Tuesday, October 13, 2026

अस्पतालों में इलाज का रेट कार्ड दिखाने की मांग तेज, मेडिकल उपकरणों की कीमत और MRP भी बिल में दिखाने पर जोर.

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नई दिल्ली | 13 अक्टूबर 2026: अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों को खर्च की स्पष्ट जानकारी देने और मेडिकल बिलिंग में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अस्पतालों एवं क्लीनिकों में सेवाओं की दरें प्रमुखता से प्रदर्शित कराने का आग्रह किया है। इस पहल का उद्देश्य मरीजों को इलाज के संभावित खर्च की जानकारी देना, सही निर्णय लेने में मदद करना और बिलिंग को लेकर होने वाले विवादों को कम करना है।

एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री (AiMeD) ने स्वास्थ्य मंत्रालय की इस पहल का स्वागत किया है। संगठन ने मांग की है कि अस्पतालों में इलाज की दरों के साथ-साथ इस्तेमाल किए जाने वाले मेडिकल उपकरणों और उपभोग्य सामग्रियों की कीमतों की जानकारी भी पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराई जाए।

अस्पतालों को सेवाओं और सुविधाओं की दरें दिखाने का आग्रह

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर संबंधित नियमों के पालन की समीक्षा करने को कहा है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि मरीजों और उनके परिजनों को अस्पताल में उपलब्ध सेवाओं और सुविधाओं की दरें आसानी से दिखाई दें।

मंत्रालय के अनुसार, जिन क्षेत्रों में क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट (पंजीकरण और विनियमन) अधिनियम, 2010 लागू है, वहां संबंधित अस्पतालों और क्लीनिकों को निर्धारित नियमों के तहत अपनी सेवाओं और सुविधाओं की दरें प्रदर्शित करनी होती हैं।

क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट (केंद्र सरकार) नियम, 2012 के प्रावधानों के अनुसार, यह जानकारी स्थानीय भाषा और अंग्रेजी में प्रमुखता से प्रदर्शित की जानी चाहिए।

हालांकि, जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में केंद्रीय अधिनियम लागू नहीं है, वहां स्वास्थ्य संस्थानों का नियमन संबंधित स्थानीय कानूनों और नियमों के तहत होता है। कई राज्यों के अपने नियमों में भी स्वास्थ्य सेवाओं की दरें सार्वजनिक करने का प्रावधान है।

AiMeD ने मेडिकल उपकरणों की कीमतें भी बताने की उठाई मांग

AiMeD के फोरम कोऑर्डिनेटर डॉ. राजीव नाथ ने अस्पतालों में दरें प्रदर्शित करने की पहल को मरीजों के हित में महत्वपूर्ण कदम बताया। उनके अनुसार, इससे मरीजों को इलाज के खर्च की बेहतर जानकारी मिलेगी और स्वास्थ्य सेवाओं की कीमतों में पारदर्शिता बढ़ सकती है।

डॉ. नाथ ने यह भी कहा कि इस पहल का दायरा केवल अस्पताल की सेवाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इलाज के दौरान इस्तेमाल होने वाले मेडिकल उपकरणों और उपभोग्य सामग्रियों की कीमतों का विवरण भी स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

संगठन की मांग है कि मरीजों को यह समझने का अवसर मिले कि चिकित्सा उपकरणों और अन्य सामग्रियों की कीमतें किस आधार पर तय होती हैं और सप्लाई चेन में अलग-अलग स्तरों पर कितना मार्जिन जोड़ा जाता है।

मेडिकल बिल में लैंडिंग प्राइस और MRP का विवरण देने पर जोर

मेडिकल बिलिंग में पारदर्शिता को लेकर कर्नाटक खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की पहल का भी AiMeD ने स्वागत किया है। रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक FDA ने अस्पतालों, स्वास्थ्य संस्थानों, वितरकों, थोक विक्रेताओं और खुदरा विक्रेताओं से अस्पताल के बिलों पर लैंडिंग प्राइस और अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) का विवरण प्रदर्शित करने को कहा है।

