रांची: झारखंड में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए झारखंड के छात्र आंदोलन को लेकर उनकी चुप्पी पर सवाल उठाए हैं।
बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया के जरिए राहुल गांधी से पूछा कि जब वह देश के अलग-अलग हिस्सों में विद्यार्थियों के अधिकार और उनके मुद्दों को उठाते हैं, तो झारखंड में छात्रों के खिलाफ हुई कार्रवाई पर उनकी प्रतिक्रिया सामने क्यों नहीं आ रही है।
छात्रों पर लाठीचार्ज का लगाया आरोप
बाबूलाल मरांडी के मुताबिक विधानसभा घेराव के दौरान अपनी मांगों को लेकर मार्च कर रहे छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पहले से घोषित विरोध कार्यक्रमों और पुतला दहन के दौरान भी छात्रों को पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा।
हालांकि, इन आरोपों और घटनाक्रम को लेकर संबंधित प्रशासन या सरकार का पक्ष इस बयान में सामने नहीं आया है।
नौकरी और भविष्य को लेकर आंदोलन का दावा
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि राज्य के युवा रोजगार और अपने भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उनका आरोप है कि नौकरी की प्रक्रिया और सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर छात्रों के बीच भरोसा कम हो रहा है।
उन्होंने झारखंड सरकार पर युवाओं की समस्याओं को पर्याप्त गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगाया और कहा कि छात्रों को अपनी मांगों के लिए सड़क पर उतरना पड़ रहा है।
राहुल गांधी से पूछा सवाल
बाबूलाल मरांडी ने राहुल गांधी से सवाल किया कि यदि वह देश के अन्य राज्यों में छात्रों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हैं, तो झारखंड में कांग्रेस गठबंधन की सरकार होने के बावजूद यहां के छात्रों के मामले में उनकी आवाज क्यों नहीं सुनाई दे रही है।
उन्होंने इसे राजनीतिक दोहरेपन से जोड़ते हुए कहा कि किसी भी नेता की बात और उसके व्यवहार में समानता होनी चाहिए।
सरकार पर भी साधा निशाना
बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि युवाओं की समस्याओं को लेकर सरकार की नीतियों से असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि जनता पूरे घटनाक्रम को देख रही है और आने वाले समय में इसका राजनीतिक असर भी दिखाई दे सकता है।
अपने बयान के अंत में उन्होंने राहुल गांधी पर तीखी राजनीतिक टिप्पणी करते हुए उन्हें ‘ठग मास्टर’ कहकर संबोधित किया।
बाबूलाल मरांडी के इस बयान के बाद छात्र आंदोलन और सरकार की कार्रवाई को लेकर झारखंड की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने के संकेत हैं।
