दुमका, 29 सितंबर 2026: दुमका के एमपी-एमएलए विशेष न्यायालय ने करीब एक दशक पुराने बाल विवाह से जुड़े मामले में झारखंड भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और बोरियो के पूर्व विधायक ताला मरांडी समेत पांच आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने यह फैसला पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के आधार पर सुनाया।
मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश मोहित चौधरी की अदालत में हुई। जुलाई 2026 तक इस मामले में गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे थे और बहस के बाद फैसले की प्रक्रिया आगे बढ़ी थी।
क्या था पूरा मामला?
मामला वर्ष 2016 का है। ताला मरांडी के बेटे मुन्ना मरांडी की शादी एक नाबालिग लड़की से होने के आरोप के बाद यह प्रकरण सामने आया था।
मामले में सरकारी स्तर से कार्रवाई शुरू हुई और बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। उस समय ताला मरांडी, उनके बेटे मुन्ना मरांडी और लड़की के पिता समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया था। पुराने रिकॉर्ड में इस मामले की कानूनी कार्रवाई का उल्लेख मिलता है।
पांच आरोपियों पर चला मुकदमा
मामले में ताला मरांडी और मुन्ना मरांडी के अलावा भगन बास्की, भीमा मरांडी और अनिल हेम्ब्रम को भी आरोपी बनाया गया था।
मामला पहले गोड्डा की अदालत में चला। बाद में इसकी सुनवाई दुमका के एमपी-एमएलए विशेष न्यायालय में स्थानांतरित हुई।
अदालत में 11 गवाह पेश किए गए
बचाव पक्ष के अधिवक्ता प्रतीक झा के मुताबिक, मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 11 गवाह प्रस्तुत किए गए।
बचाव पक्ष के अनुसार, सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में सभी पांच आरोपियों को बरी कर दिया।
2016 में दर्ज हुआ था मामला
पुराने अदालती रिकॉर्ड के मुताबिक, इस प्रकरण में 2016 में आरोपियों के खिलाफ बाल विवाह प्रतिषेध कानून के तहत कार्रवाई शुरू हुई थी। उस समय ताला मरांडी झारखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और बोरियो से विधायक थे।
लगभग दस वर्ष तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अब दुमका की विशेष अदालत ने मामले में अपना फैसला सुनाया है।
फैसले के बाद क्या हुआ?
फैसला सुनाए जाने के बाद ताला मरांडी समेत अन्य आरोपी अदालत परिसर से बाहर निकले। अदालत का फैसला साक्ष्य के अभाव के आधार पर पांचों आरोपियों के पक्ष में रहा।
