मुंबई: वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आए भारी उछाल और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय बाजारों में मंगलवार को सोने और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दोनों कीमती धातुएं अपने ऊपरी स्तरों से 2 प्रतिशत तक फिसल गईं.
MCX पर कीमतों का हाल
मंगलवार को MCX पर जून वायदा सोने में भारी बिकवाली देखी गई. पीली धातु ₹1,50,450 प्रति 10 ग्राम के इंट्राडे लो तक गिर गई, जो पिछले बंद से 0.83 प्रतिशत या ₹1,271 की गिरावट है. हालांकि, दिन के दौरान इसने ₹1,51,802 का उच्च स्तर भी छुआ, लेकिन टिक नहीं सकी. खबर लिखे जाने तक सोना ₹1,50,600 के स्तर पर कारोबार कर रहा था.
चांदी की स्थिति और भी नाजुक रही. मई वायदा चांदी 2.16 प्रतिशत या ₹5,224 की भारी गिरावट के साथ ₹2,36,600 प्रति किलोग्राम के निचले स्तर पर पहुंच गई. अंतिम आंकड़ों के अनुसार, चांदी ₹2,37,600 पर टिकी थी.
क्रूड की तेजी ने बढ़ाई चिंता
कीमती धातुओं में इस गिरावट का मुख्य कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई आग है. ब्रेंट क्रूड एक बार फिर $110 के स्तर को पार कर $111.31 प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो इसके 52 हफ्तों का उच्चतम स्तर है. वहीं, अमेरिकी WTI क्रूड भी 2.53 प्रतिशत बढ़कर $98.81 पर कारोबार कर रहा है. बाजार जानकारों का मानना है कि तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई के डर को बढ़ा रही हैं, जिससे निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने के बजाय अन्य विकल्पों पर विचार कर रहे हैं.
अमेरिका-ईरान तनाव और कूटनीतिक गतिरोध
पश्चिम एशिया में स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है. अमेरिका ने ईरान के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है जिसमें जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोलने और परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के बदले प्रतिबंध हटाने की शर्त रखी गई थी. अमेरिका अब दोनों मुद्दों का एक साथ व्यापक समाधान चाहता है, जिससे वार्ता में अनिश्चितता बढ़ गई है.
विशेषज्ञों की राय
कमोडिटी विशेषज्ञों के अनुसार, सोने के लिए ₹1,52,000 का स्तर एक बड़ी बाधा (रजिस्टेंस) बना हुआ है. यदि कीमतें ₹1,51,000 के नीचे बनी रहती हैं, तो और अधिक प्रॉफिट बुकिंग देखी जा सकती है. चांदी के लिए ₹2,40,000 का स्तर महत्वपूर्ण है; इसके नीचे रहने पर बिकवाली का दबाव और बढ़ सकता है.
उल्लेखनीय है कि पिछले एक साल में सोने ने डॉलर के संदर्भ में 40 प्रतिशत और चांदी ने 125 प्रतिशत का जबरदस्त रिटर्न दिया है, जिससे अब निवेशक ऊंचे स्तरों पर मुनाफा वसूली कर रहे हैं.