लैंडिंग प्राइस से आशय उस कीमत से है जिस पर कोई उत्पाद संबंधित विक्रेता या संस्थान तक पहुंचता है। वहीं, MRP वह अधिकतम खुदरा मूल्य है, जिस पर उत्पाद को बेचा जा सकता है।

इन दोनों कीमतों का उल्लेख होने से मरीजों को मेडिकल उपकरणों और संबंधित सामग्रियों की लागत समझने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इस व्यवस्था का वास्तविक लाभ संबंधित नियमों के लागू होने और उनके प्रभावी पालन पर निर्भर करेगा।

एक समान राष्ट्रीय ढांचा बनाने की मांग

AiMeD ने मेडिकल उपकरणों और उपभोग्य सामग्रियों की कीमतों को लेकर देशभर में एक समान राष्ट्रीय ढांचा तैयार करने की मांग की है। संगठन का मानना है कि इससे अलग-अलग राज्यों में कीमतों के खुलासे से संबंधित नियमों में एकरूपता लाने और मरीजों को स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।

डॉ. राजीव नाथ ने कहा कि उनका संगठन इस तरह का ढांचा तैयार करने में सहयोग देने के लिए तैयार है। इस मांग का प्रमुख उद्देश्य मेडिकल उपकरणों की कीमतों और सप्लाई चेन में शामिल अलग-अलग स्तरों के मार्जिन को अधिक पारदर्शी बनाना है।

विदेशी मरीजों के लिए भी पैकेज रेट प्रदर्शित करने पर जोर

स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से मेडिकल या आयुष वीजा पर भारत आने वाले विदेशी मरीजों के लिए भी, जहां लागू हो, इलाज के पैकेज की दरें प्रदर्शित कराने को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया है।

इससे विदेशी मरीजों को भारत में उपचार कराने से पहले संभावित खर्च का अनुमान लगाने में मदद मिल सकती है। साथ ही, अस्पतालों के बीच सेवाओं और पैकेज की कीमतों को समझना भी आसान हो सकता है।

मरीजों को क्या होगा फायदा?

अस्पतालों में सेवाओं की दरें स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होने और मेडिकल बिल में उपकरणों की कीमतों का विवरण मिलने से मरीजों को कई तरह से मदद मिल सकती है।

  • इलाज के खर्च का अनुमान: मरीज उपचार शुरू कराने से पहले संभावित खर्च की जानकारी ले सकेंगे।
  • सोच-समझकर निर्णय: उपलब्ध जानकारी के आधार पर मरीज और उनके परिजन उपचार संबंधी निर्णय ले सकेंगे।
  • बिलिंग में पारदर्शिता: मेडिकल उपकरणों और उपभोग्य सामग्रियों की कीमतें स्पष्ट होने से बिल समझना आसान हो सकता है।
  • विवादों में कमी: स्पष्ट दरें और बिल का विवरण खर्च को लेकर होने वाले भ्रम और विवाद कम करने में मदद कर सकते हैं।

हालांकि, इन लाभों को सुनिश्चित करने के लिए संबंधित नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन और अस्पतालों द्वारा उनका पालन आवश्यक होगा।

निष्कर्ष

अस्पतालों में इलाज की दरें प्रदर्शित कराने को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय की पहल मरीजों के लिए खर्च की जानकारी अधिक सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वहीं, AiMeD ने मेडिकल उपकरणों और उपभोग्य सामग्रियों की कीमतों को भी पारदर्शी बनाने की मांग उठाई है।

अब इस पहल का असर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नियमों के पालन तथा मेडिकल बिलिंग में कीमतों का विवरण देने की व्यवस्था पर निर्भर करेगा। यदि दरों और बिलों की जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध होती है, तो मरीजों को इलाज के खर्च को समझने और वित्तीय योजना बनाने में मदद मिल सकती है।

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