पटना। बिहार में रेल परिचालन को अधिक सुगम बनाने की दिशा में रेलवे ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। दानापुर मंडल में नेउरा-जटडुमरी नई रेल लाइन के करीब 20 किलोमीटर लंबे हिस्से को रेल सुरक्षा आयुक्त (CRS) से परिचालन की अनुमति मिल गई है। इस हिस्से के चालू होने से मालगाड़ियों को पटना से बाहर वैकल्पिक मार्ग पर चलाने की सुविधा मिल सकती है, जिससे व्यस्त रेलखंड पर दबाव कम होने की उम्मीद है।
इसका अप्रत्यक्ष लाभ दिल्ली और पटना के बीच चलने वाली संपूर्ण क्रांति, विक्रमशिला और हमसफर जैसी यात्री ट्रेनों को भी मिल सकता है। हालांकि, इन ट्रेनों के ठहराव या समय-सारणी में बदलाव की कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध विवरण में नहीं दी गई है।
नेउरा-जटडुमरी रेल लाइन को मिली हरी झंडी
पूर्व मध्य रेलवे के दानापुर मंडल के अंतर्गत आने वाली इस रेल लाइन का निरीक्षण 8 अक्टूबर को किया गया था। इस दौरान 120 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से ट्रायल भी हुआ। सुरक्षा से जुड़े निर्धारित मानकों की जांच के बाद रेल सुरक्षा आयुक्त ने इस हिस्से पर ट्रेन परिचालन की अनुमति दी।
पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सरस्वती चंद्रा के अनुसार, सुरक्षा मानकों की पुष्टि होने के बाद यह मंजूरी प्रदान की गई है। इससे परियोजना के शेष हिस्से को परिचालन में लाने का रास्ता साफ हुआ है।
पटना को बाईपास कर चल सकेंगी मालगाड़ियां
पटना जंक्शन और इसके आसपास का रेल नेटवर्क दिल्ली-हावड़ा मुख्य मार्ग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस रूट पर यात्री ट्रेनों के साथ बड़ी संख्या में मालगाड़ियों का भी संचालन होता है। व्यस्त रेलखंड पर मालगाड़ियों की आवाजाही के कारण कभी-कभी यात्री ट्रेनों को भी इंतजार करना पड़ता है।
नई लाइन का उपयोग शुरू होने पर मालगाड़ियों को पटना होकर गुजरने के बजाय वैकल्पिक मार्ग से भेजा जा सकेगा। प्रस्तावित मार्ग में नेउरा, दनियावां, बिहारशरीफ, बरबीघा, शेखपुरा और किऊल शामिल हैं।
इस व्यवस्था से दानापुर-पटना-किऊल-झाझा रेलखंड पर यातायात का दबाव घटाने में मदद मिल सकती है। इससे यात्री ट्रेनों के परिचालन के लिए भी अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होने की संभावना है।
42 किलोमीटर की परियोजना का अहम हिस्सा
नेउरा-जटडुमरी रेल लाइन, 42 किलोमीटर लंबी नेउरा-दनियावां नई रेल परियोजना का हिस्सा है। इस परियोजना के अंतर्गत जटडुमरी से दनियावां के बीच 22.74 किलोमीटर लंबा रेलखंड पहले ही तैयार हो चुका है और वहां ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है।
अब नेउरा से जटडुमरी के बीच शेष लगभग 20 किलोमीटर हिस्से को भी सुरक्षा मंजूरी मिल गई है। इसके साथ ही पूरी परियोजना के माध्यम से मालगाड़ियों को पटना के व्यस्त रेल नेटवर्क से बाहर निकालने के लिए एक वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध हो सकेगा।
संपूर्ण क्रांति और विक्रमशिला एक्सप्रेस को क्या होगा फायदा?
संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस और विक्रमशिला एक्सप्रेस जैसी प्रमुख ट्रेनों को इस परियोजना से सीधा नहीं, बल्कि अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है। मालगाड़ियों के लिए वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध होने से मुख्य रेलखंड पर ट्रेनों की आवाजाही को बेहतर ढंग से व्यवस्थित किया जा सकता है।
हालांकि, इन ट्रेनों के ठहराव में बदलाव, यात्रा समय में कमी या देरी घटने को लेकर कोई निश्चित आंकड़ा सामने नहीं आया है। इसलिए यात्रियों को फिलहाल किसी खास ट्रेन के समय या स्टॉपेज में बदलाव की पुष्टि आधिकारिक रेलवे सूचना से ही करनी चाहिए।
रेल लाइन पर स्टेशन, हॉल्ट और पुलों का निर्माण
नेउरा और जटडुमरी के बीच गोनपुरा स्टेशन बनाया गया है। इसके अतिरिक्त अधपा, चामाचक और वाजिदपुर में तीन हॉल्ट विकसित किए गए हैं।
रेलखंड पर बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए तीन बड़े और 16 छोटे पुलों का निर्माण किया गया है। इसके अलावा पांच सीमित ऊंचाई वाले सबवे, दो रोड ओवरब्रिज, एक रेल ओवर रेल संरचना और 12 रोड अंडरब्रिज भी तैयार किए गए हैं।
दिल्ली-हावड़ा रूट पर बढ़ सकती है परिचालन क्षमता
पटना और आसपास के रेलखंड पर यात्री तथा मालगाड़ियों की आवाजाही अधिक होने के कारण परिचालन प्रबंधन रेलवे के लिए महत्वपूर्ण है। नेउरा-जटडुमरी लाइन के उपयोग से मालगाड़ियों को वैकल्पिक मार्ग देने में मदद मिल सकती है।
यदि इस व्यवस्था के तहत मालगाड़ियों का पर्याप्त परिचालन वैकल्पिक लाइन पर होने लगता है, तो मुख्य रेलखंड पर दबाव कम करने और यात्री ट्रेनों की आवाजाही को अधिक सुचारु बनाने की संभावना है। इसका वास्तविक असर मालगाड़ियों के रूट निर्धारण और परिचालन व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
