकड़े जाने के बाद में वैसे तस्कर लगातार अपने पैटर्न को बदलते हैं. पुलिस नेशनल हाइवे और स्टेट हाइवे पर निगरानी को बढ़ाया है, लेकिन कई मामलों में तस्कर ग्रामीण इलाके के रूट का इस्तेमाल करते हैं. पलामू रेंज के डीआईजी किशोर कौशल ने मवेशी तस्करों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. तस्करी करने वाले और पुराने इतिहास वाले का डाटा तैयार करने का निर्देश दिया गया है. सभी जिलों को मामले में कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है.

पश्चिम बंगाल और बिहार जाते हैं मवेशी

पलामू, गढ़वा एवं लातेहार में मवेशी तस्करों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है. अकेले पलामू जिले में पिछले दो सालों में 25 मवेशी तस्करों को गिरफ्तार किया गया है. 200 से अधिक मवेशियों को मुक्त करवाया गया है. पलामू के चैनपुर, नावाबाजार, पाटन, छतरपुर और सतबरवा में सबसे अधिक मवेशी तस्करी के मामले दर्ज किए गए हैं.

कई राज्यों में फैला है मवेशियों का नेटवर्क

इस दौरान पुलिस ने बिहार, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के रहने वाले तस्करों को भी गिरफ्तार किया है. मवेशी तस्कर लगातार अपने पैटर्न को बदल रहे हैं. पहले नेशनल हाइवे का बिहार के इलाके में जाना या वहां से मवेशी को लाने लिए इस्तेमाल होता था. अब एक नए पैटर्न में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं कि तस्कर अब ग्रामीण इलाकों का इस्तेमाल कर हैं. यह रूट बिहार के जीटी रोड से निकलकर पलामू के हरिहरगंज, छतरपुर, पांकी, बालूमाथ और चंदवा होते हुए पश्चिम बंगाल की सीमा तक जा रहा है.

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