Sunday, September 13, 2026

गुमला: परमवीर अल्बर्ट एक्का कॉलेज में उत्साह के साथ मनाया गया विश्व आदिवासी दिवस.

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चैनपुर/गुमला: परमवीर अल्बर्ट एक्का मेमोरियल कॉलेज, चैनपुर में विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने पारंपरिक परिधान पहनकर कार्यक्रम में हिस्सा लिया। नगाड़े की थाप और पारंपरिक नृत्य के साथ समारोह की शुरुआत हुई।

अतिथियों ने नगाड़ा बजाकर किया कार्यक्रम का शुभारंभ

समारोह में बेंदोरा पंचायत के मुखिया सुशील दीपक मिंज मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कॉलेज के प्राचार्य फादर अगस्तुस एक्का, फादर इनोसेंट कुजूर सहित अन्य अतिथियों की मौजूदगी में कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया। अतिथियों ने पारंपरिक नगाड़ा बजाकर समारोह की शुरुआत की।

प्राचार्य फादर अगस्तुस एक्का ने विश्व आदिवासी दिवस के महत्व और इसके उद्देश्यों पर जानकारी साझा की। डॉ. पुष्पलता डुंगडुंग ने जनजातीय संस्कृति की वर्तमान स्थिति पर चर्चा करते हुए इसके संरक्षण की जरूरत बताई।

मुख्य अतिथि सुशील दीपक मिंज ने युवाओं से अपने संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की अपील की। उन्होंने भाषा, संस्कृति और आदिवासी पहचान को संरक्षित रखने पर जोर दिया। कार्यक्रम में मौजूद अन्य वक्ताओं ने भी आदिवासी समाज की परंपराओं और जल, जंगल व जमीन से जुड़े रिश्ते को समुदाय की महत्वपूर्ण ताकत बताया।

प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने दिखाई प्रतिभा

विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर कॉलेज में नृत्य, संगीत और फैंसी ड्रेस समेत कई प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हुए अपनी सांस्कृतिक प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

आदिवासी नृत्य प्रतियोगिता में इंटरमीडिएट द्वितीय वर्ष की टीम ने पहला स्थान हासिल किया। वहीं संगीत प्रतियोगिता में संध्या कुमारी ने अपनी प्रस्तुति से प्रथम स्थान प्राप्त किया।

विजेताओं को पुरस्कार और प्रमाण पत्र

समारोह के समापन पर विभिन्न प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर बूंदीप लकड़ा और स्मिता कुजूर ने संयुक्त रूप से किया। अमित कुजूर ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

प्रतियोगिताओं के निर्णायक मंडल में फादर मुक्ति तिग्गा, फादर सुमन बारला और एकता एक्का शामिल रहे। पूरे आयोजन के दौरान कॉलेज परिसर में जनजातीय संस्कृति, कला और परंपरा की जीवंत झलक देखने को मिली।

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