कृषि मंत्री ने बिहार में फार्म मशीनरी बैंक (एफएमबी) योजना को किसानों के लिए लाभकारी बताया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 तक प्रत्येक जिले में एक एफएमबी स्थापित करने का लक्ष्य है, जिससे कुल 38 बैंक बनेंगे। इस योजना के तहत 10 लाख रुपये की परियोजना लागत पर 80% (अधिकतम 8 लाख रुपये) का अनुदान मिलेगा। इसका उद्देश्य खेती की लागत कम करना और उपज बढ़ाना है। जीविका समूह, किसान संगठन और पैक्स जैसे समूह इसके लाभार्थी होंगे।
पटना। इन दिनों कृषि विभाग उन योजनाओं का बारंबार स्मरण करा रहा, जो कृषि रोडमैप के अंतर्गत पहले से ही क्रियान्वित हो रहीं। ऐसी ही एक योजना फार्म मशीनरी बैंक (एफएमबी) को कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने किसानों, विशेषकर लघु व सीमांत को आधुनिक, वैज्ञानिक व लाभकारी खेती से जोड़ने का बेहतरीन उपक्रम बताया।
मंगलवार को उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक यंत्रों के माध्यम से खेती की लागत तो घटेगी ही, फसलों की गुणवत्ता और उपज में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इस उद्देश्य से वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रत्येक जिले में एक-एक एफएमबी की स्थापना का लक्ष्य है। यानी कि पूरे बिहार में कम-से-कम 38 एफएमबी की स्थापना होनी है।
अनुदान 80 प्रतिशत
उन्होंने बताया कि फार्म मशीनरी बैंक की स्थापना के लिए अधिकतम दस लाख रुपये की परियोजना लागत निर्धारित है। स्थानीय फसल चक्र को ध्यान में रखते हुए जोताई, बोआई/रोपनी, हार्वेस्टिंग एवं थ्रेसिंग से संबंधित प्रत्येक कृषि क्रिया हेतु कम-से-कम एक-एक आधुनिक यंत्र को इसमें सम्मिलित करना अनिवार्य होगा। इस योजना के अंतर्गत कुल परियोजना लागत पर 80 प्रतिशत (अधिकतम आठ लाख रुपये) का अनुदान देय है।
किन्हें मिलेगा लाभ
इस योजना का लाभ जीविका के स्वयं सहायता समूह, ग्राम संगठन, क्लस्टर फेडरेशन, आत्मा से संबद्ध फार्मर इंटरेस्ट ग्रुप, नाबार्ड अथवा राष्ट्रीयकृत बैंकों से संबद्ध किसान क्लब, किसान उत्पादक संगठन, किसान उत्पादक कंपनी, स्वयं सहायता समूह और पैक्स को मिलेगा।


