Tuesday, May 5, 2026

देश में नया लेबर कोड लागू हो गया है, लेकिन ग्रामीण बैंक के कर्मचारी इसका विरोध कर रहे हैं, जानिए क्यों

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पटना : भारत सरकार ने पुराने श्रम कानून की जगह अब नए चार लेबर कोड लागू कर दिए हैं. मोदी सरकार जहां इसे मजदूरों और कर्मचारियों के हित में बता रही है, वहीं ग्रामीण बैंक के कर्मचारी इसका विरोध कर रहे है. कर्मचारियों का कहना है कि सरकार द्वारा बैंकों का निजीकरण और श्रम कानूनों में बदलाव श्रमिकों के अधिकारों को कमजोर कर रहा है. आइये जानते है कि नया लेबर कोड क्या है, और आखिर ग्रामीण बैंक कर्मचारी इसका विरोध क्यों कर रहे हैं विरोध?.

  • नया लेबर कोड का विरोध में ग्रामीण बैंक के कर्मचारी : ग्रामीण बैंक के कर्मचारियों ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है. कर्मचारियों का कहना है कि नया लेबर कोड कर्मचारियों के हित में नहीं है. ऐसे में संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान देशभर के ग्रामीण बैंक कर्मचारी खास प्रदर्शन करेंगे और सरकार की नीतियों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करेंगे.

700 जिलों में कार्यरत कर्मी करेंगे देशव्यापी प्रदर्शन : ग्रामीण बैंक कर्मियों के इस प्रदर्शन को देश की सभी मजदूर यूनियन का साथ मिल रहा है. बिहार ग्रामीण बैंक ऑफिसर्स फेडरेशन के विशेष प्रतिनिधि सत्र में शामिल पदाधिकारियों ने कहा है कि देश के 700 जिलों में तैनात ग्रामीण बैंक कर्मचारी एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन करेंगे. उनका कहना है कि ग्रामीण स्तर पर बैंकिंग सेवाओं में महत्वपूर्ण योगदान देने के बावजूद सरकार उनकी मांगों और सुरक्षा को नजरअंदाज कर रही है.

नौकरी के नए नियम, कितने फायदेमंद? : ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशंस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ अरविंद कुमार ने बताया कि केंद्र की ‘एक राज्य एक ग्रामीण बैंक’ नीति के कारण ग्रामीण बैंकों की संख्या 43 से घटाकर 28 कर दी गई है. उनका कहना है कि इस कदम से ग्रामीण बैंकिंग ढांचे को कमजोर किया जा रहा है और छोटे बैंकों के अस्तित्व पर संकट बढ़ रहा है.

”सरकार अब इन ग्रामीण बैंकों में आईपीओ जारी करने की तैयारी में है, जिससे बैंकों के निजी हाथों में जाने का खतरा बढ़ गया है. ग्रामीण बैंकों की संरचना मूल रूप से किसानों, मजदूरों और ग्रामीण इलाकों की आवश्यकताओं पर आधारित है. ऐसे में निजीकरण से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ेगा.” – डॉ अरविंद, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन

FDI बढ़ाने की योजना पर भी आपत्ति : उन्होंने यह भी कहा कि सरकार प्रायोजक व्यावसायिक बैंकों का पुनः विलय कर उन पर विदेशी निवेश यानी एफडीआई की सीमा 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 49 प्रतिशत करने की योजना बना रही है. इससे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक विदेशी नियंत्रण में जा सकते हैं. अगर ऐसा हुआ तो विदेशी कंपनियां अपने निदेशक नियुक्त करेंगी और बैंकिंग नीतियां भारत के बजाय उनके वाणिज्यिक हितों को केंद्र में रखकर चलेंगी.

नया लेबर कोड मज़दूर विरोधी और उद्योगपतियों के हित : डॉ अरविंद कुमार ने सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि उसने 29 पुराने श्रम कानूनों को समाप्त कर चार नए लेबर कोड लागू कर दिए हैं, जिससे श्रमिकों के अधिकार और सुरक्षा कमजोर हो गई है. उन्होंने कहा कि ये कोड मूल रूप से कॉर्पोरेट हितों को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं, जबकि मजदूर वर्ग की वास्तविक जरूरतों की अनदेखी की गई है.

