Wednesday, September 30, 2026

कुजू में झूमर महोत्सव ने बिखेरी लोक संस्कृति की छटा, मांदर की थाप पर देर तक झूमे लोग.

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कुजू। बड़की डूंडी स्थित बीडीसीए मैदान बुधवार को झारखंड की पारंपरिक लोक संस्कृति से सराबोर नजर आया। यहां आयोजित बृहद झूमर कार्यक्रम-2026 में विभिन्न गांवों से पहुंचे कलाकारों ने गीत और नृत्य की शानदार प्रस्तुतियां देकर माहौल को जीवंत कर दिया। मांदर की थाप और झूमर की धुन पर दर्शक भी देर तक उत्साह में झूमते नजर आए।

कई गांवों की टीमों ने दी पारंपरिक प्रस्तुतियां

कार्यक्रम में कच्चाडाड़ी, होनेग, कैथा, मुराम, पचमो, बड़की डूंडी और कंडेर समेत आसपास के कई क्षेत्रों की टीमों ने हिस्सा लिया। कलाकारों ने झारखंड के ग्रामीण जीवन, खेत-खलिहान, सामाजिक परंपराओं और स्थानीय संस्कृति से जुड़े गीतों व नृत्यों की प्रस्तुति दी।

हर टीम की प्रस्तुति के दौरान मैदान में मौजूद लोगों ने तालियों के साथ कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। पारंपरिक वेशभूषा और लोकधुनों ने कार्यक्रम को खास आकर्षण दिया।

लोक परंपरा को नई पीढ़ी से जोड़ने का प्रयास

आयोजकों के अनुसार झूमर झारखंड के ग्रामीण समाज की महत्वपूर्ण लोक परंपराओं में शामिल है। पर्व-त्योहार, विवाह और सामाजिक आयोजनों में इसका विशेष महत्व रहा है। बदलते दौर में इस सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने और युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने के उद्देश्य से ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने बढ़ाया कलाकारों का हौसला

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मांडू विधायक तिवारी महतो उर्फ निर्मल महतो मौजूद रहे। इसके अलावा कुजू वन विभाग के रेंजर बटेश्वर पासवान, करमा परियोजना पदाधिकारी रामेश्वर मुंडा, जिला परिषद सदस्य तापेश्वर महतो, छोटकी डूंडी पंचायत के मुखिया रामसेवक कुमार महतो और पंचायत समिति सदस्य रीना कुमारी सहित अन्य अतिथि उपस्थित रहे।

अतिथियों ने कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए झारखंड की लोक परंपराओं को आगे बढ़ाने में ऐसे आयोजनों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

पांच टीमों को मिला पुरस्कार

प्रतियोगिता के लिए लुटेश्वर महतो, चुरण महतो और चिंतामणि महतो को निर्णायक मंडली की जिम्मेदारी दी गयी थी। निर्णायकों के मूल्यांकन के बाद पांच टीमों को विजेता के रूप में सम्मानित किया गया। अन्य प्रतिभागी टीमों को भी प्रोत्साहन के तौर पर नगद पुरस्कार प्रदान किया गया।

आयोजन समिति के अध्यक्ष कृष्ण कुमार महतो ने कहा कि झूमर सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण जीवन और स्थानीय पहचान से जुड़ी सांस्कृतिक विरासत है। ऐसे कार्यक्रमों से स्थानीय कलाकारों को मंच मिलने के साथ परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिलती है।

बड़ी संख्या में ग्रामीण हुए शामिल

कार्यक्रम में छोटकी डूंडी की वार्ड सदस्य पिंकी कुमारी, कोलेश्वर रविदास, प्रीति कुमारी, मनोज सोरेन, सुमित्रा कुमारी, उपमुखिया गोपाल कुमार महतो, पूनम देवी और सावित्री देवी समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

कार्यक्रम को सफल बनाने में मुख्य संरक्षक लुटेश्वर महतो, छेदी महतो, अध्यक्ष कृष्ण कुमार महतो, उपाध्यक्ष सुनील कुमार महतो, सचिव प्रदीप कुमार, सह-सचिव दीपक कुमार, कोषाध्यक्ष झालेश्वर कुमार महतो और उप-कोषाध्यक्ष पंछित महतो समेत आयोजन समिति के सदस्यों की अहम भूमिका रही।

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