Tuesday, May 5, 2026

एफएसएसएआई ने खाद्य उत्पादों में अश्वगंधा पत्तियों पर प्रतिबंध लगाया; सुरक्षा कारणों से अब केवल जड़ों और उनके अर्क के उपयोग की अनुमति है.

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नई दिल्ली: भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने देश के खाद्य विनिर्माताओं (FBOs) के लिए एक महत्वपूर्ण परामर्श जारी किया है. इस नए निर्देश के तहत, अब स्वास्थ्य पूरक, न्यूट्रास्युटिकल्स और विशेष औषधीय आहार तैयार करने वाली कंपनियों को अपने उत्पादों में केवल अश्वगंधा की जड़ों और उनके अर्क का उपयोग करने की अनुमति होगी. नियामक ने अश्वगंधा की पत्तियों के किसी भी रूप में उपयोग को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया है.

नियमों का उल्लंघन और चिंता
एफएसएसएआई के संज्ञान में यह बात आई थी कि कई कंपनियां लागत कम करने या अन्य कारणों से अपने उत्पादों में अश्वगंधा की पत्तियों और उनके अर्क का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रही हैं. नियामक ने स्पष्ट किया कि वर्तमान खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत, अश्वगंधा की पत्तियों को कच्चे रूप, पाउडर या अर्क के रूप में उपयोग करने की अनुमति कभी दी ही नहीं गई थी. यह परामर्श उन विनिर्माताओं के लिए एक कड़ी चेतावनी है जो नियमों की अनदेखी कर रहे थे.

आयुष मंत्रालय का रुख
यह कदम अकेले एफएसएसएआई का नहीं है, बल्कि आयुष मंत्रालय ने भी इस पर अपनी सहमति जताई है. मंत्रालय ने पहले ही दवा विनिर्माताओं को निर्देश दिया था कि वे औषधीय उपयोग के लिए केवल अश्वगंधा की जड़ों को ही प्राथमिकता दें. विशेषज्ञों का मानना है कि पारंपरिक आयुर्वेद में अश्वगंधा की जड़ के गुणों का व्यापक उल्लेख है, जबकि पत्तियों के सुरक्षा डेटा और उनके दीर्घकालिक प्रभावों पर अभी भी शोध की आवश्यकता है.

पत्तियों पर प्रतिबंध क्यों?
वैज्ञानिकों के अनुसार, अश्वगंधा की पत्तियों में ‘विथेफेरिन-ए’ जैसे कुछ फाइटोकेमिकल्स की सांद्रता जड़ों की तुलना में बहुत अधिक होती है. इन रसायनों का अत्यधिक सेवन लिवर के लिए विषाक्त (Toxic) हो सकता है और शरीर के अन्य अंगों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है. सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए ही यह सख्त कदम उठाया गया है.

सख्त निगरानी के निर्देश
एफएसएसएआई ने सभी राज्यों के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों और क्षेत्रीय अधिकारियों को इस निर्देश का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा है. अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे बाजार में उपलब्ध सप्लीमेंट्स और हर्बल उत्पादों की कड़ी निगरानी करें और दोषी पाए जाने वाले विनिर्माताओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करें.

इस फैसले के बाद अब कंपनियों को अपने उत्पादों के फॉर्मूले और लेबल में बदलाव करना होगा. उपभोक्ताओं को भी सलाह दी गई है कि वे अश्वगंधा उत्पाद खरीदते समय लेबल पर यह जरूर जांचें कि उसमें केवल ‘जड़’ का ही उपयोग किया गया है.

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