रांची: झारखंड की कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने भूमि एवं जल संरक्षण से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से काम पूरा करने के निर्देश दिए। जेएमटीटीसी भवन में भूमि संरक्षण निदेशालय की ओर से आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम में उन्होंने योजनाओं की प्रगति और भविष्य की कार्ययोजना पर चर्चा की।
कार्यशाला के दौरान तीन महिला लाभुक समूहों को ट्रैक्टर भी सौंपे गए। मंत्री ने कहा कि कृषि यंत्रीकरण से महिला समूहों की आर्थिक क्षमता बढ़ाने के साथ खेती की उत्पादकता को भी बेहतर किया जा सकता है।
योजनाओं में देरी पर सख्ती
मंत्री ने तालाब, पर्कोलेशन टैंक, डीप बोरिंग और बिरसा पक्का चेक डैम (BPCD) जैसी योजनाओं को निर्धारित समय में पूरा करने पर जोर दिया। उन्होंने पिछले वर्ष की देनदारियों का भुगतान अगस्त के अंत तक पूरा करने का निर्देश दिया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में अनावश्यक देरी होने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
SMAM का लक्ष्य पूरा करने पर जोर
कृषि यंत्रीकरण पर उप-मिशन (SMAM) की समीक्षा के दौरान मंत्री ने चालू वर्ष के लिए निर्धारित लक्ष्य को 100 प्रतिशत हासिल करने के लिए पहले से कार्ययोजना तैयार करने को कहा।
उन्होंने पिछले वर्ष के पात्र आवेदनों पर भी विचार करने का निर्देश दिया। केवल स्वीकृति नहीं मिलने के आधार पर पुराने पात्र आवेदनों को खारिज नहीं करने की बात कही गई।
तालाबों के जीर्णोद्धार में जनप्रतिनिधियों से समन्वय
तालाब जीर्णोद्धार योजनाओं को लेकर मंत्री ने पिछले वर्ष की जनप्रतिनिधियों की अनुशंसाओं को भी ध्यान में रखने को कहा। किसी अनुशंसा को लेकर भ्रम की स्थिति होने पर संबंधित विधायक से संपर्क करने का निर्देश दिया गया।
15 अगस्त के बाद सभी जिलों में कार्यशालाएं आयोजित करने की बात कही गई है। इनमें जिला परिषद सदस्य, प्रमुख, मुखिया समेत अन्य जनप्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा।
योजनाओं के प्रभाव का होगा आकलन
मंत्री ने पिछले पांच वर्षों में पूरी की गई योजनाओं का सोशल इम्पैक्ट स्टडी कराने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि किसी योजना की सफलता केवल निर्माण कार्य पूरा होने से तय नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह भी देखना जरूरी है कि उससे किसानों और ग्रामीणों को वास्तविक लाभ कितना मिला।
लाभुक समितियों से संपर्क करने के लिए कृषक मित्र और VLW की मदद लेने तथा योजनाओं की जमीनी स्थिति की जानकारी जुटाने को कहा गया।
वेबसाइट और डैशबोर्ड पर अपडेट होगा डेटा
भूमि संरक्षण निदेशालय को पिछले पांच वर्षों में किए गए कार्यों का विस्तृत डेटा वेबसाइट पर उपलब्ध कराने और उसे नियमित रूप से अपडेट रखने का निर्देश दिया गया। इसका उद्देश्य योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है।
योजनाओं की निगरानी के लिए राज्य स्तर पर एक डैशबोर्ड विकसित करने की भी योजना है। इसमें प्रत्येक योजना का विवरण दर्ज किया जाएगा और जियो-टैगिंग के माध्यम से कार्यों की प्रगति पर नजर रखी जाएगी।
सामूहिक खेती को मिलेगा बढ़ावा
मंत्री ने जल संरचनाओं के आसपास समूह आधारित खेती को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया। उनका कहना है कि इससे जल संरक्षण के साथ कृषि उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने जिलों को कृषि उपकरणों की मौजूदा सूची की समीक्षा करने और स्थानीय जरूरत के अनुरूप नए उपकरण शामिल करने के सुझाव देने को भी कहा।
BPCD के लिए 15 दिन की समयसीमा
बिरसा पक्का चेक डैम से संबंधित कार्यों के लिए भी समयसीमा तय की गई है। मंत्री ने अगले 15 दिनों में स्थल चयन और प्रशासनिक स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी कर प्रस्ताव निदेशालय को भेजने का निर्देश दिया।
कार्यशाला के समापन पर सभी जिलों से भूमि संरक्षण योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करने के संबंध में लिखित सुझाव मांगे गए। इन सुझावों को शामिल कर एक श्वेत पत्र तैयार किया जाएगा।
कार्यक्रम में विभागीय सचिव अबूबकर सिद्दीक, भूमि संरक्षण निदेशक विकास कुमार समेत विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी और पदाधिकारी मौजूद रहे।
