Friday, July 24, 2026

झारखंड हाईकोर्ट का अहम फैसला: दशकों पुरानी जमाबंदी को केवल प्रशासनिक आदेश से समाप्त नहीं किया जा सकता

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रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने जमीन से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि लंबे समय से चली आ रही जमाबंदी को महज किसी प्रशासनिक आदेश के आधार पर रद्द नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि यदि किसी भूमि की जमाबंदी कई दशकों से कायम है और उस पर लंबे समय से राजस्व रिकॉर्ड में प्रविष्टियां दर्ज हैं, तो उसे समाप्त करने के लिए विधि सम्मत प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि 60 साल पुरानी जमाबंदी को केवल अधिकारियों के आदेश से रद्द करना उचित नहीं है। ऐसी स्थिति में प्रभावित पक्ष को सुनवाई का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए और सक्षम न्यायिक या राजस्व प्रक्रिया के तहत ही कोई निर्णय लिया जा सकता है।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि पुरानी जमाबंदी को समाप्त करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की गई थी, लेकिन इस प्रक्रिया में कानूनी प्रावधानों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं किया गया। अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति के लंबे समय से चले आ रहे भूमि अधिकार को खत्म करने के लिए ठोस आधार और उचित कानूनी प्रक्रिया जरूरी है।

पुराने राजस्व रिकॉर्ड का महत्व बताया

हाईकोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि वर्षों से चले आ रहे राजस्व रिकॉर्ड, लगान भुगतान और जमाबंदी जैसी प्रविष्टियां भूमि अधिकारों के मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य होती हैं। इन्हें बिना उचित जांच और सुनवाई के एकतरफा तरीके से समाप्त नहीं किया जा सकता।

प्रशासन के लिए भी संदेश

इस फैसले को राज्य में पुराने भूमि विवादों के मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत के आदेश से यह स्पष्ट हो गया है कि राजस्व अधिकारियों को जमाबंदी रद्द करने जैसी कार्रवाई करते समय निर्धारित कानून और प्रक्रिया का पालन करना होगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस फैसले से उन लोगों को राहत मिल सकती है जिनकी पुरानी जमाबंदी को बिना पर्याप्त सुनवाई या जांच के प्रशासनिक स्तर पर चुनौती दी गई है। अब ऐसे मामलों में अधिकारियों को दस्तावेजों, रिकॉर्ड और पक्षकारों के अधिकारों की गहन जांच के बाद ही निर्णय लेना होगा।

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