Wednesday, July 1, 2026

आषाढ़ महीने में देवादिवेद और जगत के पालनहार की पूजा का विधान है. विस्तार से पढ़ें.

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 हिंदू शास्त्र में हिंदी के महीनों का विशेष महत्व है. ऐसा इसलिए क्योंकि हर महीने व्रत-त्योहार आते हैं और देवी-देवताओं की पूजा-आराधना की जाती है. बता दें, हिंदू पंचाग के मुताबिक चौथा महीना आषाढ़ का होता है. इस महीने सूर्यदेव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. कहीं-कहीं मंगलदेव की भी पूजा का विधान बताया गया है.

लखनऊ के ज्योतिषाचार्य डॉ. उमाशंकर मिश्र के मुताबिक यह महीना देवादिदेव महादेव और जगत के पालनहार भगवान विष्षु को भी समर्पित होता है. उन्होंने कहा कि इसे संधिकाल का भी महीना कहते हैं. आषाढ़ महीने से ही वर्षा ऋतु शुरू होती है. धर्म की भाषा में इस महीने को कामनापूर्ति का महीना भी कहते हैं. ज्योतिषाचार्य ने बताया कि इस बार आषाढ़ महीने की शुरुआत गुरुवार 12 जून से हो रही है और यह 21 जुलाई तक चलेगा.

पूरे महीने करें इनकी पूजा-उपासना
डॉ. उमाशंकर मिश्र ने बताया कि आषाढ़ महीने में अपने गुरु की पूजा करने का विधान है. इसके साथ-साथ मां दुर्गा की भी आराधना की जाती है. अगर किसी जातक को संतान की कामना है तो वह पूरे महीने श्री हरि की पूजा करें. उसे संतान सुख का वरदान भी मिल सकता है. उन्होंने आगे बताया कि इस महीने मंगल और सूर्य को मजबूत करने के लिए भी पूजा की जाती है.

दान करना होता है शुभ
उन्होंने आगे बताया कि इस महीने की पूर्णिमा काफी महत्व रखती है क्योंकि गुरु पूर्णिमा भी मनाई जाती है. अगर कोई जातक इस महीने छाता, नमक, गुड़, चावल, तिल और गुड़ का दान करे तो उसके भाग्य की वृद्धि होगी और सारे कष्ट कटेंगे.

इन बातों का रखें ध्यान
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि आषाढ़ के महीने जल का अधिक से अधिक प्रयोग करें. फलों का सेवन भी ज्यादा करें. वहीं, तेल के प्रयोग से बचना चाहिए. आषाढ़ महीने में काफी बरसात होती है इसलिए कोई भी चीज लाने से पहले अच्छी तरह से धो लें.

जानें महीने के व्रत और त्योहार
डॉ. उमाशंकर मिश्र ने बताया कि इस महीने गुप्त नवरात्रि भी आती है. वहीं, अगले चार महीने किसी भी शुभ कार्यों को करने की मनाही होती है. इस महीने गुरु पूर्णिमा भी आती है.

तारीखदिनत्योहार
12 जूनगुरुवारआषाढ़ महीने की शुरुआत, प्रतिप्रदा तिथि
14 जूनशनिवारसंकष्टी चतुर्थी
15 जूनरविवारसूर्य का मिथुन राशि में गोचर (मिथुन संक्रांति)
18 जूनबुधवारमासिक जन्माष्टमी, कालाष्टमी
21 जूनशनिवारयोगिनी एकादशी, साल का सबसे बड़ा दिन
22 जूनरविवारमासिक कार्तिगाई
23 जूनसोमवारसोम प्रदोष व्रत, मासिक शिवरात्रि
24 जूनमंगलवाररोहिणी व्रत
25 जूनबुधवारआषाढ़ी अमावस्या
26 जूनगुरुवारगुप्त नवरात्रि प्रारंभ
27 जूनशुक्रवारजगन्नाथ रथयात्रा
28 जूनशनिवारविनायक चतुर्थी
30 जूनसोमवारस्कंद षष्ठी
3 जुलाईगुरुवारमासिक दुर्गाष्टमी
6 जुलाईरविवारदेवशयनी एकादशी
7 जुलाईसोमवारवासुदेव द्वादशी
8 जुलाईमंगलवारभौम प्रदोष व्रत
10 जुलाईबुधवारगुरु पूर्णिमा

ज्योतिषाचार्य ने आगे बताया कि इस महीने तामसिक वस्तुओं का परहेज करना जरूरी है, जैसे- प्याज, लहसुन. भोजन करने में भी सावधानी बरतनी चाहिए. इस महीने के बाद से शुभ कार्यों को करने की मनाही होती है.

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