Lung Cancer: आमतौर पर फेफड़ों के कैंसर को धूम्रपान से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन केवल स्मोकिंग करने वाले लोगों को ही यह बीमारी हो, ऐसा नहीं है। धूम्रपान नहीं करने वाले लोगों में भी फेफड़ों के कैंसर के मामले सामने आते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, वायु प्रदूषण, कार्यस्थल पर कुछ हानिकारक पदार्थों के संपर्क और जीवनशैली से जुड़े कई कारक लंबे समय में जोखिम को प्रभावित कर सकते हैं।
एयर पॉल्यूशन से फेफड़ों को नुकसान
प्रदूषित हवा में मौजूद बारीक कण, खासकर PM2.5, और कुछ हानिकारक गैसें लंबे समय तक सांस के जरिए शरीर में पहुंचती हैं। लगातार प्रदूषण के संपर्क में रहने से फेफड़ों के ऊतकों में सूजन और कोशिकाओं के DNA को नुकसान होने जैसी प्रक्रियाएं हो सकती हैं।
इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) ने आउटडोर एयर पॉल्यूशन और पार्टिकुलेट मैटर को कैंसर पैदा करने वाले कारकों के रूप में वर्गीकृत किया है। घर के अंदर और बाहर दोनों जगह प्रदूषण का लंबे समय तक संपर्क इसलिए चिंता का विषय माना जाता है।
खान-पान का क्या है कनेक्शन?
डाइट को फेफड़ों के कैंसर का सीधा प्रमुख कारण नहीं माना जाता। हालांकि, अत्यधिक प्रोसेस्ड भोजन, जरूरत से ज्यादा कैलोरी और फलों, सब्जियों व फाइबर की कमी वाला आहार वजन बढ़ने और मेटाबॉलिक समस्याओं से जुड़ा हो सकता है।
संतुलित आहार लेना और स्वस्थ वजन बनाए रखना समग्र स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है और कैंसर से जुड़े कुछ जोखिमों को कम करने में मदद कर सकता है।
लंबे समय तक बैठे रहना भी चिंता का विषय
शारीरिक गतिविधि की कमी यानी सेडेंटरी लाइफस्टाइल सीधे तौर पर फेफड़ों के कैंसर का प्रमुख कारण नहीं है। लेकिन कम एक्टिविटी से वजन बढ़ने और मेटाबॉलिक बदलावों का खतरा बढ़ सकता है। कुछ अध्ययनों में अधिक शारीरिक गतिविधि और फेफड़ों के कैंसर के कम जोखिम के बीच संबंध देखा गया है, हालांकि इस संबंध पर धूम्रपान जैसे अन्य कारकों का भी प्रभाव पड़ता है।
तनाव और कैंसर के बीच संबंध को समझना जरूरी
लंबे समय तक रहने वाले तनाव को सीधे फेफड़ों के कैंसर का कारण साबित नहीं किया गया है। लेकिन लगातार तनाव के कारण कुछ लोगों में धूम्रपान, शराब का सेवन, ज्यादा खाना या शारीरिक गतिविधि कम करने जैसी आदतें विकसित हो सकती हैं। ये व्यवहार स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल सकते हैं।
इसलिए तनाव को लेकर सीधे कैंसर का कारण बताने के बजाय उससे जुड़ी जीवनशैली और व्यवहार संबंधी प्रभावों को समझना ज्यादा जरूरी है।
बचाव के लिए किन बातों का रखें ध्यान?
मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. रेशमा पुराणिक के अनुसार, फेफड़ों के कैंसर का जोखिम कई वर्षों तक अलग-अलग जोखिम कारकों के संपर्क का परिणाम हो सकता है। ऐसे में बचाव के लिए किसी एक बदलाव के बजाय कई स्तरों पर सावधानी जरूरी है।
- तंबाकू और धूम्रपान से दूरी बनाए रखें।
- प्रदूषित हवा के संपर्क को जहां तक संभव हो कम करें।
- नियमित शारीरिक गतिविधि को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।
- संतुलित और पौष्टिक आहार लें।
- शरीर का स्वस्थ वजन बनाए रखने की कोशिश करें।
- सांस से जुड़ी लगातार बनी रहने वाली समस्या होने पर डॉक्टर से सलाह लें।
कुल मिलाकर, फेफड़ों के कैंसर का जोखिम केवल धूम्रपान तक सीमित नहीं है। पर्यावरण, कामकाज और जीवनशैली से जुड़े कई कारकों को नियंत्रित करने से स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है।
