खूंटी/रांची: झारखंड में अवैध खनन और खनिज संपदा की कथित तस्करी को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता मधु कोड़ा ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। खूंटी में प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने पुलिस-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि अवैध खनन का कारोबार स्थानीय तंत्र की कथित मिलीभगत के बिना लंबे समय तक नहीं चल सकता।
पकड़े गए वाहन और मशीनों पर कार्रवाई नहीं होने का दावा
मधु कोड़ा ने कहा कि हाल के दिनों में उन्होंने अवैध खनन में इस्तेमाल हो रहे लोगों, वाहनों और भारी मशीनों को पकड़वाकर पुलिस के हवाले किया था। उनके मुताबिक, इसके बावजूद प्रभावशाली लोगों के खिलाफ अपेक्षित कानूनी कार्रवाई नहीं की गई और कुछ मामलों में पकड़े गए लोगों को छोड़ दिया गया।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई करने वाली व्यवस्था ही कथित तौर पर खनन कारोबार से जुड़ी हो, तो ऐसे मामलों पर प्रभावी नियंत्रण कैसे संभव होगा।
थाना पोस्टिंग व्यवस्था पर उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने पुलिस विभाग में तबादले और पोस्टिंग की व्यवस्था को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि थाना प्रभारी की पोस्टिंग के लिए बोली जैसी व्यवस्था होगी, तो उनसे निष्पक्ष और ईमानदारी से कानून लागू कराने की उम्मीद कैसे की जा सकती है।
मधु कोड़ा ने दावा किया कि पुलिस के सामने कानून-व्यवस्था से जुड़े कई गंभीर मामले हैं, लेकिन अवैध खनन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। उन्होंने जिलों में बनाई गई खनन टास्क फोर्स की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े किए।
खनन टास्क फोर्स को बताया कागजी
मधु कोड़ा के अनुसार, अवैध खनन पर नियंत्रण के लिए गठित टास्क फोर्स जमीनी स्तर पर अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रही है। उन्होंने इसे प्रभावहीन बताते हुए कहा कि केवल कागजी कार्रवाई से खनिज संपदा की कथित लूट को रोका नहीं जा सकता।
उन्होंने प्रशासनिक तंत्र की निगरानी में अवैध गतिविधियां चलने का आरोप लगाते हुए व्यवस्था की जवाबदेही तय करने की मांग की।
CBI जांच की मांग
पूर्व मुख्यमंत्री ने झारखंड में अवैध खनन और इससे जुड़े कथित सिंडिकेट की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि मामले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) से कराई जानी चाहिए, ताकि अवैध कारोबार के पीछे कथित रूप से सक्रिय लोगों और उनके संरक्षण तंत्र की पहचान हो सके।
हालांकि, प्रेस वार्ता में लगाए गए ये आरोप मधु कोड़ा के बयान पर आधारित हैं। संबंधित आरोपों पर सरकार या प्रशासन की ओर से कोई पक्ष इस खबर में उपलब्ध नहीं है।
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