Sunday, July 5, 2026

झारखंड की जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा पर कॉन्क्लेव का आयोजन रांची में किया गया.

Share

रांची: राज्य के पूर्व शिक्षा मंत्री बंधु तिर्की ने संयोजकत्व में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा बचाव मोर्चा की ओर से आज रांची विश्वविद्यालय के दीक्षांत मंडप में राज्यस्तरीय जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया. इस कॉन्क्लेव में झारखंड की नौ मान्यता प्राप्त जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा (कुरमाली, पंच परगनिया, खोरठा, हो, संताली, खड़िया, नागपुरी, कुड़ुख और मुंडारी) से जुड़े राज्यभर के भाषाविद, प्रोफेसर, शोधार्थी और छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया. कॉन्क्लेव की शुरुआत पारंपरिक तरीके से की गई और उसके बाद वक्तताओं ने अपने अपने विचार रखे.

राज्यस्तरीय जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा कॉन्क्लेव के संयोजक पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने कहा कि राज्य में मान्यता प्राप्त पांच जनजातीय और चार क्षेत्रीय भाषाएं उपेक्षित हैं. उसके विकास और संवर्धन के लिए बहुत सारे विचार कॉन्क्लेव के माध्यम से सामने आए हैं. इन सभी को एक दस्तावेज के रूप में मुख्यमंत्री और सरकार को सौंपा जाएगा. बंधु तिर्की ने खुशी जताई कि राज्य बनने के बाद पहली बार झारखंडी भाषाओं को लेकर आयोजित इस तरह के कॉन्क्लेव में राज्य के अलग-अलग हिस्सों से करीब 2000 की संख्या में भाषाविद, शिक्षाविद, शोधार्थी और छात्र-छात्राएं शामिल हुए हैं.

बंधु तिर्की ने कहा कि झारखंड की नौ मान्यता प्राप्त जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन को लेकर राज्य में लड़ाई तेज होगी. बुनियादी स्तर से लेकर उच्चस्तर तक जनजातीय और क्षेत्रीय भाषा की पढ़ाई हो इसके लिए योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ा जाएगा. बंधु तिर्की ने कहा कि इस राज्य का निर्माण सिर्फ सत्ता सुख पाने के लिए नहीं हुआ है, बल्कि यह राज्य ही इसलिए बना है, ताकि यहां की सभ्यता, संस्कृति, रहन-सहन, बोली-भाषा सब संरक्षित रहे.

पूर्व शिक्षा मंत्री बंधु तिर्की ने फिर दोहराया कि राज्य की राजनीति में सक्रिय जो भी राजनीतिक दल, जनजातीय और क्षेत्रीय भाषा को नजरअंदाज करेंगे, वह राज्य की राजनीति से अपने आप मिट जाएंगे. राज्य के पूर्व शिक्षा मंत्री और जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा बचाओ मोर्चा के संयोजक बंधु तिर्की ने कहा कि झारखंड निर्माण के 26 वर्षों में जितनी भी सरकारें बनी, उसमें से किसी सरकार ने राज्य की जनजाति और क्षेत्रीय भाषाओं के संवर्धन और विकास के लिए काम नहीं किया.

Regional languages of Jharkhand

उन्होंने कहा कि जिस तरह की जागरुकता आज के कॉन्क्लेव में दिखी है वह यह दर्शाता है कि हम अपनी जनजातीय और क्षेत्रीय भाषा से कितना प्यार करते हैं. कॉन्क्लेव में आए भाषाविदों, शिक्षाविदों और शोधार्थियों ने इस तरह के आयोजन पर खुशी जताते हुए कहा कि हमारी दिली इच्छा है कि अपने राज्य की जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाएं पोषित और पल्लवित हो और सरकार इसके लिए आगे आए.

Tribal and regional languages

इन भाषाविदों ने रखी अपनी-अपनी बात, किए गए सम्मानित

झारखंड के स्थानीय और क्षेत्रीय भाषाओं के विकास को लेकर आयोजित राष्ट्रीय कॉन्क्लेव में डॉक्टर सुभाष चंद्र मुंडा, डॉ. प्रकाश चंद्र उरांव, डॉ. चरण हेंब्रम, कोशन पाठ पेंगुआ, किशोर केरकेट्टा, डॉ. गजाधर महतो, डॉ. खालिक अहमद, डॉ. राजाराम महतो, डॉ. अर्थोनी मुंडा सहित कई वक्तताओं ने अपनी-अपनी भाषाओं को लेकर विस्तृत रूप से अपने विचार रखे. कॉन्क्लेव के अंत में सर्वसम्मति से झारखंडी भाषाओं का सम्मान, इसकी अस्मिता और स्वाभिमान पर चोट बर्दाश्त नहीं करने के साथ शिक्षा व्यवस्था में क्लस्टर सिस्टम को समाप्त करने की मांग सहित कई प्रस्ताव पारित किए गए.

Regional languages of Jharkhand

Read more

Local News