Friday, October 30, 2026

चतरा में जमीन रजिस्ट्री पर विवाद, फर्जी होल्डिंग और वंशावली के आरोपों से प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल

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चतरा | 30 अक्टूबर 2026

Chatra News: चतरा में जमीन की रजिस्ट्री से जुड़ा कथित दस्तावेजी फर्जीवाड़ा सामने आया है। आरोप है कि फर्जी होल्डिंग रसीद, वंशावली और पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर एक ही दिन सात जमीनों की रजिस्ट्री करा दी गई। इस मामले में शहर के दीभा मोहल्ला निवासी जमीन मालिक नीरज सिन्हा और राहुल देव ने रजिस्ट्री कार्यालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

जमीन मालिकों ने सब रजिस्ट्रार संतोष रजक सहित संबंधित अधिकारियों को लेकर भी शिकायत की है। हालांकि, सब रजिस्ट्रार ने भ्रष्टाचार और पैसे के लेन-देन के आरोपों को बेबुनियाद बताया है। प्रशासन ने दस्तावेजों की जांच के बाद कार्रवाई का भरोसा दिया है।

एक ही रसीद संख्या पर दो अलग-अलग होल्डिंग का दावा

शिकायतकर्ताओं के अनुसार, रजिस्ट्री में इस्तेमाल की गई रसीद संख्या 269558611072025062417 पर दो अलग-अलग होल्डिंग दर्ज होने का मामला सामने आया है।

उनका दावा है कि होल्डिंग संख्या 0070000861000A3 सत्येंद्र कुमार सिन्हा के नाम पर 11 जुलाई 2025 को जारी दिखाई गई है। वहीं, इसी रसीद संख्या से जुड़ी दूसरी होल्डिंग संख्या 0200000861000A3 वार्ड-20 की निवासी फूलवा देवी के नाम पर पहले से दर्ज बताई गई है।

जमीन मालिकों का आरोप है कि फूलवा देवी के नाम से जारी रसीद में नाम और होल्डिंग संख्या के कुछ अंकों में बदलाव कर दस्तावेज तैयार किया गया। उनके मुताबिक, नगर परिषद के टैक्स विभाग ने भी दस्तावेज में छेड़छाड़ की पुष्टि की है।

दूसरे जिले में पावर ऑफ अटॉर्नी बनवाने का आरोप

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कथित रूप से बदले गए होल्डिंग दस्तावेजों के आधार पर दूसरे जिले में पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार कराई गई। इसके बाद चतरा निबंधन कार्यालय में अलग-अलग दस्तावेजों के सहारे एक ही दिन सात जमीनों की रजिस्ट्री कराई गई।

मामले में वंशावली को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। जमीन मालिकों के अनुसार, वंशावली वार्ड संख्या छह के पार्षद दीपक कुमार वर्मा के लेटरहेड पर जारी की गई, जबकि संबंधित जमीन और रजिस्ट्री कराने वाले व्यक्ति का संबंध दूसरे वार्ड से बताया जा रहा है।

शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि इस वंशावली का इस्तेमाल पावर ऑफ अटॉर्नी और जमीन की रजिस्ट्री कराने में किया गया।

पहले शिकायत देने के बावजूद रजिस्ट्री कैसे हुई?

जमीन मालिकों का कहना है कि उन्होंने संभावित गड़बड़ी की जानकारी पहले ही सब रजिस्ट्रार, अंचल अधिकारी (CO), अनुमंडल पदाधिकारी (SDO), भूमि सुधार उपसमाहर्ता (LRDC), अपर समाहर्ता और उपायुक्त को लिखित रूप में दी थी।

इसके बावजूद कथित तौर पर विवादित जमीनों की रजिस्ट्री हो जाने से निबंधन प्रक्रिया और दस्तावेजों के सत्यापन पर सवाल खड़े हुए हैं। शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि अब इन जमीनों के म्यूटेशन के लिए आवेदन किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा है कि मामले में सरकारी दस्तावेजों से छेड़छाड़, कूटरचना और जालसाजी की पुष्टि होने पर संबंधित अधिकारी-कर्मियों, क्रेता-विक्रेता और अन्य आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी।

सत्येंद्र कुमार सिन्हा को लेकर जमीन मालिक का दावा

जमीन मालिक राहुल देव के अनुसार, सत्येंद्र कुमार सिन्हा उर्फ सतन लाल उनके गोतिया हैं और वर्तमान में शहर के अव्वल मोहल्ला इलाके में रहते हैं।

राहुल देव का दावा है कि सत्येंद्र कुमार सिन्हा के परिवार को पहले ही उनका हिस्सा मिल चुका था। उन्होंने बताया कि वर्ष 2004 और उससे पहले सत्येंद्र कुमार सिन्हा की मां राम कुमारी देवी ने अपने हिस्से की कुछ जमीन उनके परिवार के सदस्यों के नाम की थी। राहुल देव के अनुसार, संबंधित दस्तावेजों में सत्येंद्र कुमार सिन्हा गवाह के रूप में हस्ताक्षरकर्ता भी हैं।

उनका कहना है कि परिवार का संबंधित जमीन पर लंबे समय से कब्जा है और वहां खेती भी की जाती रही है। जमीन का लगान भी नियमित रूप से जमा होने का दावा किया गया है।

सब रजिस्ट्रार ने आरोपों को बताया बेबुनियाद

मामले पर अवर निबंधन पदाधिकारी संतोष रजक ने कहा कि दस्तावेजों की जांच के बिना किसी जमीन की रजिस्ट्री नहीं की जाती। निबंधन से पहले भूमि से संबंधित कागजातों का कार्यालय स्तर पर परीक्षण किया जाता है।

उन्होंने कहा कि यदि किसी ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए कार्यालय को गुमराह कर रजिस्ट्री कराई है तो यह गंभीर मामला है। दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद ही वह विस्तृत जानकारी दे पाएंगे। उन्होंने पैसे के लेन-देन और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों को निराधार बताया तथा जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई की बात कही।

पार्षद बोले- SIR के लिए मांगी गई थी वंशावली

वार्ड संख्या छह के पार्षद दीपक कुमार वर्मा ने बताया कि सत्येंद्र कुमार सिन्हा ने SIR में नाम दर्ज कराने के उद्देश्य से वंशावली बनाने का अनुरोध किया था। पार्षद के अनुसार, उनके द्वारा दिए गए खतियान को देखकर वंशावली जारी की गई थी।

उन्होंने कहा कि इस मामले में उनकी कोई अन्य भूमिका नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि वह सत्येंद्र कुमार सिन्हा को पहले से जानते हैं और उन्हें दीभा मोहल्ले में आते-जाते देखा है।

अपर समाहर्ता ने जांच और कार्रवाई का दिया भरोसा

अपर समाहर्ता अरविंद कुमार ने मामले को गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि फिलहाल वह विभागीय काम से मुख्यालय से बाहर हैं। शनिवार को चतरा लौटने के बाद दस्तावेजों का अवलोकन कर जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

उन्होंने बताया कि जमीन मालिक की ओर से पहले ही गड़बड़ी की आशंका जताते हुए शिकायत दी गई थी। उस शिकायत को आगे की कार्रवाई के लिए अंचल कार्यालय और निबंधन पदाधिकारी के पास भेजा गया था।

फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और प्रशासनिक जांच के नतीजों का इंतजार है।

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