रांची: झारखंड के सरकारी विश्वविद्यालयों और संबद्ध कॉलेजों में कार्यरत शिक्षकों एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों की भविष्य निधि (PF) से जुड़े वित्तीय प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। कर्मचारी संगठनों का दावा है कि PF की राशि निर्धारित खाते में जमा करने के बजाय सामान्य बचत खाते में रखे जाने से कर्मचारियों को वर्षों में ब्याज के रूप में बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है।
कम ब्याज मिलने से बढ़ी चिंता
कर्मचारियों का कहना है कि उनके वेतन से हर महीने नियमित रूप से PF की कटौती होती रही, लेकिन संबंधित राशि को भविष्य निधि खाते में जमा नहीं किए जाने के कारण उन्हें अपेक्षित ब्याज का लाभ नहीं मिल सका। उनका आरोप है कि इससे सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाली कुल राशि भी प्रभावित हुई है।
टैक्स का अतिरिक्त बोझ भी बना समस्या
कर्मचारी संगठनों के अनुसार, भविष्य निधि खाते पर मिलने वाला ब्याज निर्धारित नियमों के तहत कर छूट के दायरे में आता है, जबकि सामान्य बचत खाते पर अर्जित ब्याज कई मामलों में आयकर के दायरे में आ जाता है। इससे कर्मचारियों पर अतिरिक्त कर भार भी पड़ने की बात कही जा रही है।
ऑडिट और जांच की मांग
शिक्षक एवं कर्मचारी संगठनों ने राज्य सरकार और उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग से पूरे मामले की स्वतंत्र वित्तीय और प्रशासनिक जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि PF की राशि कितने समय तक बचत खातों में रखी गई, कर्मचारियों को कितना ब्याज मिलना चाहिए था और वास्तविक आर्थिक नुकसान कितना हुआ।
ब्याज दर में अंतर से नुकसान का दावा
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि भविष्य निधि खातों पर सामान्य बचत खातों की तुलना में अधिक ब्याज मिलता है। ऐसे में यदि PF की राशि लंबे समय तक बचत खाते में रखी जाती है, तो कर्मचारियों को हर वर्ष ब्याज के रूप में उल्लेखनीय नुकसान हो सकता है। उनका मानना है कि इस पूरे मामले की पारदर्शी जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
सरकार से सुधारात्मक कदम उठाने की अपील
शिक्षकों और कर्मचारियों ने मांग की है कि भविष्य निधि की राशि का प्रबंधन निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाए और यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता हुई है तो उसकी जांच कर प्रभावित कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
