Friday, September 18, 2026

झारखंड में 19 सितंबर तक बारिश-वज्रपात का अलर्ट, किसानों के लिए जारी हुई खास एडवाइजरी.

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Jharkhand Weather Alert: झारखंड में अगले कुछ दिनों तक मौसम सक्रिय रहने वाला है। 15 से 19 सितंबर के बीच राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ मेघगर्जन, वज्रपात और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। इसे देखते हुए किसानों को फसलों में जलजमाव रोकने और बारिश के दौरान जरूरी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मौसम केंद्र रांची ने बिरसा कृषि विश्वविद्यालय तथा राज्य के कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के सहयोग से ग्रामीण कृषि मौसम सेवा बुलेटिन जारी किया है। इसमें अलग-अलग फसलों, सब्जियों, पशुपालन और मत्स्य पालन से जुड़े किसानों के लिए आवश्यक सुझाव दिए गए हैं।

पांच दिनों तक बादल और बारिश का दौर

मौसम पूर्वानुमान के मुताबिक 15 से 19 सितंबर तक झारखंड के विभिन्न इलाकों में बादल छाए रहने के साथ बारिश हो सकती है। कई स्थानों पर गरज के साथ बारिश और वज्रपात की स्थिति बन सकती है। इस दौरान तेज हवाओं का भी असर देखने को मिल सकता है।

अधिकतम तापमान में फिलहाल बड़े बदलाव की संभावना नहीं है। मौसम विभाग ने खराब मौसम को देखते हुए किसानों को अनावश्यक कृषि कार्य कुछ दिनों के लिए टालने की सलाह दी है।

धान की फसल में जल निकासी जरूरी

बारिश के दौरान धान के खेतों में पानी अधिक जमा होने से पोषक तत्वों की कमी और रोगों का खतरा बढ़ सकता है। किसानों को खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने के साथ मेड़ों को मजबूत रखने की सलाह दी गई है।

फिलहाल धान में यूरिया की टॉप ड्रेसिंग नहीं करने को कहा गया है। कल्ले निकलने से लेकर दूध भरने की अवस्था तक फसल में गांधी कीट, तना छेदक और ब्राउन प्लांट हॉपर (BPH) की नियमित निगरानी करने की सलाह दी गई है।

मक्का और अरहर की फसल पर भी रखें नजर

मक्का के खेतों में पानी जमा होने से जड़ों में सड़न और पौधों के गिरने की समस्या हो सकती है। इसलिए बारिश के बाद खेत से पानी की निकासी सुनिश्चित करना जरूरी बताया गया है।

अरहर की फसल में उकठा रोग के लक्षण नजर आने पर प्रभावित पौधों को खेत से निकालकर नष्ट करने की सलाह दी गई है। भविष्य में इस समस्या से बचने के लिए बीज उपचार और रोगरोधी किस्मों के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है।

मक्का में भुट्टा बनने की अवस्था में पक्षियों से फसल बचाने के लिए खेत में चमकीली पट्टियां लगाने की सलाह भी दी गई है।

सब्जियों में जलजमाव से बचाएं फसल

बारिश के मौसम में सब्जियों में पानी जमा होने से जड़ सड़ने और फफूंद से संबंधित रोगों का खतरा बढ़ सकता है। किसानों को खेतों में जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त रखने और कमजोर पौधों को सहारा देने की सलाह दी गई है।

बारिश के दौरान कीटनाशक या फफूंदनाशी का छिड़काव नहीं करने को कहा गया है। मिर्च और बैंगन में फल सड़न की समस्या दिखाई देने पर मौसम साफ होने के बाद कार्बेन्डाजिम या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड के इस्तेमाल की सलाह दी गई है।

अगात आलू की खेती करने वाले किसान अभी से जुटाएं तैयारी

अगात आलू की खेती की योजना बना रहे किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज और उर्वरकों की व्यवस्था पहले से करने की सलाह दी गई है। बुलेटिन में कुफरी अशोका और कुफरी पुखराज किस्मों को उपयुक्त बताया गया है।

एक एकड़ में आलू की बुवाई के लिए करीब 12 क्विंटल बीज, 40 किलो यूरिया, 70 किलो डीएपी, 80 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश और 10 किलो गंधक की आवश्यकता बताई गई है। बुवाई से पहले बीज उपचार करने पर भी जोर दिया गया है।

बारिश और वज्रपात में पशुओं को सुरक्षित रखें

मौसम खराब होने और बिजली चमकने के दौरान पशुओं को खुले स्थान पर नहीं रखने की सलाह दी गई है। पशुओं को सुरक्षित तथा ढकी हुई जगह पर रखने को कहा गया है।

पशुओं में बाबेसियोसिस के लक्षण दिखाई देने पर बिना देरी किए पशु चिकित्सक से संपर्क कर उपचार कराने की सलाह दी गई है।

मत्स्य पालकों के लिए भी जारी हुई सलाह

मछली पालन करने वाले किसानों को तालाब में मछलियों के लिए कृत्रिम आहार देने की सलाह दी गई है। इसके लिए सरसों की खली और चावल के कुंडे को समान मात्रा में मिलाकर इस्तेमाल करने की जानकारी दी गई है।

बारिश के दौरान इन कृषि कार्यों से बचें

मौसम विभाग की सलाह के अनुसार अगले कुछ दिनों तक बारिश की स्थिति को देखते हुए उर्वरक और कीटनाशकों के इस्तेमाल समेत जरूरी नहीं होने वाले कृषि कार्यों को टालना बेहतर होगा।

किसानों को सफेद मक्खी और अन्य रस चूसने वाले कीटों पर नियमित नजर रखने तथा वर्षा जल के संरक्षण के लिए खेतों में डोबा जैसी संरचनाएं विकसित करने की सलाह दी गई है।

वज्रपात के समय इन जगहों से रहें दूर

  • पेड़ों के नीचे खड़े न हों।
  • खुले मैदान में जाने से बचें।
  • तालाब, नदी या अन्य जलाशयों के पास न जाएं।
  • बिजली के खंभों और अन्य विद्युत संरचनाओं से दूरी बनाए रखें।
  • गरज-चमक के दौरान खेतों में जरूरी नहीं होने पर काम न करें।

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