”सरकार 12 बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का विलय कर केवल तीन बैंक बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है. अगर ऐसा हुआ, तो इससे बड़े पूंजीपतियों और कॉर्पोरेट घरानों को लाभ मिलेगा, जबकि आम जनता और छोटे उपभोक्ताओं को नुकसान होगा. बैंकिंग क्षेत्र में विदेशी पूंजी का अधिक हस्तक्षेप राष्ट्रीय आर्थिक योजनाओं को प्रभावित कर सकता है.” – डॉ अरविंद, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन

महिलाओं की नाइट शिफ्ट गंभीर मुद्दा : उन्होंने बताया कि नए लेबर कोड के तहत महिलाओं को रात्रि ड्यूटी दी जा सकती है, जिसे उन्होंने सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर चिंता बताया. सरकार का तर्क है कि समान काम समान वेतन होना चाहिए और सभी कर्मचारी सभी शिफ्ट में काम कर सकते हैं, पर कर्मचारियों ने इसे अव्यावहारिक बताया है.

वर्किंग ऑवर बढ़ने से बढ़ेगा काम का बोझ : सरकारी क्षेत्र के बैंकों में अभी वर्किंग ऑवर 6 घंटे 30 मिनट का है. लेकिन नए लेबर कोड के अनुसार काम का समय बढ़कर 8 घंटे हो जाएगा और सप्ताह में कुल 48 घंटे काम करना होगा. कर्मचारियों का कहना है कि इससे उनका काम का बोझ बढ़ेगा और निजी जीवन पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा.

26 नवंबर से देशभर में व्यापक विरोध : डॉ अरविंद के मुताबिक, 26 नवंबर से संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान सिर्फ ग्रामीण बैंक कर्मचारी ही नहीं, बल्कि सभी सरकारी बैंक कर्मचारी और मजदूर यूनियन संयुक्त रूप से प्रदर्शन करेंगी. यह विरोध सरकारी बैंकों के प्रस्तावित आईपीओ और चार लेबर कोड के खिलाफ होगा.

सरकारी बैंकों में कर्मचारियों की संख्या में भारी कमी : डॉ अरविंद कुमार ने बताया कि वर्ष 2024 में सरकारी बैंकों में 8.80 लाख कर्मचारी कार्यरत थे, जबकि अब यह संख्या घटकर करीब 7.70 लाख रह गई है. उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की कमी के बावजूद आउटसोर्सिंग के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को अस्थायी रूप से रखा जा रहा है, जिन्हें नौकरी की कोई सुरक्षा प्राप्त नहीं है.

क्या है ग्रामीण बैंक कर्मचारियों की मांगें? : मजदूर यूनियन मांग कर रही हैं कि आउटसोर्सिंग वाले कर्मचारियों को नियमित किया जाए और यूनियनों की भूमिका को कमजोर करने के प्रयास बंद किए जाएं. उनका कहना है कि स्थायी कर्मचारियों की जगह आउटसोर्सिंग पर निर्भरता बढ़ाना बैंकिंग सेवाओं और कर्मचारियों के भविष्य दोनों के लिए नुकसानदायक है.

4 लेबर कोड में बदले 29 पुराने कानून : मोदी सरकार ने देश के करीब 40 करोड़ से अधिक मजदूरों और कर्मचारियों के लिए एक बड़ा फैसला करते हुए 21 नबवंबर 2025 से चार नए लेबर कोड लागू किए है. पहले जो 29 अलग-अलग श्रम कानून थे, उनमें से जरूरी बातें निकाल कर अब चार आसान नियमों में बदल दिया गया है. इन नये नियमों का मकसद हर कामगार को वक्त पर वेतन, ओवर टाइम वेतन, न्यूनतम मजदूरी, महिलाओं को बराबर मौका, सोशल सिक्यूरिटी और फ्री हेल्थ चेकअप देना है.

नया लेबर कोड, कर्चारियों की मौज : सरकार का कहना का है पुराना श्रम कानून यानी 1930 से 1950 के बीच बने थे. जब कामकाज, इंडस्ट्री और टेक्नोलॉजी आज से बिलकुल अलग थे. नए लेबर कोड आधुनिक जरूरतों और अंतरराष्ट्रीय मानकों को ध्यान में रखकर बनाए गए है. इसलिए पुराने श्रम कानूनों को सरल बनाकर 4 नए लेबर कोड में बदल दिया गया है.

सैलरी, सेहत और ग्रेच्युटी में बड़े बदलाव : नये कानून से कर्मचारियों को अब पांच की जगह सिर्फ एक साल में ग्रेच्युटी का फायदा मिलेगा. यानी किसी भी कर्मचारी को अब 5 साल एक ही जगह नौकरी करना जरूरी नहीं होगा. अगर वो कही एक साल भी काम करता है तो उसे ग्रेच्युटी का लाभ मिल जाएगा.

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