Tuesday, September 15, 2026

झारखंड में 62 कोयला खदानें बंद या लैप्स, 2,547 हेक्टेयर वन भूमि का इस्तेमाल अब भी अटका.

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रांची: कोयला उत्पादन के मामले में देश के प्रमुख राज्यों में शामिल झारखंड में बड़ी संख्या में खनन पट्टे होने के बावजूद कई खदानों में काम शुरू नहीं हो सका है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक राज्य में कुल 160 कोयला खनन पट्टे दर्ज हैं। इनमें 98 खदानों में फिलहाल संचालन हो रहा है, जबकि 62 खदानें Temporarily Discontinued (TD) या Lapsed (LP) श्रेणी में हैं।

इन बंद या लैप्स खदानों से जुड़ी जमीन का क्षेत्रफल भी काफी बड़ा है। इन परियोजनाओं के लिए कुल 2,547.62 हेक्टेयर वन भूमि दर्ज है। इसके अलावा 14,221.83 हेक्टेयर निजी और सरकारी गैर-वन भूमि भी इन खनन परियोजनाओं से जुड़ी हुई है। यानी बंद या लैप्स खदानों के तहत कुल 16,769.45 हेक्टेयर भूमि दर्ज है।

धनबाद में सबसे अधिक 51 खदानें बंद

जिलावार स्थिति देखें तो धनबाद में सबसे अधिक 51 कोयला खदानें TD या LP स्थिति में हैं। इन खदानों से जुड़ी 385.26 हेक्टेयर वन भूमि और 10,232.49 हेक्टेयर निजी व सरकारी गैर-वन भूमि है। कुल मिलाकर इन परियोजनाओं का क्षेत्रफल 10,617.75 हेक्टेयर है।

धनबाद की इन खदानों का संबंध BCCL, ECL, टाटा, SAIL सहित अलग-अलग कंपनियों से बताया गया है।

बोकारो में कम खदान, लेकिन वन भूमि सबसे ज्यादा

बोकारो में सिर्फ तीन खदानें बंद या लैप्स श्रेणी में हैं। हालांकि इन तीन परियोजनाओं के साथ 1,255.39 हेक्टेयर वन भूमि जुड़ी हुई है, जो जिलों में सबसे अधिक है।

यहां गैर-वन भूमि 118.84 हेक्टेयर है और कुल परियोजना क्षेत्रफल 1,374.23 हेक्टेयर दर्ज किया गया है।

रामगढ़ में 6 खदानों से जुड़ी 720 हेक्टेयर वन भूमि

रामगढ़ जिले में छह खदानें TD या LP स्थिति में हैं। इनसे संबंधित वन भूमि का क्षेत्रफल 719.97 हेक्टेयर है। इसके अलावा 2,809.85 हेक्टेयर गैर-वन भूमि दर्ज है। दोनों को मिलाकर कुल क्षेत्रफल 3,529.82 हेक्टेयर है।

बोकारो और रामगढ़ की बंद या लैप्स खदानों को मिलाने पर ही 1,975.36 हेक्टेयर वन भूमि आती है। यह राज्य की ऐसी खदानों से जुड़ी कुल वन भूमि का बड़ा हिस्सा है।

चतरा और पलामू की स्थिति

चतरा में एक खदान बंद या लैप्स श्रेणी में दर्ज है। इससे 187 हेक्टेयर वन भूमि और 933.75 हेक्टेयर गैर-वन भूमि जुड़ी है। कुल क्षेत्रफल 1,120.75 हेक्टेयर है।

वहीं पलामू में भी एक लैप्स खदान दर्ज है। इस परियोजना के साथ वन भूमि दर्ज नहीं है, जबकि 126.90 हेक्टेयर गैर-वन भूमि शामिल है।

बंद या लैप्स खदानों का जिलावार आंकड़ा

जिलाबंद/लैप्स खदानेंवन भूमि (हेक्टेयर)निजी व सरकारी गैर-वन भूमिकुल क्षेत्रफल
धनबाद51385.2610,232.4910,617.75
रामगढ़6719.972,809.853,529.82
बोकारो31,255.39118.841,374.23
चतरा1187.00933.751,120.75
पलामू10.00126.90126.90
कुल622,547.6214,221.8316,769.45

खदानें चालू होने पर राजस्व बढ़ने की उम्मीद

इन खदानों में दोबारा खनन गतिविधियां शुरू होने पर राज्य सरकार को रॉयल्टी, DMFT, सेस और GST के माध्यम से अतिरिक्त राजस्व मिलने की संभावना है। खनन शुरू होने से सीधे रोजगार के साथ-साथ परिवहन, मशीनरी, ठेका कार्य और इससे जुड़े अन्य कारोबारों में भी गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

हालांकि बड़ा सवाल यह है कि खनन के लिए चिन्हित और आवंटित इतनी बड़ी भूमि पर वर्षों बाद भी कई परियोजनाएं उत्पादन की स्थिति तक क्यों नहीं पहुंच पाई हैं। बंद खदानों को फिर से शुरू करने में प्रशासनिक, पर्यावरणीय और अन्य लंबित प्रक्रियाओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है।

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