नई दिल्ली: केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने वैश्विक व्यापार को लेकर एक बड़ा बयान दिया है. उन्होंने स्पष्ट किया है कि वर्तमान समय में विश्व व्यापार संगठन (WTO) एक मंच के रूप में बहुत प्रभावी नहीं रह गया है, जिसके कारण देशों को अब ज्यादातर द्विपक्षीय स्तर पर कदम उठाने पड़ रहे हैं. हालांकि, उन्होंने यह भरोसा भी जताया कि वैश्विक व्यापार अभी भी डब्ल्यूटीओ के नियमों के दायरे में चल रहा है और भारत बढ़ते संरक्षणवाद के बीच भी दुनिया के साथ अपनी साझेदारी बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.
‘इंडिया ग्लोबल इनोवेशन कनेक्ट’ में दिया बयान’
इंडिया ग्लोबल इनोवेशन कनेक्ट’ (IGIC) के पांचवें वार्षिक सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने यह बातें कहीं. विकसित अर्थव्यवस्थाओं में बढ़ते संरक्षणवाद और वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की भूमिका पर पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए गोयल ने कहा, “आज भारत जब भी किसी देश के साथ व्यापारिक बातचीत करता है, तो वह एक मजबूत स्थिति से काम करता है. हम आपसी मतभेदों को दोस्ती और सहयोग की भावना के साथ सुलझाने में सक्षम हैं.”
घरेलू उद्योगों की सुरक्षा और निष्पक्ष व्यापार
पीयूष गोयल ने स्वीकार किया कि दुनिया के कई बड़े देश अपने स्थानीय उद्योगों को बचाने के लिए सुरक्षात्मक नीतियां अपना रहे हैं. उन्होंने यूरोपीय संघ (EU), अमेरिका और ब्रिटेन का उदाहरण दिया, जो अपने घरेलू स्टील उद्योग को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाने का प्रयास कर रहे हैं. गोयल ने साफ किया कि भारत भी इससे अलग नहीं है और जब भी जरूरत होती है, देश अपनी अर्थव्यवस्था को अनुचित व्यापार प्रथाओं और बाहरी देशों की गलत नीतियों से बचाने के लिए जरूरी कदम उठाता है.
2047 तक 30 लाख अरब (USD 30 Trillion) की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य
भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में भारत ने 38 अमीर देशों के साथ 9 मुफ्त व्यापार समझौते (FTAs) किए हैं. इन विकसित देशों में आबादी बूढ़ी हो रही है और उत्पादन लागत बढ़ रही है, जबकि भारत के पास एक युवा कार्यबल, प्रतिस्पर्धी लागत और 140 करोड़ आकांक्षी उपभोक्ताओं का एक बहुत बड़ा घरेलू बाजार है.
उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के लिए ये वैश्विक साझेदारियां बेहद महत्वपूर्ण हैं. तब तक भारतीय अर्थव्यवस्था लगभग 30 लाख अरब डॉलर के दायरे में पहुंच सकती है. इस बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश में बुनियादी ढांचे (एयरपोर्ट, पोर्ट, एक्सप्रेसवे) को मजबूत किया जा रहा है और ईएफटीए (EFTA) देशों के साथ हुए समझौते के तहत अगले 15 वर्षों में 100 बिलियन डॉलर का निवेश लाने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है.


