Health News | 13 अक्टूबर 2026: त्योहारों के मौसम में व्रत रखना कई लोगों की दिनचर्या का हिस्सा होता है। लेकिन उपवास के दौरान खान-पान में बदलाव और लंबे समय तक पर्याप्त भोजन नहीं करने का असर शरीर के पोषण पर पड़ सकता है। खासकर थायरॉइड की समस्या से जूझ रही महिलाओं के लिए संतुलित आहार, दवा का सही समय और नियमित स्वास्थ्य जांच महत्वपूर्ण हैं।
थायरॉइड ग्रंथि ऐसे हार्मोन बनाती है, जो शरीर के मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा के स्तर और कई अन्य प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। इन हार्मोनों में असंतुलन मासिक धर्म और ओव्यूलेशन को प्रभावित कर सकता है। कुछ मामलों में इससे गर्भधारण करने में भी परेशानी हो सकती है।
अहमदाबाद स्थित बिरला फर्टिलिटी एंड IVF की फर्टिलिटी विशेषज्ञ डॉ. निमिषा शांतिलाल पांड्या के अनुसार, त्योहारों के दौरान खान-पान और उपवास की आदतों में होने वाले बदलावों के बीच थायरॉइड की सेहत पर ध्यान देना जरूरी है।
महिलाओं की सेहत पर कैसे असर डालता है थायरॉइड?
थायरॉइड की समस्या मुख्य रूप से दो प्रकार की हो सकती है—हाइपोथायरॉइडिज्म और हाइपरथायरॉइडिज्म। दोनों स्थितियों में शरीर में थायरॉइड हार्मोन का संतुलन प्रभावित होता है।
1. हाइपोथायरॉइडिज्म के लक्षण
जब थायरॉइड ग्रंथि पर्याप्त हार्मोन नहीं बनाती, तो इस स्थिति को हाइपोथायरॉइडिज्म कहा जाता है। इसके संभावित लक्षणों में शामिल हैं:
- लगातार थकान महसूस होना।
- बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन बढ़ना।
- बालों का पतला होना या झड़ना।
- मासिक धर्म का अनियमित होना या रक्तस्राव में बदलाव।
- शरीर में सुस्ती और ऊर्जा की कमी महसूस होना।
2. हाइपरथायरॉइडिज्म के लक्षण
जब थायरॉइड ग्रंथि जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाती है, तो इसे हाइपरथायरॉइडिज्म कहते हैं। इसके लक्षणों में शामिल हो सकते हैं:
- बिना स्पष्ट कारण वजन कम होना।
- दिल की धड़कन तेज होना।
- बेचैनी या घबराहट महसूस होना।
- मासिक धर्म में अनियमितता।
- गर्मी अधिक लगना या पसीना बढ़ना।
इनमें से कोई लक्षण होने का अर्थ यह नहीं है कि थायरॉइड की बीमारी निश्चित रूप से मौजूद है। सही कारण जानने के लिए डॉक्टर की सलाह और आवश्यक जांच जरूरी है।
थायरॉइड और फर्टिलिटी का क्या है संबंध?
थायरॉइड हार्मोन महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके असंतुलन से मासिक धर्म चक्र और ओव्यूलेशन प्रभावित हो सकते हैं। ओव्यूलेशन वह प्रक्रिया है, जिसमें अंडाशय से अंडा निकलता है।
यदि ओव्यूलेशन नियमित रूप से नहीं हो रहा हो, तो गर्भधारण करने में कठिनाई आ सकती है। थायरॉइड की कुछ समस्याएं गर्भावस्था के दौरान भी विशेष ध्यान देने की मांग करती हैं।
कुछ महिलाओं में सबक्लिनिकल हाइपोथायरॉइडिज्म पाया जाता है। इसमें TSH यानी थायरॉइड-स्टिमुलेटिंग हार्मोन का स्तर बढ़ा हुआ हो सकता है, जबकि थायरॉइड हार्मोन सामान्य सीमा में रहते हैं। इस स्थिति में स्पष्ट लक्षण नहीं भी दिख सकते हैं।
हालांकि, हर महिला में इसका प्रजनन क्षमता पर समान प्रभाव नहीं पड़ता। जांच के परिणाम, लक्षण, मेडिकल हिस्ट्री और गर्भधारण की योजना के आधार पर डॉक्टर उपचार की जरूरत तय करते हैं।
क्या लंबे समय तक व्रत रखने से थायरॉइड पर पड़ सकता है असर?
उपवास के दौरान भोजन की मात्रा और पोषक तत्वों का सेवन कम हो सकता है। लंबे समय तक बहुत कम कैलोरी लेने या पर्याप्त पोषण नहीं मिलने पर शरीर ऊर्जा के इस्तेमाल और थायरॉइड हार्मोन के स्तर में बदलाव कर सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक या अत्यधिक कैलोरी प्रतिबंध से सक्रिय थायरॉइड हार्मोन T3 का स्तर कम हो सकता है। हालांकि, कभी-कभार व्रत रखने से हर व्यक्ति में थायरॉइड की बीमारी हो जाती है, ऐसा नहीं है।
व्रत के दौरान कुछ लोग मुख्य रूप से साबूदाना, आलू और फल खाते हैं। ये खाद्य पदार्थ ऊर्जा दे सकते हैं, लेकिन यदि पूरा आहार इन्हीं तक सीमित रहे, तो प्रोटीन और अन्य जरूरी पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाते।
इसलिए व्रत के दौरान भी उपलब्ध और उपयुक्त खाद्य पदार्थों के जरिए संतुलित पोषण बनाए रखने की कोशिश करनी चाहिए।
सेंधा नमक और आयोडीन का क्या है महत्व?
