नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत के निर्यात क्षेत्र ने जुलाई 2026 में मजबूत प्रदर्शन किया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में भारत का कुल वस्तु और सेवा निर्यात सालाना आधार पर 13.31 प्रतिशत बढ़कर 80.14 अरब डॉलर हो गया। जुलाई 2025 में यह करीब 70.72 अरब डॉलर था।
आयात बढ़ने से व्यापार घाटा भी बढ़ा
निर्यात के साथ आयात में भी तेज वृद्धि दर्ज की गई। जुलाई 2026 में वस्तुओं और सेवाओं का कुल आयात 15.83 प्रतिशत बढ़कर 95.16 अरब डॉलर रहा। एक साल पहले इसी अवधि में आयात 82.16 अरब डॉलर था।
निर्यात की तुलना में आयात तेजी से बढ़ने के कारण जुलाई में भारत का कुल व्यापार घाटा बढ़कर 15.02 अरब डॉलर हो गया, जबकि जुलाई 2025 में यह करीब 11.43 अरब डॉलर था।
वस्तु और सेवा निर्यात का प्रदर्शन
जुलाई में भारत का वस्तु निर्यात बढ़कर 44.24 अरब डॉलर हो गया, जबकि पिछले साल इसी महीने यह 36.98 अरब डॉलर था।
वहीं, सेवाओं का अनुमानित निर्यात 35.89 अरब डॉलर रहा, जो जुलाई 2025 के 33.74 अरब डॉलर से अधिक है। सेवा क्षेत्र में आयात करीब 18.94 अरब डॉलर रहा। इसके चलते जुलाई में सेवाओं के व्यापार में लगभग 16.95 अरब डॉलर का अधिशेष दर्ज किया गया।
पेट्रोलियम और इलेक्ट्रॉनिक्स ने बढ़ाया निर्यात
जुलाई के दौरान कई प्रमुख क्षेत्रों ने निर्यात वृद्धि में अहम भूमिका निभाई।
- पेट्रोलियम उत्पाद: निर्यात 67.64 प्रतिशत बढ़कर 6.92 अरब डॉलर पहुंच गया।
- इलेक्ट्रॉनिक सामान: निर्यात में 57.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 5.92 अरब डॉलर रहा।
- इंजीनियरिंग उत्पाद: इस क्षेत्र का निर्यात 17.71 प्रतिशत बढ़कर 12.24 अरब डॉलर हो गया।
- रसायन: ऑर्गेनिक और इनऑर्गेनिक केमिकल्स का निर्यात 14.39 प्रतिशत बढ़कर 2.8 अरब डॉलर रहा।
- टेक्सटाइल: कपास, सूती धागे और हथकरघा समेत कपड़ा क्षेत्र के निर्यात में 8.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और यह करीब 1.02 अरब डॉलर रहा।
अप्रैल से जुलाई तक भी मजबूत वृद्धि
वित्त वर्ष 2026-27 के पहले चार महीनों यानी अप्रैल से जुलाई के दौरान भारत का कुल निर्यात 13.16 प्रतिशत बढ़कर 316.42 अरब डॉलर पहुंच गया। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 279.63 अरब डॉलर था।
इस अवधि में मर्चेंडाइज यानी वस्तु निर्यात 173.78 अरब डॉलर रहा। लगातार मजबूत निर्यात प्रदर्शन से भारत के व्यापार क्षेत्र को सहारा मिला है। हालांकि, आयात में तेज वृद्धि के कारण व्यापार घाटे पर भी नजर बनी हुई है।
