Jharkhand Land Survey: झारखंड में महिलाएं खेती और ग्रामीण आजीविका में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, लेकिन जमीन के मालिकाना हक के मामले में उनकी स्थिति चिंताजनक है। लैंडसे, ग्राम नियोजन केंद्र और वीबी नेट फाउंडेशन की ओर से किए गए सर्वेक्षण के अनुसार, केवल 4 प्रतिशत महिलाओं के नाम जमीन दर्ज है, जबकि 97 प्रतिशत महिलाएं परिवार की कृषि आय में योगदान करती हैं। सर्वे में भूमि कानूनों, सरकारी योजनाओं और जमीन के पंजीकरण की प्रक्रिया को लेकर भी जागरूकता की कमी सामने आई है।
तीन जिलों की आठ पंचायतों में हुआ सर्वे
यह अध्ययन झारखंड के लोहरदगा, पूर्वी सिंहभूम और पश्चिमी सिंहभूम जिलों की आठ पंचायतों में किया गया। इसमें करीब एक हजार महिलाओं और पंचायती राज संस्थाओं के सदस्यों को शामिल किया गया। सर्वे का उद्देश्य महिलाओं की भूमि संबंधी जानकारी और भूमि प्रशासन की सेवाओं तक उनकी पहुंच का आकलन करना था।
रिपोर्ट के अनुसार, खेती में सक्रिय भागीदारी के बावजूद बड़ी संख्या में महिलाओं को जमीन से जुड़े अधिकारों और सरकारी योजनाओं की पर्याप्त जानकारी नहीं है। इससे भूमि के स्वामित्व और उससे जुड़े फैसलों में महिलाओं की भागीदारी प्रभावित होती है।
भूमि कानूनों और सरकारी योजनाओं की जानकारी का अभाव
सर्वेक्षण में लोहरदगा जिले की 80 प्रतिशत महिलाओं को भूमिहीन लोगों को जमीन उपलब्ध कराने से जुड़ी योजनाओं की जानकारी नहीं थी। रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वे में शामिल महिलाओं को सीएनटी एक्ट, एसपीटी एक्ट और विल्किंसन रूल की जानकारी भी नहीं थी।
पूर्वी सिंहभूम और पश्चिमी सिंहभूम में भी स्थिति चिंताजनक बताई गई। इन दोनों जिलों में 87 प्रतिशत उत्तरदाता भूमि संबंधी योजनाओं को लेकर अनजान थीं या उन्हें इनके बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं थी। वहीं, 99 प्रतिशत महिलाओं को लागू भूमि कानूनों की पर्याप्त जानकारी नहीं थी।
ये आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण महिलाओं तक भूमि अधिकारों से संबंधित कानूनी और प्रशासनिक जानकारी पहुंचाना एक बड़ी चुनौती है।
जमीन का पंजीकरण कहां होता है, यह भी नहीं जानतीं कई महिलाएं
सर्वे में भूमि संबंधी सेवाओं तक पहुंच को लेकर भी जानकारी की कमी सामने आई। लोहरदगा में 97 प्रतिशत महिलाएं यह नहीं बता सकीं कि जमीन का पंजीकरण कहां कराया जाता है।
पूर्वी और पश्चिमी सिंहभूम में भी 88 प्रतिशत उत्तरदाता महिलाओं को जमीन के पंजीकरण कार्यालय की सही जानकारी नहीं थी या वे इस बारे में अनिश्चित थीं।
जमीन के दस्तावेज, पंजीकरण और सरकारी प्रक्रियाओं की जानकारी नहीं होने से महिलाओं के लिए अपने अधिकारों को समझना और उनका इस्तेमाल करना मुश्किल हो सकता है।
खेती में योगदान, लेकिन फैसलों में सीमित भूमिका
सर्वेक्षण के मुताबिक, आदिवासी और ग्रामीण महिलाएं खेती, कृषि मजदूरी और जमीन पर आधारित आजीविका में सक्रिय हैं। इसके बावजूद जमीन के इस्तेमाल, फसल के चुनाव, कृषि उपज की बिक्री और जमीन को पट्टे पर देने जैसे महत्वपूर्ण फैसलों में उनकी भूमिका सीमित रहती है।
अध्ययन में यह भी सामने आया कि जमीन पर अपने अधिकार की बात रखने वाली कुछ महिलाओं को परिवार और समाज के विरोध का सामना करना पड़ता है। इससे भूमि के मालिकाना हक और निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी भागीदारी प्रभावित हो सकती है।
पति की मृत्यु के बाद बढ़ सकती हैं महिलाओं की मुश्किलें
भूमि रिकॉर्ड और सर्वेक्षण से जुड़ी प्रक्रियाओं के अधूरे रहने की स्थिति में पति की मृत्यु के बाद महिलाओं के लिए जमीन पर अपना अधिकार बनाए रखना कठिन हो सकता है।
ऐसी परिस्थितियों में विधवाओं को जमीन से जुड़े अधिकारों के साथ परिवार की देखभाल, आजीविका और सामाजिक दबाव जैसी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ सकता है। इसलिए भूमि रिकॉर्ड को स्पष्ट बनाने और महिलाओं को कानूनी प्रक्रियाओं की जानकारी देने की जरूरत महत्वपूर्ण हो जाती है।
महाराष्ट्र में महिला किसानों की पहचान के लिए पहल
महिला किसानों को औपचारिक पहचान देने की दिशा में महाराष्ट्र में वर्ष 2026 में महिला किसान सशक्तीकरण विधेयक पारित किए जाने की जानकारी रिपोर्ट में दी गई है। इस पहल का उद्देश्य कृषि कार्यों में लगी महिलाओं को किसान के रूप में मान्यता देना है।
इस तरह की व्यवस्था के तहत जमीन अपने नाम पर नहीं होने के बावजूद परिवार या सामुदायिक जमीन पर खेती करने वाली पात्र महिलाओं को किसान के रूप में पहचान मिल सकती है। इससे कृषि योजनाओं, सब्सिडी, संस्थागत ऋण और अन्य सरकारी लाभों तक उनकी पहुंच आसान बनाने का लक्ष्य है।
हालांकि, इस पहल के वास्तविक लाभ और पात्रता संबंधी प्रावधानों की पुष्टि आधिकारिक दस्तावेजों से की जानी चाहिए।
महिलाओं के भूमि अधिकार मजबूत करना बड़ी चुनौती
झारखंड के तीन जिलों में किए गए इस सर्वेक्षण ने खेती में महिलाओं के योगदान और जमीन पर उनके स्वामित्व के बीच बड़े अंतर को सामने रखा है। भूमि कानूनों की जानकारी, पंजीकरण प्रक्रिया तक पहुंच और जमीन से जुड़े फैसलों में भागीदारी बढ़ाना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं।
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सर्वे के आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में महिलाएं कृषि आय में अहम योगदान देती हैं, लेकिन जमीन के मालिकाना हक और भूमि संबंधी जानकारी के मामले में पीछे हैं। महिलाओं को भूमि कानूनों के प्रति जागरूक करना, पंजीकरण प्रक्रिया की जानकारी देना और उनके अधिकारों तक पहुंच आसान बनाना जरूरी है।