थायरॉइड हार्मोन बनाने के लिए शरीर को आयोडीन की जरूरत होती है। सेंधा नमक आमतौर पर आयोडीनयुक्त नहीं होता, हालांकि कुछ उत्पादों में आयोडीन मिलाया जा सकता है।
यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक केवल गैर-आयोडीनयुक्त नमक का इस्तेमाल करता है और उसके भोजन में आयोडीन के अन्य स्रोत भी पर्याप्त नहीं हैं, तो आयोडीन की कमी का जोखिम बढ़ सकता है।
इसका मतलब यह नहीं है कि कभी-कभार सेंधा नमक इस्तेमाल करने से थायरॉइड की बीमारी हो जाएगी। महत्वपूर्ण बात यह है कि लंबे समय तक शरीर को पर्याप्त आयोडीन और अन्य पोषक तत्व मिलते रहें। जरूरत से ज्यादा आयोडीन लेना भी नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए आयोडीन सप्लीमेंट डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेने चाहिए।
व्रत के दौरान थायरॉइड की दवा लेते समय रखें ध्यान
थायरॉइड की दवा लेने वाले लोगों को उपवास के दौरान अपने दवा संबंधी निर्देशों का पालन करना चाहिए। खासकर लेवोथायरॉक्सिन लेने वालों के लिए दवा का समय और भोजन के साथ उसका अंतर महत्वपूर्ण हो सकता है।
दवा के सेवन का तरीका बदलने से पहले डॉक्टर या फार्मासिस्ट से सलाह लें। केवल व्रत रखने के कारण दवा छोड़ना या उसकी खुराक बदलना उचित नहीं है।
व्रत के दौरान इन बातों का ध्यान रखा जा सकता है:
- डॉक्टर द्वारा बताई गई दवा नियमित रूप से लें।
- पर्याप्त पानी पिएं, यदि डॉक्टर ने तरल पदार्थ सीमित करने की सलाह नहीं दी है।
- अपने खान-पान में प्रोटीन और अन्य जरूरी पोषक तत्वों के उपयुक्त स्रोत शामिल करें।
- बहुत लंबे समय तक भोजन से परहेज करने या अत्यधिक कैलोरी कम करने से बचें।
- कमजोरी या अन्य असामान्य लक्षण होने पर डॉक्टर से सलाह लें।
दूध, दही, फल, मेवे और अन्य खाद्य पदार्थों का सेवन व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और व्रत के नियमों के अनुसार किया जा सकता है। हालांकि, लेवोथायरॉक्सिन जैसी दवाओं के साथ कुछ खाद्य पदार्थों और सप्लीमेंट का समय महत्वपूर्ण हो सकता है।
महिलाओं को थायरॉइड टेस्ट कब करवाना चाहिए?
यदि किसी महिला को लगातार थकान, मासिक धर्म में अनियमितता या बिना स्पष्ट कारण वजन में बदलाव जैसे लक्षण महसूस होते हैं, तो उसे डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए। गर्भधारण में कठिनाई या बार-बार गर्भपात का इतिहास होने पर भी डॉक्टर थायरॉइड की जांच पर विचार कर सकते हैं।
परिवार में थायरॉइड रोग या कुछ ऑटोइम्यून बीमारियों का इतिहास होने पर भी चिकित्सकीय सलाह उपयोगी हो सकती है।
आमतौर पर शुरुआती जांच में TSH ब्लड टेस्ट किया जाता है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर फ्री T4 या अन्य जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।
सभी महिलाओं के लिए बिना किसी लक्षण या जोखिम के थायरॉइड जांच की जरूरत एक जैसी नहीं होती। जांच का निर्णय व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार होना चाहिए।
त्योहारों में थायरॉइड की सेहत का कैसे रखें ध्यान?
त्योहारों के दौरान खान-पान की दिनचर्या बदलना सामान्य है, लेकिन लंबे समय तक अपर्याप्त भोजन करना या दवा का समय बिगाड़ना परेशानी बढ़ा सकता है।
थायरॉइड की बीमारी से पीड़ित महिलाओं को व्रत रखने से पहले अपनी स्वास्थ्य स्थिति के बारे में डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए, खासकर यदि वे गर्भधारण की योजना बना रही हों या गर्भवती हों।
निष्कर्ष: थायरॉइड हार्मोन का असंतुलन मासिक धर्म, ओव्यूलेशन और कुछ मामलों में फर्टिलिटी को प्रभावित कर सकता है। लंबे समय तक अत्यधिक उपवास या पोषण की कमी शरीर के हार्मोनल संतुलन पर असर डाल सकती है, लेकिन सामान्य रूप से कभी-कभार व्रत रखना अपने आप में थायरॉइड रोग का कारण नहीं है। संतुलित आहार, दवा का सही इस्तेमाल और जरूरत के अनुसार चिकित्सकीय जांच से थायरॉइड की सेहत का बेहतर ध्यान रखा जा सकता है।
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