Thursday, September 17, 2026

चांद पर NASA ने खोजा नया विशाल क्रेटर, सदी में एक बार होने वाले उल्कापिंड टकराव का मिला सबूत.

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हैदराबाद : चांद की सतह पर लगातार नजर रख रहे NASA के Lunar Reconnaissance Orbiter (LRO) ने एक नए क्रेटर का पता लगाया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह क्रेटर एक बड़े अंतरिक्षीय पिंड के चंद्रमा से टकराने के बाद बना। इस तरह का बड़ा प्रभाव लगभग एक सदी में एक बार या उससे भी कम समय में देखने को मिलता है।

इस नए क्रेटर का नाम McGetchin Crater रखा गया है। इसका नाम चंद्रमा के अध्ययन से जुड़े वैज्ञानिक टॉम मैकगेचिन के सम्मान में रखा गया है। इसे LRO के कैमरा डेटा पर काम करने वाले इमेज प्रोसेसिंग विशेषज्ञ रॉबर्ट वैगनर ने पुरानी और नई तस्वीरों की तुलना के दौरान पहचाना।

रूटीन डेटा की जांच करते समय वैगनर को चंद्रमा की सतह पर एक असामान्य चमकीला क्षेत्र दिखाई दिया, जिसके आसपास गहरा हिस्सा था। जब इस स्थान की पुरानी तस्वीरों से तुलना की गई तो पता चला कि वहां पहले मौजूद नहीं रहा एक नया प्रभाव क्षेत्र बन चुका है। बाद में LRO के ज्यादा विस्तृत कैमरे से इसकी तस्वीरें ली गईं, जिनसे क्रेटर के आकार और आसपास हुए बदलाव का अध्ययन किया गया।

वैज्ञानिकों के अनुसार, क्रेटर का व्यास करीब 728 से 782 फीट के बीच बताया गया है और इसकी गहराई लगभग 141 फीट है। तुलना के लिए इसका आकार करीब दो फुटबॉल मैदानों की लंबाई के बराबर माना जा सकता है। अनुमान है कि इसे बनाने वाला अंतरिक्षीय पिंड तीन से छह मंजिला इमारत के आकार का रहा होगा।

तस्वीरों से यह भी पता चला कि टक्कर के दौरान चंद्रमा की सतह से बड़ी मात्रा में सामग्री बाहर निकली और आसपास फैल गई। वैज्ञानिकों ने पुरानी और नई तस्वीरों में आए बदलावों को सॉफ्टवेयर की मदद से अलग किया। जो हिस्से पहले और बाद की तस्वीरों में अलग थे, वे चमकीले या गहरे क्षेत्रों के रूप में सामने आए। इसी प्रक्रिया में नया क्रेटर स्पष्ट रूप से पहचाना गया।

NASA का LRO पिछले 17 वर्षों से अधिक समय से चंद्रमा की परिक्रमा करते हुए उसकी सतह का अध्ययन कर रहा है। मिशन के जरिए अब तक बड़ी संख्या में नए क्रेटर और सतह पर हुए अन्य बदलावों की पहचान की जा चुकी है। चंद्रमा पर वायुमंडल न होने के कारण अंतरिक्ष से आने वाले छोटे-बड़े पिंड सीधे सतह से टकरा सकते हैं। हालांकि, इतने बड़े प्रभाव अपेक्षाकृत दुर्लभ हैं।

इस खोज में LRO के Diviner थर्मल इंस्ट्रूमेंट ने भी अहम जानकारी दी। अध्ययन के मुताबिक, क्रेटर के आसपास कई किलोमीटर के क्षेत्र में चंद्रमा की मिट्टी के तापीय व्यवहार में बदलाव देखा गया। रात के समय यह क्षेत्र आसपास की सतह की तुलना में करीब 16 डिग्री फ़ारेनहाइट अधिक ठंडा पाया गया। वैज्ञानिकों के अनुसार, प्रभाव के कारण सतह की मिट्टी अधिक ढीली और कम घनी हो गई, जिससे उसकी गर्मी बनाए रखने की क्षमता प्रभावित हुई।

वैज्ञानिकों का मानना है कि चंद्रमा की सतह में इस तरह के बदलावों को समझना भविष्य के रोवर मिशन और मानव अभियानों के लिए उपयोगी हो सकता है। नई खोज यह भी दिखाती है कि चंद्रमा की सतह पूरी तरह स्थिर नहीं है, बल्कि अंतरिक्षीय पिंडों के प्रभाव से उसमें लगातार बदलाव होते रहते हैं। McGetchin Crater इसी प्रक्रिया का एक नया और महत्वपूर्ण उदाहरण है।

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