जमशेदपुर: जिले में राशन वितरण में हो रही देरी को लेकर खाद्य एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। विभाग के उप सचिव रामकृष्ण कुमार ने शुक्रवार को एफसीआई और प्रखंड स्तर के गोदामों का निरीक्षण किया। इसके बाद अधिकारियों के साथ बैठक कर राशन के अनाज का उठाव और वितरण समय पर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
अधिकारियों को स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि हर महीने की 15 तारीख तक अनाज का उठाव पूरा कर लिया जाए, ताकि उसी महीने लाभुकों के बीच राशन का वितरण कराया जा सके।
पिछले महीने हुई देरी से बढ़ी थी समयसीमा
निरीक्षण के दौरान उप सचिव ने राशन आपूर्ति की मौजूदा व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने बताया कि पिछले महीने अनाज का उठाव निर्धारित समय से देर से हुआ था। इसके चलते वितरण की तारीख आगे बढ़ानी पड़ी थी।
विभाग इस बार ऐसी स्थिति दोबारा नहीं चाहता। इसलिए संबंधित अधिकारियों और आपूर्ति व्यवस्था से जुड़े लोगों को पहले से तैयारी पूरी रखने तथा तय समयसीमा के भीतर अनाज उठाने का निर्देश दिया गया है।
अनाज ढोने वाले वाहनों में GPS जरूरी
राशन की ढुलाई में पारदर्शिता बनाए रखने और अनाज की कालाबाजारी पर निगरानी के लिए परिवहन व्यवस्था पर भी विशेष जोर दिया गया है।
उप सचिव ने निर्देश दिया कि एफसीआई में रैक पहुंचने के बाद अनाज लेकर निकलने वाले वाहनों की लगातार निगरानी हो। शहरी इलाकों में डोर-स्टेप डिलीवरी और जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में अनाज परिवहन करने वाले सभी वाहनों में GPS ट्रैकिंग सक्रिय रहनी चाहिए।
GPS के जरिये वाहनों की आवाजाही पर नजर रखी जा सकेगी और आपूर्ति व्यवस्था में किसी तरह की गड़बड़ी होने पर उसकी पहचान करने में मदद मिलेगी।
समय पर राशन दुकानों तक पहुंचे अनाज
विभाग ने ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु रखने पर जोर दिया है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि गोदाम से अनाज समय पर निकलकर संबंधित राशन दुकानों तक पहुंचे।
सरकार का उद्देश्य है कि लाभुकों को निर्धारित समय पर राशन उपलब्ध हो और वितरण में अनावश्यक देरी के कारण उन्हें परेशानी का सामना न करना पड़े।
लापरवाही मिलने पर होगी कार्रवाई
निरीक्षण और समीक्षा बैठक के दौरान राशन वितरण व्यवस्था में किसी भी स्तर पर लापरवाही को गंभीरता से लेने का संकेत दिया गया। विभाग ने स्पष्ट किया है कि समय पर उठाव और वितरण की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाए, ताकि पिछले महीने जैसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।
